Sat. Apr 20th, 2019

पर्यटक की प्रतीक्षा में है,काठमांडू के अनेक प्राचीन नगर – कुमार रञ्जित

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हिमालिनी, अंक फेब्रुअरी 2019 |नेपाल की राजधानी काठमांडू उपत्यका प्रवेश करने वाले कोई भी पर्यटक तथा पर्यटक लाने वाले सर्वप्रथम यहाँ के सात विश्व सम्पदा सूची में अवस्थित स्थानों का नाम अवश्य लेते हैं । चाहे अन्तर्राष्ट्रिय एयरपोर्ट हो या स्थानीय बसपार्क, व्यवसायियों द्वारा पर्यटकों को सर्वप्रथम उन सात महत्वपूर्ण स्थानों का परिचय वाला ब्रोसर और गाइडबूक हाथ में थमा दिया जाता है । जब से पर्यटक नेपाल आने लगे तब से यही परम्परा निभाई जाने लगी परन्तु अभी पर्यटकीय उद्यम करने वालों के सोच में परिवर्तन आने लगा है । संसार के पर्यटन उद्यम से जुडने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह पता है कि काठमांडू उपत्यका के अन्दर सात ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक महत्व रखने वाले धार्मिक तथा सांस्कृतिक सम्पदा के अन्र्तगत काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर का मल्लकालीन राजदरबारें हैं । इसी प्रकार हिन्दू मन्दिर पशुपतिनाथ, वैष्णव मन्दिर चाँगु नारायण है तो बौद्ध स्तूप स्वयम्भू और बौद्ध भी हैं । ये सात स्थलें प्राचीन नेपाल की धार्मिक तथा सांस्कृतिक अवस्था बताने के साथ साथ राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक अवस्था से भी अवगत कराता है । इन स्थलों में प्रत्येक वर्ष हजारों रुपया खर्च करके लाखों के संख्यां में पर्यटक पहुंचते हैं । इसलिये यह क्षेत्र काठमांडू के अन्य क्षेत्रों से अधिक सुविधा सम्पन्न है ।

कुमार रञ्जित
कुमार रञ्जित

दूसरी तरफ काठमांडू उपत्यका के अन्दर ही इस प्रकार के अनेकों धार्मिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक क्षेत्र भी हैं जहाँ बहुत कम संख्या में पर्यटक बडी मुश्किल से पहुंच पा रहे हैं । ऐसे स्थानों के बारे में देश बाहर ही नहीं देश के अन्दर भी आन्तरिक पर्यटक भी अनभिज्ञ हैं । ऐसी अवस्था आने के लिए उस क्षेत्र का आवश्यक प्रचार नही होना और सरकारी तथा सम्बन्धित निकाय द्वारा कोई प्राथमिकता नहीं दिखाना हो सकता है । ऐसा क्षेत्र भी काठमांडू उपत्यका के इतिहास, संस्कृति, पुरातत्व के साथ साथ सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक किसी भी दृष्टिकोण से कम महत्व का नही है । उपत्यका में पडोसी देश भारत और तिब्बत के साथ ऐतिहासिकता जोडने का अधिकांश प्राचीन छोटी छोटी बस्ती तथा सम्पदाएं यत्रतत्र बिखरे पडे हैं, जिसका विस्तृत अध्ययन तथा अनुसन्धान होना बाकी ही है ।
उपत्यका के पूर्व में चीन से आए हुए महामञ्जुश्री की यात्रा मार्ग और ध्यानस्थल के रूप में अवस्थित ‘‘ल्हासापाको” और नाला प्राचीन शहर हैं । जो वास्तव में पर्यटकीय महत्व के हैं, जिसमें अधिकांश विज्ञ सहमत हैं । फिर भी ऐसे महत्वपूर्ण स्थल में बहुत ही कम मात्रा में आन्तरिक पर्यटक पहुंच रहे हैं । पूर्व में ही प्राचीन शहर साँखु है, जो उपत्यका के ही सर्वप्राचीन सांस्कृतिक तथा धार्मिक नगर माना जा रहा है । ‘‘लावण्य देश” के रूप में चर्चित साँखु शहर को प्राचीन काल में उपत्यका वासी ने तिब्बत यात्रा के क्रम में वास स्थल के रूप में प्रयोग करते थे ।
उसी प्रकार पश्चिम दिशा में अवस्थित थानकोट, बलम्बु, किसिपिडी, सतुंगल, नैकाप, रामकोट, भीमढुंगा, दहचोक–इन्द्र दह, इचंगु नारायणस्थान, आदेश्वर महादेव, मातातीर्थ पवित्र जलकुण्ड है जो प्राचीन बस्तियों में बाहर के पर्यटकों को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैै । जबकि यह २ हजार वर्ष पुराना प्रमाणित बस्ती तथा स्थान है जो ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यन्त महत्वपूर्ण है ।
इसी प्रकार उपत्यका के ही उत्तर दिशा में शिवपुरी पहाडी श्रृङ्खला के फेद में अवस्थित तिब्बत मार्ग धर्मस्थली, टोखा, बुढानिलकण्ठ के साथ ही ‘‘उत्तर गया” के नाम से प्रख्यात् गोकर्ण महादेवस्थान जैसी बस्ती तथा तीर्थस्थलों से विश्व के पर्यटकों को बहुत सारे तथ्य के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकती है । परन्तु ऐसा प्राचीन नगर होने के बाद भी उस स्थान में पर्यटकों को प्राथमिकता देकर नहीं भेजा जा रहा है ।
दक्षिण दिशा के प्रख्यात् दक्षिण्काली से प्राचीन नगर फर्पिङ, चोभार, कीर्तिपुर, बुंगमती, खोकना, लुभु, सिद्धिपुर, ठेचो, हरिसिद्धि, ठैब, चापागाउँ, लेले, टीकाभैरब जैसे प्राचीनता, धार्मिक, सांस्कृतिक साथ ही ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अत्यन्त महत्वपूर्ण बस्ती तथा नगरों के बारे में भी बाहरी पर्यटकों को बहुत समझाना शेष ही है ।
ऐसे बहुत से महत्वपूर्ण प्राचीन नगर तथा स्थानों का निरीक्षण तथा अध्ययन भ्रमण करके ज्ञान लाभ कर सकते हैं , जो काठमांडू उपत्यका के अन्दर पर्यटकों के प्रतीक्षा में हैं । वैसे स्थानों में कुछ वर्षों से इधर आन्तरिक तथा बाहरी पर्यटकों का ध्यान आकर्षण कराने के लिए केन्द्रीय सरकार, पर्यटन बोर्ड, स्थानीय तह, व्यवसायी के साथ साथ जनता भी सक्रिय होने लगे हैं । इसके लिए ये लोग आवश्यक पूर्वाधार भी बनाने लगे हैं । ‘‘होमस्टे” जैसा पर्यटकीय योजनाओं के माध्यम से पर्यटकों को सेवा प्रदान करने लगे हैं । उनलोगों की एक ही मांग है कि अपने स्थान को भी पर्यटकीय गन्तव्यस्थल के रूप में अंकित करे ।
अनुवादः अंशु झा

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