Tue. Jan 22nd, 2019

साहित्य

समझौता

समझौतागंगेश मिश्र, कपिलवस्तु२२,फरवरीसमझौते होते रहे हैं,होते रहेंगे।जिन्हें बोने हैं काँटेबोते रहेंगे।फिर वही होगा,जो होता रहा

जिन्दगी

शुवह शुहानी मौसम दिवानी ख़ुशहाल जिन्दगी सुन्दर कहानी पग पग सँभलना सँभलकर चलना खुशीयाँ बाटकर

हाय रे राष्ट्रवाद ! गागर मे भरी हुई जल की तरह जहां, तहां छलक जाती है : बिम्मीशर्मा

बिम्मीशर्मा, काठमांडू , २२,सेप्टेम्बर | हम नेपालवासियों के अन्दर राष्ट्रवाद कूट, कूट कर भरा है

जब भाग्य में अंधेरा, तो शहर किसके लिए था, जब धूप थी किस्मत तो सजर किसके लिए था|गुल्जारे अदब की गजल गोष्ठी

गुल्जारे अदब की मासिक गजल गोष्ठी नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल,२०७२ असोज २ गते । गुल्जारे अदब

मैने देखा है

पलाष्टिकके गुलजस्तासे महक आते मैने देखा है कसाइभी अनाथो पर दया देखाते मैने देखा है

“मेरे दिलों के हौसलों को आजमाने के लियें” गुल्जारे अदब द्वारा गजल गोष्ठी,

नेपालगन्ज,(बाके) पवन जायसवाल, २०७२ जेष्ठ ३० गते । गुल्जारे अदब बाके ने नेपालगन्ज के महेन्द्र

ऐ मौत

ऐ मौत, तु इतना कठोर क्यो ? हजारो सपने, लाखो अरमान सजाए इन्सानको पलभरमे मिटा

नेपाली साहित्य समाज नेपाल च्याप्टर द्वारा ९ वाँ स्रष्टा भेटघाट कार्यक्रम

काठमाणडू,१७ जनबरी । अन्तर्राष्ट्रीय नेपाली साहित्य समाज नेपाल च्याप्टर द्वारा ९ वाँ स्रष्टा भेटघाट कार्यक्रम

कमिशनमांडू

मुकुन्द आचार्य:काठमांडू अपना नाम समय-समय पर बदलते रहता है । जैसे कुछ बनिया-बैताल सरकारी महसूल

काव्य और गजल क्षेत्र से जुड़ी शख्सियत द्वारा काठमाण्डू मे महफिले गजल

काठमाण्डू,१३ दिसम्बर । अन्तर्राष्ट्रीय नेपाली साहित्य परिषद के बैनर तले हर महीने के अन्तिम में

त्रिविवि हिन्दी विभाग व्दारा ‘हिन्दी साहित्य शिक्षण संगोष्ठी’ विषयक कार्यशाला सम्पन्न

काठमाण्डू,२१ नवम्बर । त्रिभुवन विश्वविद्यलय अन्तर्गत केन्द्रीय हिन्दी विभाग के द्वारा विश्वविद्यालय परिसर स्थित शेडा