Fri. Oct 19th, 2018

राजनीति और साहित्यिक विधा अलग–अलग है : रुद्र अधिकारी

संदर्भ – नेपाल भारत साहित्यिक महोत्सव-२०१८

 

हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८| मेरे खयाल से कार्यक्रम उपलब्धिमूलक रहा । नेपाल और भारत के बीच धर्म, भेषभूषा, रीतिरिवाज, संस्कृति सब चीज आपस में मिलती–जुलती है । भाषा में कुछ अन्तर तो है, लेकिन लिपि एक ही है । हां, हम लोगों में से बहुतों ने हिन्दी साहित्य नहीं पढ़ा होंगा, लेकिन वर्षों से हम लोग टेलिभिजन में हिन्दी कार्यक्रम देखते आए है और सुनते आए हैं । इसलिए बहुसंख्यक नेपाली सहज ही हिन्दी समझते हैं । ऐसी अवस्था में समान भाषा–संस्कृति वाले दो देशों के साहित्यकारों के बीच इसतरह का कार्यक्रम होना बहुत ही सकारात्मक है, जो आपसी संबंध को मजबूत बनाता है । कार्यक्रम के माध्यम से हिन्दी साहित्य के बारे में हम लोगों को भी पढ़ने का और सीखने का मौका मिला है । नेपाली साहित्य और कला–संस्कृति समझने की अवसर भारतीय सहित्यकारों को भी मिली है ।

Rudra Adhikari
रुद्र अधिकारी, चितवन, (नेपाल)

राजनीति और साहित्यिक विधा अलग–अलग है । जो राजनीति में है, वह साहित्य लिख सकते हैं, लेकिन मेरी मान्यता है कि साहित्य में राजनीतिक प्रवेश स्वीकार्य नहीं है । नेपाल–भारत सम्बन्ध ऐतिहासिक है, सदियों से हैं । इसलिए बार–बार राजनीतिक द्वन्द्व होते हुए भी जनता–जनता के बीच वैरभावपूर्ण सम्बन्ध नहीं है । पिछली बार कहा गया कि भारत ने नेपाल के ऊपर नाकेबन्दी किया । इस में सच है या अफवाह, यह तो सिर्फ राजनीति करनेवाले लोग ही जानते हैं । हम जैसे साहित्यकारों के लिए इसमें कोई भी लेना–देना नहीं है ।

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