Tue. Nov 13th, 2018

व्यक्तित्व और कृतित्व

” ना मैं, ना अर्जुन; धरा का, सर्वश्रेष्ठ योद्धा; तो, तू ही है; हाँ  ! तू है, अभिमन्यु ।”

अभिमन्यु; गंगेश मिश्र कर्ण रोया था ! उसकी, मृत्यु पर; स्तब्ध था ! दुर्योधन के,

मेरी पत्रकारिता प्रजातन्त्र के लिए समर्पित रही : राजेश्वर नेपाली

हिमालिनी अंक सितम्बर २०१८ | राजेश्वर नेपाली, पत्रकारिता क्षेत्र के लिए एक जानी–मानी हस्ती हैं,

विपक्ष के भी चहेते रहे अटल बिहारी वाजपेयी : डा. गोपाल नारसन

हिमालिनी, अंक, सितम्बर २०१८ | भारतीय राजनीति मे एक मात्र अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे सर्वमान्य

यकीं का यूँ बारबां टूटना (ग़ज़ल) : डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

यकीं का यूँ बारबां टूटना आबो-हवा ख़राब है मरसिम निभाता रहूँगा यही मिरा जवाब है मुनाफ़िक़ों की भीड़ में कुछ नया न मिलेगा ग़ैरतमन्दों में नाम गिना जाए यही ख़्वाब है दफ़्तरों की खाक छानी बाज़ारों में लुटा पिटा रिवायतों में फँसा ज़िंदगी का यही हिसाब है हार कर जुदा, जीत कर भी कोई तड़पता रहा नुमाइशी हाथों से फूट गया झूँठ का हबाब है धड़कता है दिल सोच के हँस लेता हूँ कई बार  तब्दील हो गया शहर मुर्दों में जीना अज़ाब है ये लहू, ये जख़्म, ये आह, फिर चीखो-मातम तू हुआ न मिरा पल भर इंसानियत सराब है  फ़िकरों की सहूलियत में आदमियत तबाह हुई  पता हुआ ‘राहत’ जहाँ का यही लुब्बे-लुबाब है  

डायरी के पन्नों में श्री पं. योगेश्वर मिश्र ‘बैद्य’ : सच्चिदानन्द चौबे

सच्चिदानन्द चौबे,हिमालिनी, अंक अगस्त ,२०१८  श्री पं. योगेश्वर मिश्र वैद्य देश के एक प्रतिभा सम्पन्न,

इसी तरह धीरे-धीरे ख्वाहिशें ख़त्म होती हैं, इसी तरह धीरे-धीरे मरता है आदमी : अमरजीत कौंके

धीेर-धीरे अमरजीत कौंके इसी तरह धीरे-धीरे ख्वाहिशें ख़त्म होती हैं इसी तरह धीरे-धीरे मरता है

अंग्रेजी से हमे बैर नही पर प्रभुत्व उसका स्वीकार नही : श्रीगोपाल नारसन

विश्व हिन्दी दिवस का पावन पर्व मुबारक हो उर्दू,मराठी,मलयालम बंगाली,तेलगु,कन्नड़ भी क्षेत्रीय भाषा साथ चले

सम्पूर्ण सौन्दर्य का, पूंजीभूत तत्त्व, समाया है तेरे वजूद में :डॉ वन्दना गुप्ता

माेरपंखी स्पर्श – डॉ वन्दना गुप्ता मुँह धोये सवेरे में, जब सूर्य की अनुपम किरणें,

चाहत डाक्टर बनने की थी पर राजदूत बन गया : श्यामानन्द सुमन (जीवन–सन्दर्भ)

हिमालिनी की एक नई पहल । हिमालिनी अगस्त अंक से समाज के लब्धप्रतिष्ठित बुजुर्ग व्यक्तित्व

दर्द तो है इस बात का दिल में कि, सांसे देकर धड़कन ने साथ छोड़ दिया ।

प्रिया मिश्रा कुछ खूबसूरत लम्हों ने साथ छोड़ दिया कि हसीं ख्वाबों ने साथ छोड़

अगर बचानी बेटियां, करें आज संकल्प । बेटी का जग में नहीं, कोई और विकल्प ।

बेटी है इक्कीस डा. रामनिवास ‘मानव’ बेटा–बेटी में नहीं, कहने को कुछ भेद । मरती

महान कवि राम इकबाल सिंह ‘राकेश ‘ की 107वीं जयंती पर शत शत नमन

जिस मिट्टी की महक और खुशबू में रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा रचित गेंहूं और गुलाब जैसे

आयुर्वेद का अर्थ ही जीवन का विज्ञान और जीने की कला से सम्बंधित है : डॉ राकेश सिंह

जनकपुरधाम । आज विश्व स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य पर आयुर्वेद चिकित्सा से नेपाल के प्रथम

विकास निर्माण में डटे हैं अध्यक्ष रामतपेश्वर ठाकुर (वार्ड नं. 12 थारुआहि)

नमस्कार मित्रों! आज 2074-12-21 बुद्धबार जलेश्वर नगरपालिका वार्ड नम्बर 12 थरुआहि के आदरणीय अध्यक्ष श्री

कात्यायनी और कविता : डा.श्वेता दीप्ति

डा.श्वेता दीप्ति, काठमांडू |  नेपाल यात्रा में आईं हुई कात्यायनी जी से मिलने का सुअवसर