Wed. Nov 14th, 2018

साहित्य

कमिशनमांडू

मुकुन्द आचार्य:काठमांडू अपना नाम समय-समय पर बदलते रहता है । जैसे कुछ बनिया-बैताल सरकारी महसूल

काव्य और गजल क्षेत्र से जुड़ी शख्सियत द्वारा काठमाण्डू मे महफिले गजल

काठमाण्डू,१३ दिसम्बर । अन्तर्राष्ट्रीय नेपाली साहित्य परिषद के बैनर तले हर महीने के अन्तिम में

त्रिविवि हिन्दी विभाग व्दारा ‘हिन्दी साहित्य शिक्षण संगोष्ठी’ विषयक कार्यशाला सम्पन्न

काठमाण्डू,२१ नवम्बर । त्रिभुवन विश्वविद्यलय अन्तर्गत केन्द्रीय हिन्दी विभाग के द्वारा विश्वविद्यालय परिसर स्थित शेडा

धनिया

परशु प्रधान:धनिया उस सपने से विचलित हो उठी थी । उसे ही सोचते-सोचते एक बार

कविताएं

अपने हाथ में कुछ भी नहीं है वीरेन्द्र प्रसाद मिश्र ऐसा सोचते हैं सब कुछ

किस्मत

गणेशकुमार लाल: उसने बहुत कोशिश की अपने भाग्य को बदलने के लिए । बलराम एक

सावित्री

चन्द्रकला नेवार:अस्तगामी र्सर्ूय की अन्तिम किरणें ब्रहृमपुत्र के तरंगों के ऊपर नृत्य कर रही थीं

कविताएं

वक्त के साथ मनीष कुमार श्रीवास्तव वक्त के बदलने में वक्त नहीं लगता, विचार बदलने

कुछ हाइकु

कुछ हाइकु-मुकुन्द आचार्य तेज हवा है पेडÞ गिर जाएंगे दूब बचेगी ! धूप है खिली

नेपाल में हिन्दी भाषा के “प्रगतिवादी” प्रारम्भिक साहित्यकार

सच्चिदानन्द चौवे:प्रगतिवादी साहित्य अंगे्रजी साहित्य के “प्रोग्रेसिव लिटरेचर” शब्द का हिन्दी अनुवाद है। सन् १९३र्५र्

कविता एक अंधेरी कला है जो आपके जीवन के साथ बाहर निकलती है: अरुन्धती सुब्रह्मण्यम

दिसम्बर ६, काठमाण्डू । भारतीय राजदूतावास काठमाण्डू तथा बी.पी. कोइराला भारत–नेपाल फाउण्डेशन द्धारा  शुक्रबार को