Fri. Sep 21st, 2018

वामगठबन्धन का साइड इफेक्ट : अछुतम कुमार अनन्त

अछुतम कुमार अनन्त | परिणाम ने बता दिया कि नेपाल में बाम गठबंधन अब सत्ता में रहेगी । बाम गठबंधन क्यों बना और कैसे बना, यह पहला प्रश्न है । दूसरा प्रश्न कल को बाम गठबंधन की सरकार बन जाती है, तो मधेश पर इसका प्रभाव कैसा होगा ? बाम गठबंधन की अगुवाई एमाले से केपी ओली कर रहे है और माओवादी केन्द्र से प्रचण्ड । दोनों खस ब्राह्मण जाति से है जिसका दबदबा नेपाल की राजनीति में हमेशा उच्च स्तर का रहा है । दोनों का उदय भी लगभग एक जैसा है । अर्थात दोनों का राजनीतिक उदय हथियार हिंसा के आंदोलन से हुआ । वर्तमान समय मे भले ही दोनों एक साथ हो पर दोनों की राजनीतिक सोच अलग अलग है । जहां एक ओर केपी ओली हार्डलाइन की राजनीति करते हैं तो दूसरी ओर प्रचण्ड मध्यस्थता की । वर्तमान समय मे केपी ओली का उदय भारत विरोधी,मधेश विरोधी, संसोधन विरोधी, चीन नजदीकी आदि के रूप में हुआ है और कमोवेश यही इनकी जीत का कारण भी बना है ।
अब बात करते है बाम गठबंधन कैसे बना ? केपी ओली का मधेश विरोधी, संसोधन विरोधी, भारत विरोधी आदि होने के कारण नेपाल के पहाड़ भूभाग में एक राष्ट्रवादी नेता के रूप में उदय हुआ । जैसा कि हम ने पिछले सालों में देखा है लगभग हर देश में कथित राष्ट्रवादी नेताओं का उदय हुआ है और वह नेता लोग चुनाव जीते भी है । भारत में मोदी, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प, बेलायत में थेरेसा आदि । इन सभी नेताओं की जीत में बहुत बातें समान है । भारत में मोदी का उदय हिंदूवादी और मुस्लिम विरोधी के रूप में हुआ । वही डोनाल्ड ट्रम्प का उदय भी मुस्लिम विरोधी और अमेरिकनवादी के रूप में हुआ । नेपाल में भी ओली ने यही किया । जिसका फायदा वर्तमान चुनाव में ओली को हो रहा है । प्रचण्ड जो मध्यस्थता की राजनीति कर रहे है, पहाड़ी भूभाग में उनका बहुत ही बुरा हाल था । ओली मधेश विरोधी होने के कारण मधेश में उनका बुरा हाल था । यहीं बातें ओली और प्रचण्ड को एक साथ लाने में कारगर साबित हुई । दोनों बहुत ही समझदारी दिखाते हुए एक साथ आ गये और बाम गठबंधन हुआ ।
अब यदि बाम गठबंधन बहुमत के साथ सरकार बनाती है, तो मधेश में इसका क्या प्रभाव पड़ेगा ? पहली बात की मधेशी दल जो इस चुनाव में संविधान संसोधन के मुद्दे पर वोट मांग रहा था, वह संसोधन पूरा नही हो पायेगा । बाम गठबंधन के आने से जो दूरियां अभी काठमाण्डौ और मधेश के बीच है वह और ज्यादा हो जाएगा । मधेश और पहाड़ के बीच संबंध और ज्यादा बिगड़ेगा । अतिवाद नेपाल में और ज्यादा बढ़ेगा । मधेश में डॉ सीके राउत का उदय ज्यादा तेजी के साथ होगा और धीरे–धीरे मधेशी दल बिखरने लगेगा और उस बिखराव में जो स्पेस बचेगा वह डॉ सीके राउत को मिलेगा । दूसरी बात बाम गठबंधन सिर्फ बड़ी पार्टी ही बनकर रह जाये तो ? यदि ऐसा हुआ तो बाम गठबंधन को सरकार बनाने के लिए राजपा और ससफो से समर्थन चाहिए होगा । बाम गठबंधन और मधेशी दल एक साथ आने से भी संविधान संशोधन नही होगा । क्योंकि सिर्फ एमाले ही नही काँग्रेस और माओवादी केंद्र के बहुत से नेता संशोधन नही होने देंगे । नेपाल के शीर्ष तीन दल एमाले, कांग्रेस और माओवादी केंद्र में बहुत सारे नेता संसोधन का पहले ही विरोध कर चुके हंै । ऐसे में मधेश फिर से अधिकार विहीन ही रहेगा । मधेश के अधिकार के लिए यह चुनाव और सरकार सिर्फ धोखा रहेगा ।

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