Wed. Oct 17th, 2018

साहित्य

नेपाली भाषा और साहित्य के लिए महत्वपूर्ण अवसर : लक्ष्मण गाम्नागे

सन्दर्भ : नेपाल भारत साहित्यिक सम्मेलन 2018 हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८ नेपाल और भारत दोनों देशों

मेरी चाहत है, अगली बार नेपाली में ही कविता पढूं : डा. मधु प्रधान

सन्दर्भ : नेपाल भारत साहित्यिक सम्मेलन 2018 हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८ नेपाल आने का अचानक प्रोग्राम

दूरियां ये दिलों की मिटाती हुई ! कुछ हंसाती हुई कुछ रुलाती हुई : सविता वर्मा “ग़ज़ल

चिट्ठियां चिठ्ठियां प्यारी सी चिट्ठियां ! प्रीत के रंग में ये रंगी चिट्ठियां…. रखती दिल

वीरगंज ने पुराने कथन को ब्रेक किया है :सनत रेग्मी

सन्दर्भ : नेपाल भारत साहित्यिक सम्मेलन 2018 हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८औद्योगिक नगरी वीरगंज को नेपाल–भारत

विभिन्न देशों के दर्जनों साहित्यकार द्वारा रचित कविता संग्रह ‘हिन्दी की विश्व यात्रा’ लोकार्पण

काठमांडू, ५ सितम्बर । विभिन्न देशों के ४ दर्जन साहित्यकारों की संयुक्त कविता संग्रह ‘हिन्दी

” ना मैं, ना अर्जुन; धरा का, सर्वश्रेष्ठ योद्धा; तो, तू ही है; हाँ  ! तू है, अभिमन्यु ।”

अभिमन्यु; गंगेश मिश्र कर्ण रोया था ! उसकी, मृत्यु पर; स्तब्ध था ! दुर्योधन के,

यकीं का यूँ बारबां टूटना (ग़ज़ल) : डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

यकीं का यूँ बारबां टूटना आबो-हवा ख़राब है मरसिम निभाता रहूँगा यही मिरा जवाब है मुनाफ़िक़ों की भीड़ में कुछ नया न मिलेगा ग़ैरतमन्दों में नाम गिना जाए यही ख़्वाब है दफ़्तरों की खाक छानी बाज़ारों में लुटा पिटा रिवायतों में फँसा ज़िंदगी का यही हिसाब है हार कर जुदा, जीत कर भी कोई तड़पता रहा नुमाइशी हाथों से फूट गया झूँठ का हबाब है धड़कता है दिल सोच के हँस लेता हूँ कई बार  तब्दील हो गया शहर मुर्दों में जीना अज़ाब है ये लहू, ये जख़्म, ये आह, फिर चीखो-मातम तू हुआ न मिरा पल भर इंसानियत सराब है  फ़िकरों की सहूलियत में आदमियत तबाह हुई  पता हुआ ‘राहत’ जहाँ का यही लुब्बे-लुबाब है  

इसी तरह धीरे-धीरे ख्वाहिशें ख़त्म होती हैं, इसी तरह धीरे-धीरे मरता है आदमी : अमरजीत कौंके

धीेर-धीरे अमरजीत कौंके इसी तरह धीरे-धीरे ख्वाहिशें ख़त्म होती हैं इसी तरह धीरे-धीरे मरता है

ए कैसी जहेर भरी आज की सियासत है, हमी लुटे है हमी पर है लूट का इल्जाम : गुल्जारे अदब की गजल गोष्ठी सम्पन्न

नेपालगञ्ज ,(बाँके) पवन जायसवाल । बाँके जिला के गुल्जारे अदब नेपालगन्ज ने शनिवार को मासिक

अंग्रेजी से हमे बैर नही पर प्रभुत्व उसका स्वीकार नही : श्रीगोपाल नारसन

विश्व हिन्दी दिवस का पावन पर्व मुबारक हो उर्दू,मराठी,मलयालम बंगाली,तेलगु,कन्नड़ भी क्षेत्रीय भाषा साथ चले

सम्पूर्ण सौन्दर्य का, पूंजीभूत तत्त्व, समाया है तेरे वजूद में :डॉ वन्दना गुप्ता

माेरपंखी स्पर्श – डॉ वन्दना गुप्ता मुँह धोये सवेरे में, जब सूर्य की अनुपम किरणें,

चिरप्रतीक्षित-कथा कौमुदी, काव्य कलश, सीप के मोती, और हास्य के रँग, चारों साझा सँकलनों, का लोकार्पण

अनुराधा प्रकाशन द्वाराप्रकाशित 4 साझासंकलनों का लोकार्पण, कवि एंव पत्रकार लाल बिहारी लाल भी साहित्य