Thu. Jan 17th, 2019

‘जहाँ न पहुंचे कोई सरकार, वहां भी पहुंचे पत्रकार’ : एस.एस. डोगरा

पत्रकारिता और मैं

हिमालिनी, अंक डिसेम्वर 2018, जहाँ न पहुंचे कोई सरकार, वहां भी पहुंचे पत्रकार’ ! जी हाँ अनेक चुनोतियों कठिनाईयों को अपने बौद्धिकता, जिज्ञासा एवं रचनात्मकता के आधार पर पत्रकार ही वह शख्स है जो तह तक जाकर किसी भी घटना, समस्या एवं खबर को खोज एवं उजागर कर आदर्श समाज निर्माण में महत्वपूर्ण बदलाव तथा विकास करने में पहल कर अपने पेशे को सार्थक साबित कर सकता है । अगर लेखन कार्य की बात करूँ तो शायद मैं छठी कक्षा में पढ़ता था जब मैंने सबसे पहले एक लेख (दीवाली जैसे पर्व पर लिखा निबंध) मैंने जब एक दृष्टिहीन की नेत्रहीन कल्याण नामक पत्रिका के लिए लिखा था शायद वही मेरे पत्रकारिता में पहला कदम या बीज रोपित हुआ । वैसे मैं सक्रिय लेखन की बात करुँ तो बाहरी दिल्ली धारा नामक साप्ताहिक समाचार पत्र के लिए निरंतर लिखना सन १९९५ में आरम्भ किया । लेखन वो भी सकात्मकता में काफी रुझान रहा ।

मुझे याद है जब मेरे एक सहकर्मी एस । के । तिवारी ने अप्रैल, २००४ में एक रिक्शेचालक के बच्चे (टिंकू) के बारे में बताया कि उसके दिल में छेद है और एम्स में इलाज के लिए उसके एक लाख पचास हजार रूपये नहीं है जो उसका ईलाज करा सके । मैंने इस बिषय को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल के दस्तावेज के आधार पर दो कालम की खबर लिखी जिसका शीर्षक लिखा ‘पाक के परवेज का इलाज फ्री तो टिंकू का क्या कसूर’ इस खबर के नायक भारती समाचार पत्र में प्रकाशित होते ही एक समाजसेवी विनोद गुप्ता जी की पत्नी ने मुझे फोन पर बात करते हुए टिंकू के इलाज की जिम्मेदारी ली तथा इलाज भी कराया । इसी तरह एक बार मैं पंजाब केसरी समाचार पत्र दिल्ली में बतौर संवाद सूचक के रूप में पÞmीचर लेखन के लिए, मुझे पश्चिमी दिल्ली के महिला कॉलेज–एस.पी. एम । पर स्टोरी बनाने पर वरिष्ठ पत्रकार एवं पंजाब केसरी के प्रमुख संपादक अश्वनी मिन्ना जी ने भी सराहा और उक्त कालेज की तत्काल प्रधानाचार्या डॉ । एस । के । जौली ने भी अश्वनी जी के अलावा मुझे भी प्रेरक पत्र भेजा, और इसी तरह उत्तराखंड में स्थित कैंची मंदिर के प्रबंधक ने मेरे बाबा नीम करौली द्वारा स्थापित कैंची मंदिर पर लिखित मेरे लेख को काफी लोकप्रियता मिली । २६ जनवरी सन २००१ को भयंकर भूकंप में विजय भाटिया जी द्वारा अहमदाबाद, भुज में दौरे पर जाना और उस भूकंप पीडि़त गुजरात पर मेरा लेख हरिभूमि समाचार पत्र के फ्रंट पेज पर प्रकाशित होना, पड़ोस के बच्चे की गुमशुदगी को समाचार पत्र में प्रकाशित करने पर इकलौते बेटे का मिलना, द्वारका परिचय मीडिया ग्रुप में भी इस तरह के सकारात्मक पÞmीचर एवं रिपोर्टिंग को भी अनेकों बार विशेष सम्मान मिला । ये सब मेरी पत्रकारिता के अनमोल क्षणों में आज भी महकते महसूस होते हैं ।
एफ आई एम टी कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ । सरोज व्यास द्वारा लिखी (२१ मानवीय भावनाओं पर आधारित लघु कथाओं के संग्रह ने अपनी पुस्तक) ‘पलाश के फूल’ का प्रस्तावना लिखना । वयोवृद्ध प्रमुख समाजसेविका सिसिली कोडियान आंटी की तीस वैज्ञानिकों की जीवनियों पर आधारित ‘वर्ल्ड एमिनेंट साइंटिस्ट्स’ को सम्पादित करना, भाई राजेश गहलोत जी द्वारा आयोजित ‘द्वारका श्री रामलीला की स्मारिका’, भाई सतीश राज देशवाल जी द्वारा संचालित ‘हर बच्चा बन सकता है जीनियस’ पत्रिका का यादगार लेखन संपादन में सहयोग करना (जो हरियाणा प्रदेश के अलावा भारत के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंदर मोदी जी तथा माननीय राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद जी के कर कमलों में स्थान पाना) मेरे पत्रकारिता जीवन के अनमोल अनुभवों के रूप में अंकित हैं ।
देशभर में एक सौ से अधिक मीडिया कार्यशाला आयोजित करने के पश्चात् एक बार मुझे बाल भवन स्कूल में भी एक मीडिया कार्यशाला करने का मौका मिला, जिसे स्कूल ने उपयोगी समझते हुए मुझे विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर गत वर्ष बारहवीं तथा उसके बाद ग्यारवीं कक्षा को मॉस मीडिया स्टडीज विषय को पढ़ाने का सुअवसर मिला । पत्रकारिता में विभिन्न समाचार पत्र पत्रकारिता में दो दशकों की सक्रियता के बाद बालभवन स्कुल में बतौर शिक्षक स्कूली बच्चों को मीडिया विषय पर पुस्तक की मार्किट में अनुपस्थिति ने मुझे किताब लिखने के लिए प्रेरित किया
‘आप जहाँ कहीं भी जाते हैं, वहां पर खÞबर है, लेकिन ये सब आपके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि आप उसका मूल्यांकन कैसे करते हैं और अपने दिव्य एवं सकारात्मक सोच के माध्यम भरे रवैये से समाज में परिवर्तन लाने में कितने सक्षम हैं । मेरे सक्रीय पत्रकारिता एवं मीडिया पर लिखी पुस्तक में सकारात्मकता को अहम् स्थान दिया इसी का परिणाम रहा कि मेरी किताब ‘मीडिया कैन डू वंडर्स इन स्टूडेंट्स लाइफ’ ने न केवल हिंदुस्तान के विभिन्न प्रान्तों साथ साथ विदेशों अमेरिका, इंग्लैण्ड, मौरिसियस, नेपाल, मलेशिया, रूस, स्वीडन, वेनेंजुला आदि में भी काफी लोकप्रियता प्राप्त की ।
मेरे पत्रकारिता एवं लेखन कार्य में प्रेरक रहे राज्य सभा टीवी में बतौर राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख अरविन्द कुमार सिंह, पूर्व सी बी आई निदेशक स्वर्गीय जोगिन्दर सिंह, ग्लोबल मीडिया गुरु संदीप मारवाह सर(जो स्वयं फिल्म सिटी नोएडा के संस्थापक, वरिष्ठतम साहित्यकार एवं कवि डॉ । अशोक लव, पुणे से प्रकाशित होने वाले आज का आनंद दैनिक अखÞबार के संस्थापक संपादक श्याम अग्रवाल जी, बड़े भाई समान वरिष्ठ खेल पत्रकार राजेन्द्र सजवान, राजेश राय, धर्मेन्द्र पन्त, मनीष शर्मा, मनोज जोशी, काठमांडू, नेपाल से बहिन श्वेता दीप्ति, आल इंडिया रेडियो में कार्यरत भाई उदय मन्ना जी, मनीष आजाद, पंतनगर कृषि विश्वविधालय के सामुदायिक रेडियो प्रोडूसर संजय, देहरादून से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक राष्ट्रीय समाचार पत्र के संपादक सतीश शर्मा, ४० से भी अधिक प्रेरक प्रसंगों पर लघु कथाएँ, विचारों लोकक्तियाँ लिखने वाले वरिष्ठतम मशहूर लेखक जोली अंकल सहित कई अन्य पत्रकार बंधू जिन्होंने अपनी सकारात्मक पत्रकारिता के बल पर मीडिया समुदाय, समाज एवं देश का नाम गर्व से ऊँचा किया है । एक बात तो स्पष्ट है कि “सच्चे देशभक्त, नेता, शिक्षक, साहित्यकार, पिÞmल्मकार, कलाकार, खिलाड़ी व पत्रकार प्रत्येक समाज, देश व सभ्यता के प्रमुख आईना होते हैं । क्योंकि इन्ही के महत्वपूर्ण योगदान पर किसी भी देश का अतीत, वर्तमान व भविष्य निर्भर करता है । ये सदा अमर रहते हैं ।”
सकारात्मकता सोच व पत्रकारिता से भारत निर्माण की डगर सहज तो नहीं है लेकिन मुश्किल भी नहीं है । मैंने तो इसी सकारात्मक रवैये से काम किया । समस्त देश के चहुमुखी विकास में अपने अपने स्तर पर महत्त्वपूर्ण योगदान देकर एक जिम्मेदार पत्रकार की भूमिका अदा करे गौरवान्वित हो । तो आइए सभी मीडिया मित्र एवं विद्यार्थी मिलकर एक नया इतिहास रच डाले, अपने विशाल देश में सकारात्मक पत्रकारिता का बिगुल बजाएँ, समाज एवं देश में खुशहाली लाएं ।

एस.एस.डोगरा

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