Sat. Apr 20th, 2019

सिनेमा – साहित्य और कला का अनूठा संगम : संदीप मारवाह

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हिमालिनी, अंक फेब्रुअरी 2019 |
वरिष्ठ पत्रकार और हिमालिनी प्रतिनिधि एस.एस.डोगरा की विश्व विख्यात मीडिया हस्ती संदीप मारवाह से हुई बातचीत का प्रमुख अंश–
० सर आपके मारवाह स्टूडियो के अंदर आपने राइटर मीट रखी है उसका क्या उद्देश्य है ?

संदीप मारवाह
संदीप मारवाह

– देखिए हम लोग पिछले ४ साल से ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल करते चले आ रहे हैं । हमारा ग्लोबल लिटरेरी ३ दिन का होता है और इन ३ दिन के अंदर हम लोग लिटरेचर को लेकर साहित्य को लेकर हाहाकार मचाते हैं । तकरीबन १००÷१५० स्पीकर पूरे देश भर से और दुनिया भर से यहां मौजूद होते हैं । करीब ३५ से ४० कंट्री कवर कर चुके हैं ५२ इसमें इवेंट होते हैं । हमारा उस समय उद्देश्य यह बना था कि हम साहित्य को उजागर करें, आगे लेकर चले क्योंकि जब से मोबाइल आया है तब से लोगों की पढ़ने लिखने और अच्छी भाषा बोलने की तमीज और तहजीब है वह कहीं ना कहीं थोड़ी बहुत गिरती चली जा रही है । इस बात से पीडित होकर हम लोगों ने लिटरेचर फेस्टिवल शुरू किया था । अब मुझे लगता है कि ४ साल के बाद आज का जो यह कदम था उसके लिए आगे का कदम उठाया है कि अब हम लोग उन्ही राइटर्स को लेकर एक कदम आगे लेकर चलना चाहते हैं । हमारा जो मेन मुद्दा है कि हम किस तरीके से अच्छा लिखे, अच्छा बोलें और अच्छा पढ़े ।

० सर जैसा कि आपको सिनेमा वल्र्ड में काफी जाना और पहचाना जाता है और पिछले चार वर्षों से साहित्य पर भी इतना बड़ा काम कर रहें है बेसिकली इस तरह से इतने लोगो को जोड़ना और ऐसा काम करना मतलब आपको प्रेरणा कहाँ से मिलती है इतनी सारी एनेर्जी कहाँ से आती है ?
– देखिए ये तो सोच की बात हैं क्योंकि हम लोग अच्छा काम करना चाहते हैं तो मुझे लगता है कि हमें अच्छे लोग ही मिलते हैं दुनियाभर के लोग यहां मिलते हैं बातें होती हैं विचार बांटे जाते हैं एवं वार्तालापें होती हैं और उन्ही में से ही अच्छे विचार पैदा होते हैं । तो आज का ये जो विचार था कि हम एक राइटर्स एसोसिएशन आपÞm इंडिया एक नया ऐसा इन्कलाब पैदा करे । क्योंकि मैं पिछले चार साल से ये ओब्सर्व कर रहा हूं कि देश में विभिन्न राइटर्स एसोसिएशन बनी तो जरुर थी लेकिन कहीं न कहीं कोई टूटी पड़ी हैं, कोई गिरी पड़ी है, कोई बुझी पड़ी है, कईयों में लड़ाई झगड़े हैं, कईयों के पास पैसा नहीं है । और इस तरह हमारे जो राइटर्स है वो फिर से एक बार बिखर से गए हैं इन सबको बाँधना, इनकी सोच पे कहीं न कहीं देश के प्रति भाव पैदा करना, नई जनरेशन के लिए अच्छी विचारधारा को ढूढ के लाना, यही सारे मुद्दे हैं इस संस्था के भी रहेंगे ।

० कुछ ऐसी चीजें जोकि यहाँ पर रेगुलर आपके मारवाह स्टूडियो में होती रहती हैं साहित्य, कला और सिनेमा को लेकर उन चुनिन्दा के बारें में आप जिक्र करना चाहेंगे ?
– जी बिल्कुल, क्योंकि साल भर हम लोग चाहे वो वर्कशाप सेमिनार हैं, सिंपोजियम है, इंटरेक्शन प्रोग्राम है, बुक रिलीज हैं, पोस्टर रिलीज हैं, वार्तालापें हैं, बड़े–बड़े राइटर्स का यहाँ आना, बातचीत करना, ये सिलसिला जो है ये लगातार चला रहा है पिछले २५ सालों से । लेकिन, उसे आज, हमने एक फॉर्मल शेप दे दी है । और इस शेप को देने से हमें ऐसा महसूस हो रहा है कि हम लोग ज्यादा तेजी से आगे बढ़ सकेंगे । पचास राइटर्स जो आज देश भर से यहाँ पहुंचे और उन्होंने अपने विचार दिए, अपनी सोच यहाँ पर बांटी उसमें से बहुत सारी चीजें ऐसा नहीं है कि नहीं हो रही है हो रही हैं । लेकिन कुछ ऐसे नए विचार मिल गए मुझे लगता है उसके जरिए हम लोग और आगे बढ़ सकेंगे ।

० आपने चार जो लिटरेरी फेस्टिवल किए हैं आलरेडी, तो ये पांचवां आयोजन उसी के बारे में शायद आपने ये मीटिंग करी भी थी तो ऐसी क्या नई चीजें और आप इंट्रोड्यूज करना चाह रहें हैं ताकि उसके अन्दर और क्लेवर और फ्लेवर आए ।
– देखिए जी हमें जो आज हम लोगों को सबसे सुनने को मिला तो हमें बड़ा अच्छा महसूस हुआ कि अब तक के पिछले चार हमारे जो ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल हुए हैं उसमें शायद ही कोई ऐसी चीज है जो छूट गई हो । जबकि हम लोगों ने ज्यादा तव्वजो हिंदी को दिया, इंग्लिश और रीजिनल भाषाओँ के ऊपर भी सेमिनार और वर्कशाप हुई पोस्टर लांच हुए करीब एक–एक फेस्टिवल में तीस– तीस किताबों का लाँच होना ये अपने आप में बहुत बड़ा मायने रखता है । और तीस से चालीस मुल्कों का भाग लेना और जो यंग जनरेशन को जो हमें टैप करना है क्योंकि जो पिछली बार भी देश के तकÞरीबन २९ स्टेटस और सात यूनियन टेरिटरी से बच्चे हमारे यहाँ पहुंचे, और स्कूल और कोलेज के बच्चों को पार्टि्सिपेट कराना जो अपने आप में बहुत बड़ा ख्व्याब था लोगों का, वो हमने इन फेस्टिवलों के जरिए पूरा किया । और चर्चित लेखकों को, कवियों को, मुशायरों को, कवि सम्मेलनों को एक साथ बांधना ये एक मेहनत का काम तो है ही । लेकिन मारवाह स्टूडियो की टीम इतनी जबरदस्त है मेरे पास, कि हम लोग, जैसे हमने पिछली बार कोशिश की थी इस बार भी हमारी कोशिश रहेगी कि इन सबको हम एक साथ बांधकर तीन दिन के लिए यहाँ पर इस प्रांगण में लाएं ताकि उसका फायदा उन सभी लोगों को हो जो उस वक्त तीन दिनों में मारवाह स्टूडियो में मौजूद हैं ।

० सर एक लास्ट क्वेश्चन आप ग्लोबली इतना मूव करते हैं डिफरेंट जगह जाते रहते हैं हमारे को बड़ा गर्व होता है आपकी सारी मूवमेंट और एक्टिविटी देखकर, और आप ग्लोबल मीडिया गुरु के नाम से भी जाने जाते हैं आप जो है युवा पीढ़ी को क्या एक ऐसा टिप्स देना चाहते हैं ताकि वो भी अपने जीवन में आपके कुछ चीजों से लाभ ले सकें ।
– देखिए मैं समझता हूँ कि जो फिल्म, टेलीविजन, मीडिया आर्ट कल्चर जैसे क्षेत्र के साथ जुड़ना चाहता है उन्हें इन तीनो चीजो के ऊपर महत्व देना पड़ेगा पहला कि उसे बोलना आना चाहिए दूसरा उसे लिखना आना चाहिए और तीसरा उसे पढ़ने का शौक होना चाहिए । जब आप ये तीन चीजें आप अपने साथ अपने पल्लू के साथ बांध लेगें तो मुझे पूरी उम्मीद है कि आप कम से कम इस क्षेत्र में आगे नाम करेंगे इज्जत आपकी होगी और कुछ नया करने का आपको मौका जरूर मिलेगा ।

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