Tue. Jul 7th, 2020

गजल

कभी जिहन में, तो कभी ख्यालों में, जागती आँखों का वो ख्वाब लगे है : विनोद निराश

ग़ज़ल दास्तां-ए-ज़िंदगी, किताब लगे है , फुरकत-ए-यार इक अजाब लगे है।फलक पे धुँधली सी तस्वीर