Thu. Jan 17th, 2019

नेपाल , एक विहङ्गावलोकन : खेमलाल पोखरेल

हिमालिनी, अंक डिसेम्वर 2018, नेपाल एक शान्ति से सम्बन्ध रखनेवाला देश है । यह देश युग–यग से समुच्च धरा के लिए आवश्यक सन्देश लिए चला आ रहा एशिया महादेश का एक छोटा, शान्त एवं हिमाल, पहाड़ तथा तराई इन तीनों अङ्गों से सुसज्जित देश है  यह बुद्ध का देश है । प्राकृतिक छटाओं से यह देवैच्छित मुल्क है जहाँ विश्व के कोने–कोने से कम से कम एकबार इसकी सुन्दरता निहारने के उद्देश्य लिए अनगिनत लोग आते हैं । भारत, जापान, चीन, श्री लङ्का, थाइलेण्ड, म्यानमार, कम्बोडिया, लाओस प्रभृति देशों के लिए यह अतीव महत्व रखता हुआ मित्रराष्ट्र है क्यो कि उन सब राष्ट्रों के बड़ी संख्या में रहने वाले बुद्धधर्मावलम्बी जनता के धर्म का उद्गमस्थल नेपाल ही है ।

नेपालको जानने के लिए बुद्ध, सगरमाथा, यहाँ के हिमच्छादित नद–नदियाँ, आदि बहुत बडा अर्थ रखते हैं । यहाँ की हिमश्रृंखलाएँ विश्व के दुस्साहसी पर्वतारोहियों को लुभाते हैं । यहाँ की पहाड़ी नदियाँ युरोप, अमेरीका, कनाडा, आदि देशों के प्रकृति–प्रेमियों को लुभाते जलक्रीड़ाजन्य खेल (राफ्टिङ) जलविहार में आनन्द लेने के लिए बड़ी संख्या में आते हैंं । पहाड़ों के उदर से निकलती बहती–बहती अपनी सागर वेष्ठित यात्रा तय करने वाली छोटी–छोटी नदियों के उपर से नीचे तक के डरानेवाले यहाँ के खोंच ‘बञ्जी जम्प’ जैसा खेल खेलने के लिए उपयुक्त स्थानों में विभिन्न देशों से आकर साहसिक क्रीड़ा प्रदर्शन करते हैं ।

नेपाल विश्व में मात्र एक ऐसा देश है जहाँ एक अनूठी नदी कालीगण्डकी अवस्थित है जिस के उदर से धार्मिक एवं पवित्र शीला शालिग्राम निकलते हैं । इस शलिग्राम को हम हिन्दुओं विष्णु भगवान के रूप में पूजा करते हैं । धार्मिक विद्वानों का मानना है कि इस पवित्र शीला पर स्वयं विष्णु भगवान का एक पाँव अंकित चिन्ह रहता है । इससे बढकर और एक कहावत प्रचलित है कि प्रत्येक शालिग्राम के मध्यभाग में सोना का एक टीका भी रहता है । इसी पवित्र कालीगण्डकी के छोर पे पवित्र धर्मस्थल मुक्तिनाथ मन्दिर अवस्थित है जहाँ एक हिन्दू और एक बुद्धिष्ट पुजारियों तीर्थालुओं को पूजन कार्य में सहयोग करते हैं । दो भिन्न धार्मिक मार्गवाले पुजारियों इस तरह एक ही देवस्थल में शान्तिसन्देश देते हुए दिखाई देनेवाला दृश्य अपने आप में विशिष्ट लगता है । विभिन्न धार्मिक सम्प्रदायों के लिए यह एक अव्वल उदाहरण है । इसी देवस्थल पर एक अनन्त ज्वालामुखी दिखाई देता है जो अनादिकाल से प्रज्ज्वलित हो रहा है ।

नेपाल के सैकड़ों मनोरम स्थलों में से एक स्थल पोखरा है । यह स्थान गणतंत्र नेपाल के सात प्रान्तों में से एक गण्डकी प्रान्त की राजधानी है । पोखरा काश्की जिला का परम सुन्दर स्थल है । काश्की जिला के लगभग एक दर्जन तालों में से सब से बडा ताल फेवा है । इस ताल पर माछापुछ्रे नाम का एक हिमाल का अलौकिक प्रतिबिम्ब दिखाई देता है । यह प्रतिबिम्बित हिमाल जो कोई व्यक्ति एकबार देख ले तो उसे लगता कि वह आत्म संतुष्टि उस के हृदय पर सदा–सदा के लिए बसा रहेगा ।

नेपाल का एक जिला भोजपुर है, जहाँ पुराणों में वर्णित रूद्राक्ष नामक एक वृक्ष प्रचूर मात्रा में बोया जाता है । इस वृक्ष के फल को भी रूद्राक्ष ही कहते हैं । भगवान शिव से जुडा हुवा यह फल मंत्र जप करने के लिए माला में गुंथा जाता है । कहा जाता है कि रूद्राक्ष को धारण करने से व एकाग्र वैठकर ध्यानपूर्वक १०८ रूद्राक्ष वाले माला में से हरएक रूद्राक्ष को सहलाते ‘ऊँ नमः शिवाय’ हो व कोई भी मंत्र को मन ही मन व आवाज से बोलने से जब एक बार पूरे के पूरे १०८ रूद्राक्ष की गिनती पूरा हो तो मंत्र का एक–पूर्ण–आवृति माना जाता है । रूद्राक्ष फल को नेपाल तथा भारत में माला बनाने में प्रयोग किया जाता है । यहाँ उल्लेखनीय वात यह है कि हजारों क्विन्टल रूद्राक्ष फल हर वर्ष नेपाल से भारत की ओर निर्यात होता है ।
नेपाल का पूर्व–प्रान्त–१ पर अवस्थित श्री अन्तु पहाड़ी चोटी एक ऐसा स्थान है जहाँ से सूर्योदय का मनोरम छटा देखने को मिलती है । भारत–दार्जीलिङ का टाइगर हिल वाला सूर्योदय और नेपाल का श्रीअन्तु वाला सूर्योदय को लगभग एक ही श्रेणी पर रखा जा सकता है ।
रसुवा जिला पर अवस्थित गोसाईंकुण्ड एक ऐसा हिमजल–कुण्ड है जहाँ रक्षावन्धन के दिन हजारों की संख्या में तागाधारी ब्राह्मण–वंशज के लोग मेला भरने के लिए जाते हैं । गोसाईकुण्ड से जुड़ी हुई एक कहावत है कि अगर कोई इस कुण्ड पर डुवकियाँ लेकर जनेउ को पूजने के बाद धारण करे तो बहुत लाभ मिलता है ।

इसी तरह चितवन जिला पर अवस्थित चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज नेपाल के कुछ निकुञ्जों में से है जहाँ विश्व में दुर्लभ माना गया एकसिंगा गैंडा देखने को मिलता है । नेपाल का राष्ट्रीय झण्डा, काँडे भ्याकुर नाम का एक पंक्षी, कस्तुरी मृग, यार्सागुम्बा जो एक अनोखी जड़ीबुटी है, लगभग ६००० के संख्या में रहे छोटी–छोटी पहाड़ी नद–नादियाँ, राजा जनक और उनकी बेटी सीता का नेपाली भूमि पर जन्म होना और दोनों का राष्ट्रीय विभूति होना, एक छोटे देश में १२५ भाषाओं का यहाँ प्रयोग होना, ईसापूर्व काल में सम्राट अशोक का नेपाल भ्रमण और अशोक–स्तम्भ का ऐतिहासिक निर्माण होना, ८००० मीटर उँचे विश्व के १४ हिमाल में से ८ का इसी देश में होना, यहाँ के हिमताल जो उँचे से उँचे स्थान पर अवस्थित हैं, इसका बहुत छोटा राष्ट्र होने के बावजूद भी नेपाल सेना का राष्ट्रसंघ द्धारा विश्व–शान्ति के लिए सफल प्रयोग होना तथा यह देश कभी पराधीन न रहना आदि तथ्यों से नेपाल व नेपाली जाति का अदभुत गौरव का एक अनूठा परिचय मिलता है ।
अन्त में एक ही वाक्य से मैं इस आलेख को बन्द करना चाहूँगा कि ‘नेपाल सगरमाथा का देश है’ जो आँख जैसा छोटा है पर जिस के जरिए विश्व को देखा जाता है और ‘विश्व–शान्ति’ के लिए शान्ति–मंत्र यहीं से बाँटा जा सकता है । इति
दमक–६, झापा, नेपाल

 

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