Sat. Nov 17th, 2018

डायरी

योग उतपाति के मुखय कारन :सच्चिदानन्द चौवे

न भूतकोपान्नच दोषकोपान्न, चैव सांवत्सरिको परिष्टान् ग्रह प्रकोपात्प्रभवन्ति रोगाः कर्मोदयोंदीरण भावतस्ते। अर्थात्ः- पृथ्वी आदि भूतों

एना किए …

भाषा जो  हो , साहित्य उस भाषा के  माध्यम से  कवि तथा र चनाकार  की सामाजिक, सांस् कृतिक,

दमन कब तक

ने पाल के  मधे शियों को  शासक के  द्वारा शो षण कर ना या दबाना कोर् इ नई बात नहीं