Thu. Oct 18th, 2018

सदुपयोग करें अवसर का – काशीकान्त झा

हिमालिनी,जुलाई अंक २०१८ |परिवार–परिवार के बीच सुसभ्य तथा सु–संस्कृत जीवन मूल्य एवं मानवीय मूल्य के सुमधुर मिलन से सुसंगठित मधेशी समाज का निर्माण हुआ है । सीमित आवश्यकताओं में जीवन यापन करने में यह समाज सक्षम देखा गया है । ईश्वर के प्रति असीम भक्ति एवं श्रद्धा से ओत–प्रोत जीवन पद्धति इन लोगों की परम्परा रही है । घर आये मेहमानों को सम्मान देने का चलन पूर्ववत कायम है ।
सत्य बोलना तथा सत्य पथ पर आगे बढ़ते रहना इनकी प्रकृति रही है । असहाय तथा गरीबों को सहयोग करना इन लोगों का धर्म सर्वविदित है । प्रारम्भिक दिनों से ही संयुक्त परिवार को आदर्श परिवार के रूप में समाज मान्यता देता आ रहा है । गांव में रहना तथा खेतीपाती को मुख्य व्यवसाय के रूप में अंगीकार कर सामाजिकीकरण पद्धति द्वारा सभी जाति के लोगों से सुमधुर सम्बन्ध कायम रखने में इस समाज के सभी लोग कुशल रहे हैं । परोपकार में समर्पित व्यक्ति के लिए तन, मन धन, न्यौछावर करने की इनकी संस्कृति अभी भी संरक्षित है ।
गांव के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से समाज की प्रायः सम्पूर्ण आवश्यकता की वस्तु का उत्पादन उस उत्कृष्ट समाज का परिष्कृत तथा विस्तृत स्वरूप द्वारा सम्बन्धित गांव में ही करने के उपायों को अवलम्बन करने का प्रयास प्राचीन काल से ही प्रंशसनीय रहा है । प्रकृति प्रदत उस विराट स्वरूप वाले मधेशी समाज को कान्तिपुर में सैन्य बल द्वारा रात्रि के समय स्थापित शासन सत्ता संचालक गिरोहों कालाान्तर में ‘देशी’ के रूप में स्वीकारकर मधेश की जनता को शिक्षित, स्वास्थ्य, समृद्ध तथा नेपाल के शासन–प्रशासन संचालन प्रक्रिया में सहभागी बनाने की सरकारी योजना कार्यान्वयन करने के बजाए उन्हें राजनीतिक रूप में अभिभावक विहीन बनाकर शोषित–सेवक सदृश्य जीवन यापन करने की अदृश्य सरकारी योजना तर्जुमा में तल्लीन रहने का इतिहास अध्यनार्थ बाजार में अभी भी उपलब्ध है । इतना ही नहीं, मधेश में रहनेवालों को गैर मधेशियों द्वारा प्रारम्भिक दिनों से ही ‘देशी’ मधेशी कहकर सम्बोधन करने का इतिहास है । इस विभेद सूचक शब्द के प्रयोग से दोनों समाज के बीच के सम्बन्ध को कमजोर बनाने के श्रृंखला का प्रारम्भ हुआ है । इससे एक तरफ दोनों के बीच की दूरी बढ़ती गई है तो दूसरी तरफ मधेश में जनसंख्या की वृद्धि, वर्षा की अनियमितता से अनिकाल तथा बाढ़ का भीषण प्रकोप, असुरक्षित चुरे क्षेत्र, न्यून सिंचाई सुविधा, कृषि सामग्री का समय में उपलब्ध होने का अभाव, उन्नत कृषि प्रविधि हस्तान्तरण पद्धति का कमजोर होना, कृषि सड़क की कमी, सुनिश्चित बाजार का अभाव, कृषि उद्योग स्थापना नहीं हो पाना, सुविधा युक्त कृषि ऋण उपलब्ध नहीं होना, दुष्कर व्यावसायिक कृषि प्रणाली, कृषि मजदूरों का विदेश पलायन, भारत के साथ खुली सीमा, स्वरोजगार सृजन करने की क्षमता रहित मधेशी जनता, उत्प्रेरणा रहित कृषि प्राविधिक, कृषियोग्य भूमिका क्षयीकरण तथा अमर्यादित कृषि पेशा इत्यादि कारणों से मधेश में कृषि उत्पादन में अत्याधिक ह«ास देखा गया है । जिससे मधेशीगण कृषि पेशा को क्रमिक रूप से छोड़ता हुआ स्पष्ट हो रहा है ।
सरकारी सेवा में मधेशियों का न्यून प्रवेश, रोजगारी के अन्य अवसर का देश में इनके लिए अभाव, सेवा–सहयोग, सुविधा तथा परामर्श प्राप्ति हेतु स्थापित सरकारी तथा गैर सरकारी निकायों में पहुँचने के संस्कार कमजोर होने के कारण मधेशीगण गरीब होते गए हैं । फलस्वरूप उन्हें अपनी आगेवाली सन्तति का भविष्य अन्धकारमय महसूस होने लगा है । अस्त, समसामयिक विश्व राजनीतिक परिवर्तन से वे भी अपने बच्चों के भविष्य की ओर सोचने के लिए बाध्य होकर अपने ही देश के शासक गण की इच्छा विपरित प्रदेश सरकार की स्थापना हेतु समग्र मधेश प्रदेश सहित अधिकार सम्पन्न संघीयता की प्राप्ति के लिए नेपाल माता की वेदी पर दी गई मधेशियों की बलिदानी प्रातः स्मरणीय एवं नमनयोग्य रही है ।
बलिदानी संघर्ष से अपरिहार्य संघीयता तो सम्पूर्ण नेपाली को प्रायः हुई है, परन्तु मधेशियों को नेपाल के आन्तरिक संविधान प्रदत अधिकार को भी इस देश का नव संविधान २०७२ द्वारा छीन लिया गया है । साथ ही सप्तरी से पर्सा तक सिर्फ आठ जिलों का एक प्रदेश उन्हें खस शासक वृन्द द्वारा मिला है । जिससे २०७२ के संविधान घोषणा के वक्त देश में अस्थिरता को प्रश्रय देनेवाले स्वार्थ खस के साथ गैर मधेशी दल में निजी स्वर्थ में संलग्न कुछ मधेशी लोग भी काठमांडू में दीपावली मनाने में व्यस्त थे तो मधेश में अग्नि की ज्वाला धधक रही थी ।
मधेशियों के प्रति सृजित ऐसी अमानवीय संवैधानिक व्यवहार के सम्बन्ध में जनकपुरधाम स्थित मधेश प्रदेश २ के माननीय मुख्यमन्त्री लालबाबु राउत महोदय द्वारा विशाल गणतन्त्रात्मक प्रजातान्त्रिक देश भारत वर्ष के सम्मानीय प्रधानमन्त्री महामहिम नरेन्द्र मोदी जी के स्वागतार्थ मिति २०७५–१–२८ के दिन बारह विघा मैदान में अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया समक्ष आयोजित नागरिक अभिनन्दन समारोह में अभिव्यक्त स्वागत मन्तव्य से प्रभावित हो लाखों दर्शकगण ताली की गड़गड़ाहट से समर्थन देने का दृश्य नेपाल के प्रधानमन्त्री सम्माननीय ओली महोदय को संविधान संशोधन द्वारा अपने हृदय में निहित पवित्रता, उदारता, क्षमाशीलता, दानशीलता, विशालता तथा स्वच्छता प्रदर्शित कर जीवन पर्यन्त सरकार संचालन के नेतृत्व हेतु मधेश की मिट्टी के कण–कण से जुड़ने का स्वर्ण अवसर प्रदान किया है । सम्पूर्ण मधेशियों को गले लगाने का वातावरण सृजना करना उनकी जिम्मेदारी का प्रमुख अंग बना है ।
२०७४ साल के संसदीय तथा प्रादेशिक निर्वाचन में मधेश आन्दोलन को मध्यनजर रखते हुए नेपाल की राष्ट्रीयता की परिभाषा की स्तरीयता के सम्बन्ध में बौद्धिक वर्ग की टिप्पणी के बाबजूद भी ओली जी द्वारा दिल जान से बुलन्द अपव्याख्या हिमाल तथा पहाड़ के मतदाताओं को प्रभावित करने में सफल रहने के कारण संघीय संसद में एमाले को अग्रस्थान प्राप्त हुआ है । इसका श्रेय प्रथमतः ओली महोदय को अवश्य मिला है । वे प्रधानमन्त्री बने हैं । मधेशवादी सांसद गण का समर्थन भी उन्हें मिला है ।
सरकार संचालन की जिम्मेदारी साथ ही समृद्ध नेपाल बनाने की जवाबदेही लेने का संकेत भी जनता द्वारा उन्हें मिला है । सम्पूर्ण नेपाली के हृदय के सम्राट तथा शुभचिन्तक बनने का उन्हें अवसर मिला है । अवसर को सदुपयोग करने वाले ही अमरत्व प्राप्त करते हैं । उन्हें सफल होने के लिए इस चुनौती को स्वीकार करना होगा । अस्तु । उनके शुभचिन्तक गण को उनकी आत्मा से मधेशी गण की आवाज को कार्यान्वयन प्रस्फुटित हेतु कराने के लिए अनवरत चिन्तन मनन एवं संघर्षरत रहना होगा ।
मधेशी गण मानवीय आधार पर नेपाल में बराबरी का संवैधानिक सम्मान प्राप्ति हेतु संघर्षरत नेपाली कांग्रेस के सुशील कोइराला प्रधानमन्त्री थे । मधेशी गण के करुण क्रन्दन को अनसुनी करने का फल उन्हें तथा उनकी पार्टी को निर्वाचन में मिल चुका है ।
इस ऐतिहासिक सत्य को अस्वीकार करनेवाले राणा–शासन, महेन्द्र शासन, जनमत संग्रह, पश्चात का पञ्चायत का शासन एवं संवैधानिक राजा की शासन पद्धति को अवश्यवेम पुनः अध्ययन मनन कर आगे राजनीतिक कदम उठाने के लिए समग्र मधेश के शुभचिन्तक नेपाली विद्वत गण से परामर्श करेंगे । उन्हें आवश्यकता महसूस होेने पर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के प्रजातन्त्रवादी लोगों से भी सलाह लेना वांछनीय होगा । मधेश के सबल होने का परिणाम नेपाल को सक्षम तथा समृद्ध होने की वकालत उन्हें स्वयम् करनी होगी ।
इसीलिए शक्तिशाली प्रधानमन्त्री ओली महोदय मधेशियों के प्रियपात्र बनकर जनकपुरधाम में ताली की गड़गड़ाहट से अभिनन्दित होने का अवसर स्वयं सृजना करेंगे क्योंकि विवेकशील उद्धार तथा विचारवान सलाहकार उनके साथ । जिनके विचार–विमर्श से लोकतान्त्रिक पद्धति को आगे बढ़ाने की चेष्टा करने के कारण ही भारतीय प्रधानमन्त्री महामहिम नरेन्द्र मोदी ने नेपाल के राजकीय भ्रमण के क्रम में जनकपुरधाम तथा काठमांडू में उनकी मुरी–मुरी प्रशंसा की है । अब सिर्फ देखना है, उनके द्वारा प्रदर्शित होनेवाली उदारता को ।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of