Mon. Nov 19th, 2018

नेपाल में उर्दू की शमा : मोहम्मद, मुस्तफा कुरेशी ‘अहसन’

मोहम्मद, मुस्तफा कुरेशी ‘अहसन’, हिमलिनी अंक अक्टूबर 2018 । हमारा मुल्क नेपाल पूरी दुनिया में वो वाहिद मुल्क है जो कभी किसी का गुलाम नही रहा और उसकी आजादी का परचम पूरी शानो “शौकत” के साथ आज तक लहरा रहा है । यही पर आलमी रिकर्ड की हामिल हिमालय की चोटी जो माउण्ट एभरेष्ट के नाम से मशहूर है और जिसकी बुलन्दी ८८४८ मीटर है । पूरी दुनिया में एक नुमाया मुकाम रखती है । नेपाल में रारा ताल के नाम से मशहूर एक बहुत खूब सूरत झील भी है जिसकी लम्बाई ५०१ मीटर चौडाई २०७ मीटर और गहराई १६७ मीटर है । ये झील अपनी बुलन्दी २२९० मीटर के सबब एक अलग ही शान रखती है । आलमी पैमाने पर पानी की कसरत की बुनियाद पर मुल्क नेपाल दूसरे नम्बर पर है ।
पहाडी एलाका जुमला में इन्तिहाई बुलन्द मुकाम पर एक धान का खेत है । जिसकी बुलन्दी ३०५० मीटर है । नेपाल अपने बुलन्द–व–बाला मुकाम के सबब पूरी दुनिया में मुमताज नजर आता है । कुदरती तौर पर नेपाल तीन हिस्सो में मुन्कसिम है । पूरे मुल्क का रकबा १४७१८१ वर्ग किलो मीटर है । जिसमें हिमाल १५% (२२०७७.१५ कि.मी.) पहाड ६८% (१००.०८३ कि.मी) और तराई १७% (२५०२०.७७ कि.मी) है । एलावा अजी यहाँ खूबसूरत मनाजिर की बहुतायत है । यहाँ इस मुल्क में बलखाती दरियाओं के मन्जर भी हैं । खूबसूरत चश्मे हैं, बोलते झरने हैं । सूरज की सुनहरी किरने पहाड़को चूमती हुई नजर आती हैं । हिमालय की चोटी गंगन से बोस–कनार मेमह्व नजर आती है । यहाँ हुस्न है, इश्क है, सागर–व–मीना के हलकते हुये जाम हैं । गोया एक अहले कलम के लिये वह सारे असबाब मौजूद है जिन पर उसका कलम चल सकता हो । ऐसे माहौल मे दर्द मन्द और हस्सास दिल इन मनाजिर को देख कर जरुर अपनी गुफ्तगू मौजूं करेगा और दिल में उठने वाले जजबात को अल्फाज का जामा पहनाकर तहरीर की शक्ल में पेश करेगा । यही वजह है कि वेस्टर्न नेपाल में दर्जनो शोरा–ए–एकराम को पैदा किया है । यही नही बल्कि मुल्क नेपाल के बहुत से मुकामात में नामवर शोरा–ए–एकराम पैदा हुए और लोगों ने ऊर्दू जबान अकवामे आलम के राब्ते की जबान है । एक सर्वे के मुताबिक पूरी दुनिया में एक तिहाई आबादी ऊर्दू लिखती, बोलती और कुछ नहीं तो समझती जरुर है । अपनी इसी लचक और शोहरत व मकबूलियत के पेशे नजर ऊर्दू दुनिया की दूसरी बडी बैनुल अकवामी जबान बनती जा रही है । हमारे अपने मुल्क नेपाल में सरकारी मरदुमशुमारी के मुताबिक २.६१ % ऊर्दू बोल्ने वाले मौजूद हैं । नेपाल मे ऊर्दू को सरकारी तौर पर भी तसलीम किया जा चुका है ।
शायरी जिसकी शुरुआत दिल में पैदा होने वाले दर्द के एहसास से होती है । जाहिर है एक हस्सास दिल का मालिक ही इस फन की तरफ मुतवज्जेह होता है । जो एक जबर दस्त तबदीली लाने की ताकत रखती है । दिल में हुस्ले मन्जिल की तड़प पैदा करती है । सख्त से सख्त हालात में अपने अज्म व इरादे की पुख्तगी पैदा करने के लिए नजरे शायरी की तरफ तवज्जह देने पर मजबूर होती है । कौमी व मिल्ली तराने का नाम देकर सियासत दाँ, मुुसलेह, खतीब सब अपनी–अपनी शऊर–व–फहम के मुताबिक अपने कारे मनसबी को पूरा करते हंै ।
इस तम्हीद के बाद में अपनी बात का रुख शायर व अदीब मोहतरम शारिक रब्बानी साहब की तरफ करता हुँ । मोहतरम शारिक रब्बानी साहब की विलादत ३० जुलाई १९६३ को मित्र राष्ट्र भारत के कस्बा–नानपारा जिला–बहराईच (उत्तर प्रदेश) के एक मोअज्जज मुस्लिम राजपूत घराने में हुई । आपके वालिद जनाब ठा.अब्दुल रब खाँ मरहूम भी ऊर्दू शेरो अदब का जौक रखते थे । आपकी तालीम एम.काम.एम.ए. (ऊर्दू) है । आप यू.पी.एफ.सी. मे सर्विस करते हैं । साथ ही खिदमते ऊर्दू मे भी मशगूल हैं । बहैसियत शायर आपको जनाब करीमुल एहसानी हसनपुर लोहारी (मुजफ्फरनगर) से शरफ–ए–तलम्मुज हासिल है जो आलमी शोहरत याफ्ता शायर हजरत एहसान दानिश के शागिर्द थे । मोहतरम शारिक रब्बानी साहब अन्जुमन शहकार–ए–ऊर्दू उत्तर प्रदेश के सदर भी हैं । आपने कई किताबें लिखी हैं जो दुनिया की तमाम मशहूर लाइब्रेरियों के एलावा ऊर्दू की मशहूर वेबसाइट धधध।चभपजतब।यचन पर भी मौजूद है । आपका एक शेरी मजमूआ“फिकरो फन” के नाम से शाया हो कर अवाम व ख्वास मे मकबूल हो चुका है । इसके बाद आपने अपना नाविल “गरदिश–ए–अययाम” पेश करके अपनी अदबी अहमियत का भी लोहा मनवाया है । इसके एलावा आपने जिला–बहराईच के नामवर शायर मोहतरम इजहार वारसी पर एक किताब “इजहार वारसी शखसियत और फन” भी लिखी हैं जो हिन्दुस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया के दीगर मुल्को मे भी पसन्द की गई है । मोहतरम शारिक रब्बानी साहब की एक अहम काविश “डूबते नगमात (दीवान गरीब बहराइची)” भी है । यह बहराईच के एक ऐसे शायर के गजलाें का मजमूआ है जो गुमनामी के दौर से गुजर रहे थे और उनका कलाम वक्त के साथ साथ डूबने के कगार पर था । सिर्फ यही नहीं बल्कि अपने तजलियात–ए–बहराईच के नाम से भी एक किताब मुरत्तब की है ।
शायर व अदीब मोहतरम शारिक रब्बानी साहब का सीना अदब की खिदमत के जज्बा से इस कदर मोजजन है कि आपकी ये काविशे सिर्फ अपने वतन तक महदूद नहीं रही बल्कि अपने वतन हिन्दोस्तान से निकल कर सरह दपार करते हुए आप मुल्क नेपाल में भी जलवा अफरोज हुए और मुल्क नेपाल के तारीखी शहर नेपालगंज की जोहर शनास आँखे आपके अन्दर की अदबी सलाहियत भाँप गयीं । जिसके एवज आपके पहले ही कदम पर आपको नेपालगंज में “अवधश्री सम्मान” से नवाजा गया इसके बाद “फारुकअहमद आरिफ”गजल सम्मान समेत” समेत यके बाददी गरे कई एजाजात से नेपाल मे आपकी इज्जत अफजाई की गई । यहीं पर आप मुल्क नेपाल और यहाँ के अदबी माहौल से आप इतना मुतअस्सिर हुए कि आपने “शोरा–ए–नेपाल का तफसीली जायजा” नामी किताब का आगाज कर दिया जो अब मुकम्मल हो चुकी है । मोहतरम शारिक रब्बानी साहब नेपाल के मुशायरो, बहुभाषीय गजल गोष्ठियो, ऊर्दू सेमिनार व साहित्यिक कार्यक्रमों में खुसुसी तौर पर बुलाये जाते हैं और नेपाल के अदबी हल्को में काफी मकबूल हैं ।
इसी साल २ जनवरी २०१८ (२०७४ विक्रमी पूस १८ गते दिन मंगलवार) को जब नेपाल की एक नामवर हस्ती ऊर्दू के अजीम शायर मोहतरम अब्दुल लतीफ“शौक” नेपाली साहब को सदरे मुमलिकत (राष्ट्रपति) मोहतरमा विद्यादेवी भण्डारी के हाथाें ऊर्दू जबान की खिदमत के सिलसिले में कौमी एवार्ड से नवाजा गया और कौमी रोजनामा नागरिक अखबार में एक मजमून “गजलों के बादशाह” के उनवान से “शौक” साहब के बारे में शाया हुआ तो मोहतरम शारिक रब्बानी साहब की तवज्जोह इधर भी हुई और आपने देवनागरी में “नेपाल में ऊर्दू कीशमा” नामी किताब लिखने का फैसला किया जिससे वह लोग भी जो ऊर्दू गजल से प्यार करते हैं, ऊर्दू बोलते व समझते हैं मगर ऊर्दू लिखना पढना नहीं जानते हैं । वो भी ऊर्दू अदब से रुशनास हो सके ।
शायर व अदीब शारिक रब्बानी साहब की यह किताब नेपाल में ऊर्दू के तअल्लुक से एक तारीखी दस्तावेज की हैसियत रखती हैं ।
मुझे उम्मीद है कि यह किताब जब नेपाली आवाम के हाथो में आएगी तो लोग इसका खैर मकदम करेंगे । और यह किताब नेपाल में बेहद मकबूल होगी ।
(सेक्रेटरीगुलजार–ए–अदब बाँके, नेपालगंज (नेपाल)
कुरेशनगर–८ नेपालगन्ज

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