रदीफ़ “किया मैंने” काफिया “अर” : वाणी नित्या
रदीफ़ “किया मैंने” काफिया “अर” ख्वाब कुछ अधूरा सा मुश्तहर किया मैंने जिंदगी बसर तन्हा

रदीफ़ “किया मैंने” काफिया “अर” ख्वाब कुछ अधूरा सा मुश्तहर किया मैंने जिंदगी बसर तन्हा
ग़ज़ल – वशिष्ठ अनूप गाँव-घर का नज़ारा तो अच्छा लगा, सबको जी भर निहारा तो
नेपालगञ्ज/(बाँके) पवन जायसवाल ।बाँके जिला की नेपालगञ्ज में रही अदबी संगठन “गुल्जार–ए–अदब” की ५ सौ८३
हरिद्वार, 19 जनवरी । सुविख्यात लोकप्रिय शायर दीक्षित दनकौरी के कुशल संयोजन व नेतृत्व में
नेपालगन्ज / (बाँके) पवन जायसवाल । बाँके जिला के उर्दू साहित्यकारों की उर्दू साहित्यिक संगठन
काठमांडू, २९ दिसम्बर । डा. कृष्णजंग राणा की ऊर्दू गजल संग्रह ‘रंग–ए–गजल’ संग्रह का विमोचन
१ उसने जब कहा मुझसे गीत एक सुना दो ना सर्द है फिजा दिल की,
परछाई…” ये कैसी परछाई है, ये कैसी साया है । लौटकर कोई तेरे दर पर
बेचैनी, खुलापन, बेलौस मस्ती से भरी हुईं दुष्यन्त कुमार की गजलें ये ज़बाँ
नेपालगन्ज/ पवन जायसवाल । बाँके जिला में गुल्जार–ए– अदब ने हरेक महीने जैसै मासिक गजल
नेपालगन्ज/ (बाँके) पवन जायसवाल ।बाँके जिला में रहा गुल्जार–ए– अदब ने अपनी मासिक गजल गोष्ठी
कैफ़ी आज़मी उर्दू के महान शायरों में से एक शायर थे इन्होने हिंदी फिल्म में
निदा फ़ाज़ली उर्दू-हिन्दी के अज़ीम शायर हैं साथ ही उन्होंने कई फ़िल्मों के लिए भी
दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें जाने वाली चीज़ का ग़म क्या करें
गजल:- जीवन जो उपहार करे … …………………….. कोई हमको प्यार करे दो पल आँखे
कैसर-उल-जाफरी तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा
बाँकें/ नेपालगंज पवन जायसवाल गुल्जार–ए– अदब में अन्सार नेपाली द्वारा प्रस्तुत किया गया गजल ।
बाँके/ नेपालगंज पवन जायसवाल गुल्जार–ए– अदब नेपालगन्ज के अध्यक्ष हाजी अब्दुल लतीफ शौक द्वारा प्रस्तुत
बाँके / नेपालगंज पवन जायसवाल गुल्जार–ए–अदब के सचिव मोहम्मद मुस्तफा अहसान कुरैशी द्वारा प्रस्तुत गजल
गजल कार्यक्रम में अन्जुमन शाहकार–ए–उर्दू उत्तर प्रदेश भारत के अध्यक्ष शारिक रब्बानी द्वारा पढा गया
अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जायेंगे मर गये पर न
ग़ज़ल आप मेरी सिफारिश किया कीजिए नाम महफ़िल में मेरा लिया कीजिए। आप चाहें तो
*ज़िंदगी बवाल है या फिर सवाल है * हो गये बदनाम पाकर जिसे, उस नाम
* एक नज़्म * तुम लिखो तो गीत बनता, मैं लिखूँ तो बात बनती ।
* एक नज़्म * तुम लिखो तो गीत बनता, मैं लिखूँ तो बात बनती ।
ग़ज़ल मुहब्बत की कहानी लिखी हुई है खुद अपनी ही बयानी लिखी हुई है गुजारी
ग़ज़ल दास्तां-ए-ज़िंदगी, किताब लगे है , फुरकत-ए-यार इक अजाब लगे है।फलक पे धुँधली सी तस्वीर
साफ किया ना गर दिल तो…. (गजल) साफ किया ना गर दिल तो, गंगा में
जौन एलिया तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ ये कैसी तन्हाई है
गजल ये दिल क्यूँ मचलती रही रातभर नींद भी गायब रही रातभर।। वो तस्वीर जो
कोई हंगामा-ए-हयात नहीं रात ख़ामोश है सहर ख़ामोश – वाहिद प्रेमी हर तरफ़ थी ख़ामोशी
शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर जाता हूँ मैं मुस्कुरा देते हैं बच्चे
बाबूराम प्रधान गेहूं की अब फसल पक गई उठी दरांती गांव में सभी काम पर