Sat. May 25th, 2019

साहित्य

दिलीपदर्श की तीन गज़लें कत्ल होता चौक पे सच के सिपाही का। उधर गाता राग कातिल बेगुनाही का।   शब्द कल

स्त्री विमर्श के क्षेत्र में महिला लेखिकाएँ : मौसमी सिंह

हिमालिनी, अंक मार्च 2019 | स्त्री विमर्शः एक नारीवादी सिद्धान्त है । जिसके द्वारा स्त्री की

हिंदी साहित्य के पुरोधा आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

पुण्यतिथि विशेष 19 मई हिंदी साहित्य के पुरोधा आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का हिन्दी साहित्य

मुझे आज साहिल पे रोने भी दो कि तूफ़ान में मुस्कुराना भी है : मजाज़

असरारुल हक मजाज़ या मजाज़ लखनवी (जन्म: 19 अक्तूबर 1911—देहांत: 5 दिसंबर 1955) तत्कालीन साहित्य

श्री लूनकरणदास–गंगादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर ने मनाया स्रष्टा सम्मान रजत महोत्सव (फोटो फिचर)

लिलानाथ गौतम काठमांडू, १० मई । नेपाली भाषा–साहित्य और गीत–संगीत–कला जगत के लिए परिचित नाम

पत्रकार स्वतन्त्र है किसी का गुलाम नहीं …..‘‘प्रेस की स्वतन्त्रता पर संवाद

             विश्व प्रेस स्वतन्त्रता दिवस पर ‘‘प्रेस की स्वतन्त्रता में अध्यात्म की भूमिका’’ विषय पर हुआ संवाद              जिलाधिकारी मंगलायतन विश्वविद्यालय

एक समीक्षात्मक अनुशीलन: रेत होते रिश्ते

 लेखिका: डॉ मुक्ता प्रकाशन: पेसिफिक बुक्स इंटरनेशनल मूल्य: 220 पृष्ठ: 128 समीक्षक  डॉ बीना राघव

देखो मधुमास के रंग यहाँ,सतरंगी कुशुमके संग यहाँ….नव वर्ष की शुभकामना : स्वामी देवस्वरूप (अजय)

अपना नववर्ष 2076 , स्वामी देवस्वरूप (अजय) नव वर्ष की शुभकामना मेरे सभी दिव्य आत्माओं,पूण्य

नेपालगन्ज में नया वर्ष २०७६ की पूर्व सन्ध्या में उर्दू साहित्यकारों द्वारा गजल गोष्ठी का आयोजन

नेपालगन्ज,(बाँके) पवन जायसवाल, चैत्र ३० गते । बाँके जिला की नेपालगन्ज में नया वर्ष २०७६

मौत आई तो जिंदगी ने कहा-‘आपका ट्रंक कॉल है साहब’ : नहीं रहे हास्य कवि प्रदीप चाैबे

१२ अप्रैल स्मृति शेष प्रसिद्ध हास्य कवि प्रदीप चौबे का निधन हो गया है। प्रदीप

क्यूँ मायूस हो तुम टूटे दरख़्त, क्या हुआ जो तुम्हारी टहनियों में पत्ते नहीं

टूटे दरख़्त (सुलोचना वर्मा) क्यूँ मायूस हो तुम टूटे दरख़्त क्या हुआ जो तुम्हारी टहनियों

नेपालगन्ज में नेपाल और भारत के उर्दू साहित्यकारों की गजल गोष्ठी

नेपालगन्ज,(बाँके) पवन जायसवाल । बाँके जिला के नेपालगन्ज में नेपाल और भारत के उर्दू साहित्यकारों

दोस्तो, हमने तो नेतागिरी करना छोड़ दिया है, आपकी आप जानें ! नाउ, नो मोर नेतागिरी 

प्रो.शरद नारायण खरे, (व्यंग्य) | जब हम स्कूल में पढ़ते थे, और एन.सी.सी में ट्रेनिंग

फ़ासला तो है मगर कोई फ़ासला नहीं मुझ से तुम जुदा सही दिल से तुम जुदा नहीं ~शमीम करहानी

  फ़ासले हमेशा बेचैनियां बढ़ाते हैं और शायरी के लिए एक वातावरण तैयार करते हैं।

जलेश्वर में डॉ राजेन्द्र विमल साहित्य एकेडमी द्वारा वृहद् साहित्य संगोष्ठी

आज 2075 चैत्र 16 गत्ते जलेश्वर स्थित जिल्ला विकाश के सभाकक्ष में डा.राजेन्द्र विमल साहित्य

डा. राणा की तलाश बेहतरीन अल्फाजों का मजमुआ है : वसन्त चौधरी

डा कृष्णजंग राणा रचित हिन्दी गजल संग्रह तलाश का आज हिमालिनी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम