Wed. Nov 14th, 2018

‘देश का सबसे बडा कैटलफॉर्मिगं बनाना ही मेरा उद्देश्य है’-श्यामबदन यादव

करीब ९ साल पहले सिर्फ पाँच गायों से डेयरी का काम शुरु करने वाले श्यामबदन यादव के डेयरी उद्योग में आज ९५ गायें हंै । वीरगंज सहित यादव का नेपाल के अन्य शहरों में १० जगह “डेयरी हब” खुल चूका है। यादव का डेरी उधोग आइसकी्रम के अलावा दूध, घी, दही और पनीर उत्पादन कर के इन डेयरी हब मार्फत बिक्री वितरण करता है । बैंगलुरु बिश्वविधालय से सफ्टवेयर ईन्जिनियरिगं करने के बाद वहीं से एमबीए भी करने के बाद यादव चाहते तो उन्हे वहीं पर किसी बडी कंपनी में नौकरी मिल सकती थी ।

Shyam Badan Yada
श्यामबदन यादव

उन्होने शुरुआत में नारायण मूर्ति के ‘र्इंफोसिस् कम्पनी’ में मासिक ८० हजार भारतीय रुपंए की नौकरी मिली भी थी । ईंफोसिस में यादव ने तकरीबन एक साल तक काम किया । पर खुद ही कुछ नयां करने के इरादे से यादव इस नौकरी को त्याग कर अपने देश वापस लौट आए । जोखिम ले कर भी अपना ही व्यवसाय शुरु कर के अपने गाँव के लोगों को रोजगार दे कर उनका और अपना जीवन स्तर बढि़या बनाने के लिए यादव के द्वारा खोले गये डेयरी उधोग की आज हरतरफ चर्चा है । यादव ईंटरप्रयोनरसीप का एक ज्वलन्त और सुन्दर उदाहरण हैं ।
बैगँलुरु में अध्ययन के वक्त विप्रो कंपनी के मालिक अजिम प्रेमजी का गेष्ट लेक्चरर सुन कर अपने कैरियर का अहम निर्णय करने वाले ३८ वर्षीय यादव विप्रो के प्रेमजी और ईंफोसिस के मालिक नारायण मूर्ति से सब से ज्यादा प्रभावित हैं । पर वह अपने आदर्श बिश्व प्रसिद्ध दूध सहकारी अमूल के संस्थापक वर्गिज कुरियन को मानते हैं । कुरियन ने भारत में “अप्रेशन फ्लूड” के नाम से जो दूध क्रान्ति के सपने को जिस तरह अमूल सहकारी के रूप में स्थापित किया । ठीक उसी तरह का सपना अपने देश के लिए यादव ने देखा है । भारत का अमूल सहकारी और मदर डेयरी जैसा ही नेपाल में दूध सहकारी स्थाप्ना करने की यादव का सपना बैंकों के कारण पूरा नहीं हो पा रहा है ।
यादव जब बैगँलुरु से पढ़ कर अपने देश वापस आए तब उन्होने डेढ़ साल तक एक प्रख्यात मूर्गी का दाना बनाने वाले उद्योग में सवा लाख रुपंए मासिक वेतन पर काम किया । पर यहां भी उनका मन नहीं लगा और अपने पैतृक दूध व्यवसाय ने उन्हे अपनी तरफ खिंचा । उसके बाद यादव ने अपना सारा पारिवारिक अचल संपति गिरवी रख कर बैंक से लोन लिया “कलश डेरी फार्म” नामक डेयरी उद्योग का श्रीगणेश किया । शुरुवात में तीन करोड़ पूंजी निवेश कर के खोले गए यादव के डेयरी उद्योग कि अभी की पूंजी करीब २० करोड़ पहुंच चूकी है । पर्सा जिले के धोरे में जन्में यादव का पशुपालन उद्योग और कलश डेयरी उद्योग नाम से दो अलग, अलग जगह में स्थापित हो चूका है । यादव के दोनों उद्योग और डेयरी हब में मिला कर कूल ८२ कर्मचारी कार्यरत हैं । यादव के डेयरी उद्योग से दूध, दही, घी, पनीर और क्रीम उत्पादन होता है । इसके अलावा उनका डेयरी उद्योग विशेष रूप से आइसक्रीम उत्पादन करता है जिसकी बाजार में बहुत माँग है । दैनिक करीब १५ सौ किलोग्राम आइसक्रीम ‘व्हाइट गोल्ड ब्राण्ड’ नाम से उत्पादन कर के वीरगंज, हेटौंडा, चन्द्रनिगाहपुर, जनकपुर, बर्दिवास तक अपने तीन पिकअप गाडि़यों से यादव का स्टाफ पहुंचाने का काम करता है । अपने ही उद्योग द्वारा उत्पादित दूध भी कम पड़ने के कारण अन्य डेयरी उद्योग से प्रत्येक दिन करीब तीन हजार लीटर दूध खरीदा जाता है । मुख्य रूप से आइसक्रीम उत्पादन से यादव का कलश डेयरी उद्योग दिन दूना रात चौगूना प्रगति कर के फलफूल रहा है जिसे स्वंय यादव ‘जबरदस्त मुनाफा’ कहते हैं ।
शुरुआत में उद्योग स्थापना करते समय बहुत ज्यादा उत्साह और उर्जा से लवरेज यादव हाल के दिनों में देश के राजनीतिक माहौल और बैंक के नकारात्मक रवैए के कारण दुखी और परेशान हैं । अपने माता, पिता के इकलौते संतान यादव के अपने दो बच्चे हैं । यादव की पत्नी भी सिविल इन्जिनियर हैं और अपने पति के सपने को पूरा करने में यादव का दिलोजान से साथ दे रही हैं । अपने डेयरी उद्योग और संपति को देश की संपति मानने वाले यादव भविष्य में बढिया और व्यवस्थित तरीके से एक वृद्धाश्रम खोलना चाहते हैं । समाजसेवा के प्रति विशेष रुचि रखने वाले यादव अभी तक ११ विभिन्न सरकारी तथा निजी संस्थानों से सम्मानित और पुरस्कृत हो चुकें है । यादव का देश के विभिन्न मीडिया में ९० अन्तर्वाता प्रकाशित और प्रसारित भी हो चुका है ।
कुछ दिन पहले इसी नवम्बर महीनें में पशुपक्षीं विकास मन्त्रालय अन्तर्गत के पशु विभाग ने यादव को सम्मानित करते हुए प्रमाणपत्र और नगद पुरस्कार भी दिया था । सम्मान और प्रमाणपत्र चाहे जितना भी मिले पर यादव के डेयरी उधोग के विस्तार के लिए आर्थिक सहयोग अभी तक किसी सरकारी या निजी संस्था ने नहीं किया है । जिसका मलाल यादव को भी है । अपने उद्योग को और बेहतर और विस्तार करने के लिए फन्डिगं की खोज कर रहे यादव के जीवन का एकमात्र उद्देश्य या सपना जो भी कहें अपने पशुपालन व्यवसाय को देश का ही सब से बड़ा और व्यवस्थित पशुपालन (कैटल फार्मिगं) बनाना है । जिसके लिए पिछले ९ साल से अपने सॉफ्टवेयर इन्जीनियरिंग और एमबीए पढाई की डिग्री को एक कोने में रख कर यादव अहोरात्र काम में जुटे हुए हैं । यादव ने अपने जीवन रुपी नदी की धार को अपने उद्देश्य के अनुकूल मोड़ कर उस में सफलता के साथ गोते लगा रहे हैं ।

 

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