Thu. Nov 5th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

अपना ही दांव उल्टा पड़ा या फिर से बनेंगे प्रधानमंत्री

 
केपीशर्मा ओली/फाईल तस्वीर

प्रधानमंत्री केपी ओली का अपना ही दांव उल्टा पड़ गया और संसद में विश्वासमत हासिल नहीं कर पाने की वजह से उनकी सरकार गिर गई है। निचले सदन में मौजूद 232 सांसदों में से 93 ने उनके पक्ष में मतदान किया तो 124 वोट उनके खिलाफ पड़े। 15 सांसद तटस्थ रहे। 271 सदस्यों वाले प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने के लिए ओली को 136 वोटों की आवश्यकता थी।

दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) की मान्यता रद्द करते हुए UML और माओवादी केंद्र को मई 2018 के समझौते से पूर्व की स्थिति बहाल कर दी थी। ओली ने पिछले सप्ताह संविधान के अनुच्छेद 100 (1) के तहत बहुमत परीक्षण की घोषणा की थी।

फरवरी 2018 में ओली अनुच्छेद 72 (2) के तहत माओवादी केंद्र के समर्थन से प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन UML और दहल के माओवादी केंद्र के विलय के बाद उनकी सरकार को अनुच्छेद 71 (1) के तहत दर्जा मिल गया था, क्योंकि इससे NCP का सदन में पूर्ण बहुमत हो गया।

यह भी पढें   नेपाल से तीन महीने में 2 अरब 20 करोड़ रुपये से अधिक के जूस का निर्यात

ओली की ओर से बहुमत परीक्षण की घोषणा के बाद माओवादी केंद्र ने ओली से समर्थन वापसी का ऐलान कर दिया था और सरकार अल्पमत में आ गई। बहुमत परीक्षण में ओली की हार के बाद राष्ट्रपति को अब नई सरकार के गठन के लिए अनुच्छेद 76 (2) को प्रभावी करना होगा।

अनुच्छेद 76 (2) कहता है कि यदि प्रतिनिधि सभा में किसी पार्टी को बहुमत नहीं होगा तो राष्ट्रपति को सदन के ऐसे सदस्य को प्रधानमंत्री नियुक्त करना होगा जो एक या अधिक पार्टियों के समर्थन से बहुमत जुटा सकते हैं। इससे नेपाली कांग्रेस को माओवादी केंद्र के समर्थन से सरकार बनाने का मौका मिलेगा, लेकिन दोनों पार्टियों को नई सरकार के गठन के लिए 26 और सांसदों की आवश्यकता होगी।

यह भी पढें   प्रधानमंत्री बालेन शाह से आज मिलेंगे भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री, भारत यात्रा के एजेंडे पर होगी चर्चा

यदि सदन 76 (2) के तहत सरकार गठन में विफल रहता है या नियुक्त प्रधानमंत्री 30 दिन के भीतर बहुमत साबित नहीं कर पाता है तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 76 (3) को प्रभावी करेंगे। इस केस में ओली को एक बार फिर सरकार गठन का मौका मिल सकता है।

नेपाल के संविधान के मुताबिक यदि अनुच्छेद 76 (2) के तहत सरकार का गठन नहीं हो पाता है तो राष्ट्रपति प्रतिनिधि सभा में सबसे बड़े दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे। ओली की पार्टी इस समय सदन में सबसे अधिक सांसदों वाली पार्टी है और ओली इसके नेता हैं। यदि ओली अनुच्छेद 76 (3) के तहत फिर प्रधानमंत्री बन भी जाते हैं तो उन्हें नियुक्ति के 30 दिन के भीतर एक बार फिर बहुमत परीक्षण करना होगा।

यह भी पढें   एनपीएल में आज दो मुकाबले, लुम्बिनी लाइन्स और जनकपुर बोल्ट्स के बीच होगी पहली भिड़ंत

यदि ओली बहुमत साबित नहीं कर पाते हैं तो एक बार फिर अनुच्छेद 72 (2) प्रभावी होगा, यदि कोई सदस्य यह दावा करता है कि उसे बहुमत मिल सकता है, राष्ट्रपति ऐसे सदस्य को प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे। ऐसे प्रधानमंत्री को भी 30 दिन के भीतर बहुमत साबित करना होगा और इसमें विफल रहने पर सदन को भंग कर दिया जाएगा।

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com