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शान्ति और स्थिरता के बिना समृद्धि सम्भव नहीं : प्रदीप ज्ञावली (परराष्ट्रमन्त्री)

हिमालिनी अप्रैल अंक, २०१८ | चुनौती के बीच में ही अवसर और सम्भावना होती है । इसीलिए वर्तमान सरकार के सामने जो चुनौती है, वही अवसर भी है ।

प्रदीप ज्ञावली, परराष्ट्रमन्त्री

कुछ साल के अन्दर नेपाल में महत्वपूर्ण  राजनीतिक परिवर्तन हुए हैं । ७० साल तक संघर्ष करने के पश्चात् हम लोगों ने संविधानसभा से संविधान निर्माण कर घोषणा किया । जनअधिकार और सामाजिक न्याय की दृष्टिकोण से यह संविधान उत्कृष्ट है । यहां एक बात स्मरण में रखना चाहिए, हमारे कवि चन्द्रमा को देख कर सुन्दरता की वर्णन करते हैं, लेकिन वहां जो दाग है, उसकी चर्चा नहीं होती । इसीतरह सम्झौता के द्वारा निर्मित संविधान में भी कुछ गलतियां हो सकती है । कार्यान्वयन करते वक्त उस में सुधार किया जा सकता है । अर्थात् संविधान को गतिशील दस्तावेज के रूप में परिवर्तन किया जा सकता है ।
संविधान के कार्यान्वयन संबंधी सवाल में भी हम लोगों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है । तीनों तहों का चुनाव सम्पन्न हो चुका है । नयां संविधान अनुसार वडा से लेकर राष्ट्रपति तक निर्वाचित हो चुके हैं । इस तरह संविधान कार्यान्वयन कर हम लोगों ने देश को एक स्पष्ट दिशा–निर्देश दिया है । जनता ने भी हमारे गठबंधन को स्पष्ट बहुमत दिया है, जो नेपाल के विकास और समृद्धि के लिए एक बड़ा अवसर भी है । आम जनता, सरकार को समर्थन करनेवाले राजनीतिक दल और आलोचना करनेवाले प्रतिपक्षी दल की अपेक्षा और सुझाव को आत्मसात् करते हुए सरकार आगे बढ़ना चाहती है, इसके लिए सरकार पूर्ण प्रतिबद्ध है ।
कुछ दिन पहले प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली ने नेपाल स्थित विभिन्न कुटनीतिज्ञों को अपने कार्यकक्ष में बुलाकर नयी सरकार की प्रथामिकता के संबंध में कहा । ६ सूत्रीय उक्त प्राथमिकता के अनुसार ही अब सरकार आगे बढ़ेगी । वर्तमान सन्दर्भ में सरकार की प्राथमिकता भी वही है । हमारे प्रधानमन्त्री ने कहा है कि राष्ट्रीयता का सम्वद्र्धन और सुदृढीकरण प्रथम प्राथमिकता है । जिसके अन्दर कहा गया है कि संविधान द्वारा परिभाषित नेपाल की सार्वभौम सत्ता, भौगोलिक अखण्डता, राष्ट्रीय हित और स्वाभिमान को कायम रखकर पड़ोसी राष्ट्रों से संबंध बिस्तार किया जाएगा । दूसरी प्राथमिकता लोकतन्त्र के प्रति अविचलित निष्ठा और प्रतिबद्धता है । हमारी संविधान में लोकतन्त्र संबंधी विश्वव्यापी मान्यता समावेश है । संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा परिकल्पना की गई राजनीतिक अधिकार ही नहीं, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार को भी संविधान में उल्लेख की गई है । मानवाधिकार की विश्वव्यापी मूल्य–मान्यता और बहुलता के प्रति हम लोग पूर्ण प्रतिबद्ध हैं ।
तीसरी प्राथमिकता सामाजिक न्याय हैं, जिसके बिना कोई भी देश विकास की राह पर आगे नहीं बढ़ पाएगा । इतिहास के विरासत में हमारे सामने कुछ समस्याएं हैं– महिला–पुरुष के बीच असमानता हो अथवा विभिन्न भूगोल में रहनेवालों के बीच विभेद, आज भी है । समुदाय–समुदाय के बीच में भी विभेद हैं । लेकिन संविधान ने किसी को भी विभेद नहीं किया है । व्यावहार से उसको प्रमाणित करना बांकी है ।
चौथी प्राथमिकता स्थिरता और शान्ति है । शान्ति और स्थिरता बिना समृद्धि हासिल करना सम्भव नहीं है । कल तक हम लोग कहते थे कि हमारे राजनीतिक दर्शन के अनुसार संविधान नहीं है । उस समय संविधान में कुछ अपरिवर्तनीय प्रावधान भी था । इसलिए हम लोग कहते थे कि हमारी चाहत के अनुसार राजनीतिक प्रणाली भी नहीं है । इसके संबंध में हम लोग तर्क भी कर सकते थे । लेकिन अब ऐसी अवस्था नहीं है । वर्तमान संविधान में निहित सार्वभौमसत्ता और भौगोलिक अखण्डता को कायम रखकर हर विषयों में संवैधानिक बहस कर सकते हैं । और आवश्यक विषयों में परिवर्तन भी किया जा सकता है । इसीलिए अब किसी भी बहाना में होनेवाली हिंसा और अस्थिरता स्वीकार्य नहीं है । अर्थात् शान्ति और स्थिरता हमारी प्राथमिकता है ।
५वीं प्राथमिकता सुशासन है । नेपाल में भ्रष्टाचार का ग्राफ हर साल बढ़ता जा रहा है । इसीलिए अब किसी भी स्वरूप में होनेवाला भ्रष्टाचार, अनियमिता, ढिलासुस्ती स्वीकार्य नहीं है । इसके विरुद्ध प्रभावकारी कदम उठाकर जनता को सुशासन की प्रत्याभूति देना है । इसीतरह विकास और समृद्धि भी हमारी प्राथमिकता है । हमारे पड़ोसी मुल्क तीव्र आर्थिक विकास की ओर आगे बढ़ रहे हंै । उससे हम भी लाभान्वित होना चाहते हैं । जनता को पता चलना चाहिए की हम लोग राजनीतिक परिवर्तन का लाभ ले रहे हैं, इसके लिए आर्थिक समृद्धि ही एक मात्र विकल्प है ।
उल्लेखित प्राथमिकता और उद्देश्य प्राप्ति के लिए ही वर्तमान सरकार की विदेश नीति तय होगी । मुझे विश्वास है कि राष्ट्रीय हितों को केन्द्रविन्दु में रख कर ही हम लोग विकास कर सकते हैं । पञ्चशील के सिद्धान्त में आधारित रह कर संबंध को आगे बढ़ाया जा सकता है । और सभी से मित्रतापूर्ण संबंध रख कर आगे बढ़ेगे, किसी से भी वैरभाव रखने की जरुरत नहीं है, रखना भी नहीं चाहिए । अर्थात् सभी से मित्रता हमारी उच्च प्राथमिकता में रहेगी ।
अभी तक नेपाल ने मानव अधिकार और जागरुकता के लिए पड़ोसी देशों से सहकार्य किया है । इसमें एक चरण तो पार भी हो चुका है । मुझे लगता है, अब संबंध की स्वरूप में बदलाव आना चाहिए । आर्थिक विकास और सहकार्य के लिए अब संबंध को आगे बढ़ाना होगा । हम लोगों ने कहा है– नेपाल एक भर्जिन भ्याली है । यहां हर क्षेत्रों में विकास के लिए काम किया जा सकता है । इसके लिए लगानी–मैत्री वातावरण और सुरक्षित प्रतिफल के लिए सरकार ग्यारेन्टी करती है । इसीलिए एक बार फिर मैं दाताओं से लेकर उद्योगी व्यवसायियों को जोर देकर कहता हूं कि वे लोग नेपाल आए । हम चाहते हैं– जलविद्युत, पर्यटन और कृषि में रूपान्तरण के लिए और भौतिक पूर्वाधार निर्माण के लिए पूँजी निवेश किया जाए, यह हमारी उच्च प्राथमिकता भी है ।
जहां तक नेपाल–भारत सम्बन्ध की बात है, कई बातें शब्दों में व्यक्त नहीं होती । हमारे संबंध इतनी घनिष्ट हैं कि वही घनिष्टता कभी–कभार संबंध को जटिल बना देती है । इतिहास से शिक्षा लेना है कि हमारे बीच असल सम्बन्ध के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है । इसके लिए समानता के आधार में हमारे संबंध को आगे बढ़ाना जरुरी है । हमारे बीच कई परिस्थितियां ऐसी है, जहां मिलकर आगे बढ़ने का दूसरा विकल्प नहीं है । जैसे कि सिन्धुपाल्चोक स्थित जुरे में बाढ़ आती है तो बिहार तक सतर्क रहना पड़ता है, छो–रोल्पा हिमताल हो अथवा सोलुखुम्बु का हिमाल, अगर गिरने की सम्भावना की बात होती है तो भारत को आतंकित होना पड़ता है । इसीलिए नेपाल–भारत सम्बन्ध को २१वीं शताब्दी के अनुसार पुनः परिभाषित करना चाहिए ।

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