Mon. Oct 15th, 2018

मानवीय संवेदनशीलता को भी समझना होगा-हिसिला यमी

हिसिला यमी, नेतृ, नयां शक्ति पार्टी

आज हम लोग विकास की बात कर रहे हैं । ‘विकास’ शब्द के प्रति हिटलर भी आकर्षित हुआ था । हिटलर इस कारण भी प्रसिद्ध हुए था कि उसने एक ‘नेशनल हाइवे नेटवर्क’ निर्माण किया था । आज नेपाल में कम्युनिष्टों की सत्ता है, लोगों की अपेक्षा विकास पर है । लेकिन हम लोग किस तरह का विकास चाहते हैं ? इस में स्पष्ट होना जरुरी है । देश के भीतर ही नाकेबंदी करना है, क्या ऐसे ही विकास चाहते हैं ? अथवा आज जो फास्टट्रयाक निर्माण हो रहा है, उसके विरुद्ध ललितपुर जिला स्थित कोखना के स्थानीयवासी आन्दोलन कर  हैं, क्या इस तरह का विकास ? संसार में कहीं भी बस्ती के भीतर से हाइवे निर्माण नहीं किया जाता, लेकिन वहां हो रहा है । दूसरी बात जहां हाइवे निर्माण हो रहा है, वहां के पीडित लोगों को मुआबजा प्राप्त नहीं हो रहा है । आन्दोलन होने के कारण आज काठमांडू में ट्रैफिक समस्या बढ़ जाती है । मुझे लगता है इस तरह का विकास हम लोग नहीं चाहते हैं । मेरे कहने का मतलब यह है कि विकास करते वक्त मानवीय सम्वदेना और भावना को भी सम्बोधन होना चाहिए । हमारी प्राथमिकता यह भी है ।
नेपाल–भारत के बीच विकास के संबंध में अगर बात होती है तो यहां भी उसी बात को खयाल करना चाहिए । क्योंकि भौतिक विकास ही सम्पूर्ण सत्य नहीं है । मानवीय आवश्यकता के साथ–साथ, सम्वेदनशीलता और भावना को भी सम्बोधन होना जरुरी है । नहीं तो विकास, विनाश भी बन सकता है ।
आज अमेरिका में एक नारा है– ‘लेट्स मेक अमेरिका ग्रेट ।’ इसीतरह ‘लेट्स मेक चाइना ग्रेट’ और ‘लेट्स मेक इण्डिया ग्रेट’ के नारे भी सामने आए हैं । इसीलिए हमारा नारा भी ‘लेट्स मेक नेपाल’ होना चाहिए । और उस को व्यावहारिक रूप में कार्यान्वयन करना चाहिए । आज विश्व में जितनें भी देश हैं, वह सब अन्तरनिर्भर होते जा रहे हैं । इस पृष्ठभूमि में अपने देश के लिए तुलनात्मक फायदा कहां है, इसमें हमारी ध्यान जाना जरुरी है । तब ही हमारे देश ‘ग्रेट’ बन सकता है, आत्मनिर्भर बन सकता है । (हििमालिनी अप्रैल अंक, 2018 )

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