Fri. Dec 14th, 2018

नेपाल-भारत बीच के साहित्यिक-सांस्कृतिक सम्बन्ध अन्य सम्बन्धों से महत्वपूर्ण और खास है : ध्रुवचन्द्र गौतम

ध्रुवचन्द्र गौतम, वीरगंज (नेपाल)
ध्रुवचन्द्र गौतम, वीरगंज (नेपाल)

सन्दर्भ : नेपाल भारत साहित्यिक सम्मेलन 2018

महोत्सव निरन्तर जारी रहना चाहिए

हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८ नेपाल–भारत संबंध आज ही विकसित हुआ है, यह नहीं है । हमारे संबंध तो सदियों से हैं । भारतीय सीमा वीरगंज में रहने के कारण मैं बचपन से ही हिन्दी साहित्य के प्रति आकर्षित रहा, हिन्दी साहित्य के प्रति ही ज्यादा दिलचस्पी रही । हिन्दी साहित्य के बड़े–बड़े लेखकों को मैंने पढ़ा है । यहाँ तक कि हमारी पाठ्यपुस्तक ही हिन्दी भाषा में होती थी । उस समय वीरगंज में ५–६ से अधिक पुस्तकालय था, जहां हिन्दी भाषा की पुस्तकें ही ज्यादा होती थी । वीरगंज में नेपाल–भारत सांस्कृतिक केन्द्र भी था, जहां से भी हम लोग हिन्दी पुस्तकें प्राप्त करते थे । इस तरह हिन्दी से मेरी निकटता रही । आज भी मैं हिन्दी किताब पढ़ता हूं ।
इससे पहले भी भारत और नेपाल के लेखक तथा कवि वीरगंज में इकठ्ठा होकर साहित्य महोत्सव करते थे । लेकिन इस बार का महोत्सव का महत्व कुछ ज्यादा ही है । इसतरह का महोत्सव, नेपाल और भारत को आपस में और नजदीक लाने का काम करता है । इसीलिए महोत्सव निरन्तर जारी रहना चाहिए । महोत्सव से आपसी भावनाओं का आदान–प्रदान होता है, साहित्यकारों के बीच आपसी सम्बन्ध मजबूत बनता है, जो दो देशों के आपसी संबंध के लिए आवश्यक है ।
महोत्सव का महत्वपूर्ण सन्देश यह है कि नेपाल–भारत बीच जो साहित्यिक तथा सांस्कृतिक सम्बन्ध है, वह अन्य सम्बन्धों से कुछ महत्वपूर्ण और खास है । विशेषतः राजनीतिक सम्बन्ध में उतार–चढावपूर्ण अवस्था आती ही रहती है । उतार–चढावपूर्ण रहनेवाले अन्य संबंधों को सामान्यकृत करने के लिए भी इस तरह का साहित्यिक तथा सांस्कृतिक सम्बन्ध आवश्यक है । साहित्यिक महोत्सव ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक ऊर्जा प्रदान किया है । हम लोगों ने तो पहले से ही हिन्दी पढ़ा है, लेकिन महोत्सव से कई भारतीय साहित्यकारों को भी नेपाली साहित्य और संस्कृति पढ़ने का अवसर दिया है ।

 

 

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of