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शतरंज की बिसात पर भारत चीन वार्ता ? : रुचि सिंह

 

रुचि सिंह, नई दिल्ली । एल. ओ. सी. के पास चीनी क्षेत्र मोल्डो में भारत चीन की 12 वी सीमा वार्ता  के पश्चात डै्गन ने अपनी सेना को लगवाने गोगरा बांट  स्प्रिंग से पीछे हट रहे हैं  . काबिलेगौर है कि पहले भारत चीन बिल्कुल ही आमने सामने आ गये थे.यानि आई बाल टू आई बाल स्थि ती में थे. तनाव कम करने के लिए तंबू और अस्थाई ढांचे दोनों तरफ से हटाये जा रहे हैं.इस का ताना बाना 30 जून को चुसौदिया में हुईं भारत चीन एल. ओ. सी. वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के कमांडरों की बैठक में तय की गई थी. मजे कि बात  भारत चीन की वार्ता होने के पश्चात साक्षात्कार बयान देते ही भू माफिया डै्गन ने उसके ही एक विभाग सेन्ट्रल प्रोपोगेंडा ने एक ऐसा विडियो फुटेज वायरल किया जिसमें चीनी सैनिक गलवान नदी के मोड़ की ऊंचाई से भारतीय सेना पर पत्थर बरसाते नजर आ रहे हैं.? भारत ने इस पर कड़ा एतराज जता दिया है. हांलाकि दोनों देशों के सैन्य स्तर की वार्ता में हांट स्प्रिंग्स और गोगरा जैसे प्रिक्सन प्वाइंट पर सैनिकों के पीछे हटने जैसा कोई बड़ा मुवेन्ट सामने नहीं आया था.बर हाल भू माफिया डे्गन पर विश्वास करना बेहद मुश्किल है. गौरतलब है कि भू माफिया डे्गन की 22 हजार 117 कि. मी. लंबी सीमा लगती है जो भारत पाकिस्तान भूटान म्यांमार नेपाल बंग्लादेश अफगानिस्तान उतर कोरिया वियतनाम आदि है. क्षेत्र फल के मामले में रूस और कनाडा के बाद डे्गन का ही नंबर आता है.  चाचा चीन के साथ भारत का सीमा विवाद 64 साल पुराना है.वजह है इन्टरनेशनल बार्डर का साफ साफ  कि्लयर नहीं हो ना है. भारत शुरू सै मैकमोहन लाईन को मानता आ रहा है. भू माफिया चीन इसे अवैध ही मानता हैं. भारत भी बखूबी समझ गया है कि  चीन सीमा विवाद को लटकाने को ही प्राथमिकता देता है. भारत डे्गन संबंध आज तक परिपक्व की बेल पर चढ़ ही नहीं पाए हैं.वजह हमेशा से रही है कि चीनी राष्ट्र पति शीजिनपिंग ने माओत्से तुंग की नीतियों का लबादा ओढ़ कर अपने कार्यों को अंजाम दे रहा है.  पिछले साल 15  मई को पैगोग झील पर भारत डे्गन के 200 सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई थी. काबिले गौर है कि 1962 में हुए भारत चीन युद्ध के बाद यह युद्ध सबसे भीषण संघर्ष माना गया है. लिहाजा वार्ता रुक गई. 14 जुलाई को भारत चीन के विदेश मंत्री की मुलाकात तजाकिस्तान के दुबारा में शंघाई को आपरेशन आर्गनाइज़ेशन के सम्मेलन में हूई. चीन के विदेश मंत्री के साथ  भारत के विदेश मंत्री ने आपसी बैठक के दौरान स्पष्ट तौर पर दो टुकड़े शब्दों में कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा की यथा स्थिति में कोई भी एक तरफा बदलाव भारत को मंजूर नहीं होगा.तत्पश्च चात 12 वी वार्ता  चार महीने बाद हुई.

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फिलवक्त भारत को यह सोचना होगा कि भूमाफिया चीन लगातार भारत को घेरने के लिए कोई ना कोई ब्लूप्रिंट तैयार कर के उलझाने की कोशिश करता रहता है. डे्गन जानता है कि भारत की स्थलीय सीमा 15 106 कि. मी. है. भारत चीन आपस में 4057 कि. मी. की सीमा साक्षा करते हैं. भारत के पांच राज्यों से हिमाचल प्रदेश  जम्मू कश्मीर उत्तराखण्ड सिक्किम और अरूणाचल प्रदेश है. भारत 1962 वाला भारत नहीं है.हमने भी रक्षा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. डे्गन की हर हरकत पर भारत की अर्जुन आंख लगी हुई है. डे्गन ने अपनी रणनीति को विस्तार करते हुए अपने सात एयरबेस को नया रूप दे रहा है. पूर्वी लद्दाख पर कभी तनाव कम ही नहीं होता है.  चीन लद्दाख के पास नया फाईटर एयरबेस तैयार कर रहा है.यह एयरबेस एल. ओ. सी. के नजदीक शक्चे में है. डे्गन पिछले पेनगाग में हुई सैन्य क्षड़प के पश्चात लडाकू विमानों के लिए अपग्रेड कर रहा है. चीन काशगर होतान नारी गुसाईं पूर्वी लद्दाख के सामने है. इनके अलावा शिगात्से ल्हासा ढोंगी  नियम्ची  चाम्दो पास्ता भी है. गौरतलब है कि  पूर्वी लद्दाख के पास तनाव की मुख्य वजह यह है कि  पैंगोलिन झील  कोई छोटी झील नहीं है. 14 हजार 270 फीट की ऊंचाई पर मौजूद इस झील का इलाका  लद्दाख से तिब्बत तक फैला है.यह 134 कि. मी.लं बी है. दोनों देशों के सैनिक यहाँ नावों से भी  पेट्रोलिंग करते हैं.इस झील के बीच से भारत चीन की लाइन आंफ एक्चुअल कन्ट्रोल गुजरती  है.इस के दो तिहाई हिस्से पर डे्गन का कब्जा है.  दर असल पैगोग पर 2017 में भी दोनों देशों के बीच झड़प हो चुकी है. नाकुला सेक्टर उत्तरी सिक्कीम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर है.यह इलाका मुगुथंग के नजदीक है यह तिब्बती शरणार्थियों के लिए जाना जाता हैं. यह उत्तरी सिक्कीम की आखिरी सीमा चौकी है. विगत 9 मेई  को लाईन आफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन ने अपने हेलिकॉप्टर भेजे. भारत भी कहा पीछे हटने वालों में से है. भारत ने भी अपने एयरबेस से सुखोई 30 एम. के.आई. फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लडाकू विमानों को भेज कर डे्गन को यह जता दिया कि भारत को अब छेड़ ने की कोशिश ना करे. काबिले गौर है कि सीमा पर अपनी स्थिति को और मजबूत करना है. लिहाजा एल. ओ. सी. तक पहुँचने के लिए अरुणाचल प्रदेश में लाकडाऊन के दौरान में,महज़ 27 दिनों में डेपोरिजो पुल बना कर तैयार कर दिया गया है.यह पुल भारत चीन सीमा पर 40 टन वजनी  गाडियों को पहुचाने के लिए कारागार है. डे्गन ने शुरू से ही अरुणाचल में भारत की गतिविधियों को लेकर आपत्ति करता रहा है. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अरुणाचल यात्रा से भी  चाचा चीन बौखलाहट में है. फिलवक्त पैगाम झील के पास फिगर 4 के पास चीन के सैनिकों की गतिविधिया नजर आ रही है. रिज लाईन पर अभी भी डे्गन की मौजूदगी है. चीन आपसी समक्ष को विकास की ओर न ले जा कर पडोसी मुल्क की धरती को कब्जा करने की नियत के तहत डे्गन उलझाने में विश्वास करता है. डे्गन  का सीमा विवाद 23   देशों के साथ चल रहा है. सवाल यह पैदा होता है कि हम अपनी धरती के विवाद को लेकर कब तक डे्गन को झेलना पडेगा? हिन्दी चीनी भाई भाई के नारे के बाद भारत के साथ गलबाहियाँ के बाद  डे्गन  ने पंचशील समक्षौते की धज्जियां उड़ाते  हुए भारत पर डे्गन ने साम्यवादी चीन के राष्ट्रपति जियांग जोमीन के समय 1962 में भारत पर हमला कर दिया था.डे्गन की रंजिश 1959 में शुरू हो गई थी जब भारत ने दलाईलामा को शरण देने की पहल की थी. निकट भविष्य में डे्गन एल. ओ. सी.पर कोई घिनौनी हरकत नहीं करेगा.यह कहना बेहद मुश्किल है.बस हमें भी सतर्क रहने के साथ अपने ब्लूप्रिंट तैयार रखना होगा.? वरना ढाक के तीन पात की तरह सीमा वार्ता लटकी न रहे.

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रुचि सिंह ………..वरिष्ठ पत्रकार

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