Wed. Dec 12th, 2018

पूंजीवाद-बिम्मी कालिंदी शर्मा

हिमालिनी, अंक अक्टूबर 2018  देश में जो हो रहा है सब पूंजीवाद के कारण हो रहा है । यह मैं नहीं हमारे देश के सम्माननीय गृहमंत्री कह रहे हैं । वह बलात्कार की दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही घटनाओं का कारण पूंजीवाद को मानते हैं । यदि देश में पूंजीवाद न होता तो बलात्कार भी न होता , बलात्कार करने वाले के सिर में शैतान नहीं पूंजीवाद सवार रहता है और इसी के चलते वह बलात्कार जैसा जघन्य दुष्कर्म करता है । पूंजीवाद न हुआ शराब की बोतल हो गयी जिस को पीते ही अच्छा भला आदमी भी बलात्कारी बन जाता है । धन्य हो हमारे गृह मंत्री के आधा पाव बुद्धि का जो इतना भी सोच पाए । नहीं तो इस देश के बांकी पौने तीन करोड़ नागरिक बलात्कार का कारण अभी तक पता ही नहीं लगा पा रहे थे ।
दस वर्ष तक सशस्त्र द्धन्द्ध कर के करीब २० हजार नागरिकों का कब्र खोदने के बाद गृह मंत्री का पद मिला है । उसे ऐसे ही नहीं गवाना चाहिए । कुछ न कुछ ऐसा बोलते या करते रहना चाहिए कि जिस से लगे कि हमारे देश का गृह मंत्री सर्वहारा वर्ग का नेता है इसी लिए पूंजीवाद और पूंजीवादी व्यवस्था का विरोध कर रहा है । आखिर में आधा पाव दिमाग वाले गृह मंत्री ने भी जनयुद्ध में कमान संभाला था । अभीतक उस का हैंगओवर नहीं गया है इसी लिए बड़बड़ाते रहते हैं । जिस पूंजीवाद का हमारे गृह मंत्रीविरोध कर रहे हैं उसी पूंजीवाद के घोडेÞ पर सवार हो कर वह चुनाव जीते हैं और संसद में पहुंचे हैं । गृह मंत्रीजी अपने नाम अनुसार का काम करते है गड़गड़ाते ज्यादा हैं और बरसते कम हैं ।
जहां पर पूंजीवाद नहीं है क्या वहां पर बलात्कार नहीं होता ? और पूंजीवाद कहां और किस देश में नहीं है ? आप तो देश में साम्यवाद लाना चाहते थे फिर यह पूंजीवाद कहां से आ गया ? लाए तो आप ही लोग हैं । जब राजनीति को पैसे बनाने की मशीन और उद्योग जैसा बना दिया है । तब पूंजीवाद तो एक दिन आएगा ही यह निश्चित है । आप जैसे नेतागण ही बडेÞ बडेÞ धन्ना सेठ को अपनी राजनीतिक पार्टी में प्रवेश कराते हैं, उन्हे विभिन्न पद से नवाजते हैं तब देश में पूंजीवाद न आ कर क्या समाजवाद या साम्यवाद आएगा ? फिर पूंजीवाद से डर क्यो ? आप ही लोग को पद में पहुंचने पर नयी और चमचमाती कार, बड़ा सा बगंला और बैंक बैलेन्स चाहिए । तब पूंजीवाद के बिना क्या यह संभव होगा ? क्या आप साईकल चढ कर अपने आफिस जा पाएगें या खपरैल के मकान में बैठेंगे ?

जब आपको सारे सुख, सुविधा मुँह खोलते ही अपने सामने हाजिर चाहिए । अपने दल के कार्यकर्ताओं को आप खुश रखना चाहते हैं, तो बिना पैसे के कोई खुश रह सकता है भला ? और आप निर्वाचन भी किसी बड़े व्यापारी के सहयोग या चंदा से ही जीतते हैं । तब उस समय पूंजीवाद का ख्याल नहीं आया ? अब जब देश की जनता जाग रही है धीरे धीरे तब आप उस के निहायत ही जरुरी प्रश्नो का जवाब पूंजीवाद के सिर पर मढ़ देते हैं ?क्या सभी अपराध पूंजीवाद के ही कारण होता है ? तो आप के पार्टी के मंत्री, सांसद और अन्य नेता गण जो भ्रष्टाचार करते हैं वह भी तो पूंजीवाद के कारण होगा ? पूंजीवाद न हुआ कोई संक्रामक बीमारी हो गई जिस के चलते हर गलत काम हो रहा है । इंसान का अपने मन और शरीर पर नियत्रंण नहीं है और दोष पूजींवाद को ? कभी कहते हैं कि इन्टरनेट पर पोर्न साईट देखने से समाज में बलात्कार की घटना बढ़ी हैं, तो कभी पूंजीवाद के सिर पर बलात्कार का ठिकरा फोड़ते हैं । अपने शासन, प्रशासन, मंत्रालय और पुलिस की कमजोरी न स्वीकार करते हैं न इस्तीफा देते हैं बस पूंजीवाद का राग अलाप कर अपना पल्लू झाड़ लेते हैं ।

गृहमंत्री जी आप के ही पार्टी के सुप्रिमो १० करोड़ के बंगले में रहते हैं । लेकिन जब उन्होने क्रान्ति की थी तब सर्वहारा वर्ग के उत्थान के लिए नारा दे कर किया था । वह सर्वहारा वर्ग तो पतन हो गया और वह खुद सर्वेसर्वा बन गए पूंजीवाद के । डेढ़ लाख रुपए के पलंग में सोना पूंजीवाद नहीं है । और वह बलात्कार पूंजीवाद के कारण हो गया । आपलोग खुद ही पूंजीवाद के पलंग में सो कर देश की अवाम की उम्मीदों के साथ बरसों से बलात्कार कर रहे हैं उस का क्या ? आप करे तो रासलीला और दूसरा कोई करे तो कैरेक्टर ढीला । आप अपने नाम बाल की तरह ही काले और घनेरे हैं पर बरसते नहीं । राम का नाम तो आप ने द्धन्द्ध के दौरान ही खा लिया ।अब बादल बने हैं तो पुलिस प्रशासन और अपराधियों पर जम कर बरसिए तब जाने । पर नहीं आप तो पूंजीवाद के मनोरोगी हैं ।

यदि पूंजीवाद के कारण ही बलात्कार की घटना बढ़ी है तो आप चौक और चौराहे पर खुली हुई दारु की भट्टी को बन्द क्यों नहीं करवाते । दारु की भट्टी भी तो पूंजीवाद के कारण ही पनपा है । दारु पी कर इंसान होश में नहीं रहता और बलात्कार जैसा जघन्य अपराध कर बैठता है । पर नहीं दारु की भट्टी से उठे राजस्व से अपाहिज सरकार चलती और दौड़ती है । इस को बंद नहीं करेंगे पर पूंजीवाद को कोसेंगे जरूर । आपका कोट और टाई पहनना भी पूंजीवाद ही है । तो इस को पहनना बंद क्यों नहीं कर देते । सारे उधोग धंदा बंद कर दीजिए और मंदी में चले जाइए । तो पूंजीवाद अपने आप खतम हो जाएगा । एक अपराधी पकड़ नहीं सकते और दोष पूंजीवाद को देते हैं । अपराधी को खुद ही छूपा कर ढूँढने का नाटक कर रहे हैं और पीएम कहते हैं कि अपराधी को पकड़ने में १२ साल भी लग सकता है । इस का मतलब आप लोग १२ साल तक सत्ता में काबिज रहेंगे ? हे भगवान १२ महीने में तो आपलोगों ने देश के नागरिकों का जीना हराम कर दिया हैं १२ साल सत्ता में रहेंगे तो बिना समुन्दर के ही इस देश में सुनामी आ जाएगा । तब तक पूंजीवाद, बलात्कार और भ्रष्टाचार और ज्यादा फलेगा फूलेगा । क्योंकि इस को फैलाने और फुलाने में आपलोग जो लगे हुए हैं ।

इस दुनिया में पूंजीवाद कहां नहीं है ? यह दुनिया असल में टिकी ही पूंजीवाद पर हैं । जो नेता अपने देश में समाजवाद और साम्यवाद लाने की परिकल्पना करते थे वह भी आज पूंजीवाद के आगे नतमस्तक है । दुनिया से सब वाद गायब हो चुकी है बस एक पूंजीवाद बचा है । क्योंकि पूंजीवाद के सामने और कोई वाद टिक ही नहीं सकता । मानवतावाद दुनिया में सब से जरुरी है । पर यदि मानवतावाद जिंदा रहता तो आज निर्मला का बलात्कार न होता और न निर्मला के बलात्कारी को इस तरह छुपाया जाता ? गोद में बच्चा गाँव में ढिंढोरा जैसा कर रही है नेपाल पुलिस । अपराधी पहचाना जा चुका है पर जनता की आंख में धूल झोंक कर गृहमंत्री जी फरमान दे रहे हैं । पूंजीवाद ही असली अपराधी है और उसे पकड़ कर लाओ । जिस पूंजीवाद के सहारे आपकी रोजीरोटी चल रही है आप उसी को गुनाहगार बता रहे हैं । असल में अपराधी आप खुद हैं और आपकी सरकार और सिस्टम सब अपराधी है जो एक निहत्थे इंसान की हत्या पर ऐसा फतवा जारी करती है ।

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