Tue. Nov 20th, 2018

नेपाली साहित्य को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर में पहुंचाने का अवसर : रवीन्द्र आशीश शैली

रवीन्द्र आशीश शैली, काठमांडू (नेपाल)
रवीन्द्र आशीश शैली, काठमांडू (नेपाल)

सन्दर्भ : नेपाल भारत साहित्यिक सम्मेलन 2018

हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८ नेपाल–भारत मैत्री संबंध का एक ज्वलन्त उदाहरण है– यह महोत्सव । जो अब निरन्तर जारी रहे, मेरी चाहत यही है । मेरे खयाल से नेपाली भाषा और साहित्य को अन्तर्राष्ट्रीयकरण करने के लिए इस तरह का महोत्सव महत्वपूर्ण है । मेरी दृष्टिकोण से हिन्दी के माध्यम से ही नेपाली साहित्य को अन्तर्राष्ट्रीयकरण किया जा सकता है । जब भारतीय साहित्यकार हमारे साहित्य के बारे में जानकार होंगे, उन लोगों के सहयोग से ही हमारा साहित्य भी विश्व बजार में पहुँच सकता है । क्योंकि नेपाल की तुलना में भारतीय नागरिक ही विश्व के विभिन्न देशों में फैले हुए है । इसीलिए नेपाली साहित्य का अन्तर्राष्ट्रीयकरण करने के लिए इस तरह का कार्यक्रम महत्वपूर्ण साबित होनेवाला है ।
दूसरी बात, महोत्सव में सिर्फ नेपाल और भारत के साहित्यकार सहभागी हैं । मेरे विचार में इस तरह के महोत्सव में अन्य देशों के साहित्यकारों को भी मौका मिलना चाहिए, वे लोग भी सहभागी हो सके । अगर इसतरह हम लोग कार्यक्रम कर सकते हैं तो और भी बेहतर होगा । एक और शिकायत है कि कार्यक्रम दो दिनों का है । लेकिन कार्यक्रम में सहभागी होने के लिए आए कई साहित्यकार अपनी रचना वाचन करके कार्यक्रम स्थल से बाहर हो जाते हैं । पूरे दो दिन तक सभी सहभागी एक ही जगहों में रहते तो वह बेहतर होता । आगामी दिनों में ऐसा न हो, आयोजक पक्ष को ध्यानाकर्षण कराना चाहता हूं ।
साहित्य में कोई भी स्वार्थ नहीं होता, साहित्य समाज के साथ जुड़ा हुआ होता है । साहित्य ही मानव हृदय को छू लेता है, लेकिन राजनीति ऐसी नहीं होती । नेपाल–भारत के बीच जो भी सामाजिक, साहित्यिक, भाषिक तथा सांस्कृतिक निकटता है, उसमें राजनीति का कोई भी लेना–देना नहीं है । इसीलिए कभी–कभार नेपाल–भारत बीच राजनीतकि उतार–चढाव दिखाई देता है । क्योंकि राजनीति में एक देश का स्वार्थ दूसरे देशों के साथ जुड़ा होता है । जिसके चलते राजनीतिक सम्बन्ध हरदम सुमधुर नहीं भी रह सकता है । नेपाल और भारत के बीच में ही नहीं, अन्य देशों के बीच भी यही बात लागू होती है । लेकिन साहित्य मानवीय सम्वदेना के साथ जुड़ा होता है, मानवीय सम्वेदना दो देशों की राजनीति, भूगोल और सीमा को प्रधान नहीं मानती ।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of