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लुंबिनी प्रदेश में भोजपुरी को लेकर आंदोलन

 

भोजपुरी को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में सिफारिश करने के भाषा आयोग से मांग


दीपक कलवार (रुपन्देही )—-
नेपाल के लुंबिनी प्रदेश में हाल ही में भाषा आयोग ने थारू और अवधी भाषा को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में मान्यता देने के लिए सरकार को सिफारिश किया है। नेपाल की संवैधानिक अन्य भाषा आयोग द्वारा सिफारिश की गई भाषा के संबंध में इस निर्णय को थारू और अवधी भाषीओं ने सराहा है। परंतु ईसी प्रदेश में रह रहे करीब साढ़े तिन लाख के संख्या में भोजपुरी भाषियों ने इसका जमकर विरोध किया है।
सरकारी तथ्यों के अनुसार लुंबिनी प्रदेश के रूपंदेही और नवल परासी जिला मिलाकर भोजपुरी भाषियों की गढ़ है। इस प्रदेश में भोजपुरी मात्रिभाषीओं की संख्या सन 2011 के आंकड़ा अनुसार तिन लाख छब्बीस हजार दो सौ साठ है।
भिन्सहरा सामाजिक संस्था रूपंदेही ने मंगलवार को एक प्रेस बयान के जरिए खुलासा किया है कि रूपंदेही और नवल परासी को भाषा आयोग ने ठुकरा दिया है। संस्था की अध्यक्ष परम शीला बनिया आयोग से जोरदार मांग किया है कि भाषा आयोग ने जो सिफारिश किया है उसको तत्काल संशोधन किया जाए और उस सिफारिश में भोजपुरी भाषा को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में मान्यता दिलाने के लिए आयोग तत्काल प्रदेश सरकारों को सिफारिश करें।
भोजपुरी भाषा संस्कृति के संरक्षण अभियान में करीब 2 दशकों से निरंतर रूप से लगे हुए भोजपुरी साहित्यकार तथा अध्यापक शिवनंदन जयसवाल का कहना है कि भाषा आयोग ने भोजपुरी भाषा को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में सिफारिश नकरके भोजपुरी भाषियों के साथ धोखा किया है। विगत वर्षों से नेपाल में रह रहे मधेशी समुदायों के बीच में विखंडन लाने के लिए और भोजपुरी भाषी और अवधी द्वन्द पैदा कराने के लिए यह काम किया गया है ऐसे काफी बौद्धिक लोगों का मानना है।
भोजपुरी भाषा अधिकार कर्मी और अभियान कर्ता शिवनंदन जयसवाल ने आयोग से तत्काल मांग किया है कि आयोग प्रदेश सरकार को तत्काल भोजपुरी भाषा को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में स्वीकृति प्रदान करने के लिए तत्काल पत्राचार करे। आयोग अपनी प्रतिवेदन को तत्काल संशोधन करके भोजपुरी भाषा को सम्मिलित करें। इस बात की सूचना सार्वजनिक किया जाए।

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विगत दशकों से लुंबिनी प्रदेश के रूपंदेही और नवल परासी में तमाम संघ संस्था मीडिया के द्वारा भोजपुरी भाषा संस्कृति साहित्य और कला के उत्थान के लिए तेजी से विकास की गतिविधियां चल रही है। यहां के स्थानीय सरकारें भोजपुरी भाषा संस्कृति को बढ़ावा दे रही हैं। हाल ही में भोजपुरी पाठ्यक्रम को भी विद्यालय मैं तेजी से सम्मिलित किया जा रहा है। कक्षा एक की भोजपुरी पाठ्यपुस्तक बन चुकी है। गैड़हवा गांव पालिका में लागू भी हो चुकी है। भोजपुरी भाषा की साहित्य तथा लिख परंपरा काफी समृद्धि रही है। लुंबिनी प्रदेश में भोजपुरी भाषा को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में लागू करने के लिए पर्याप्त आधार भी है। बहुभाषिक देश नेपाल में जहां गणतंत्र आ चुकी है वहां अब जनता अपनी भाषिक अधिकार को पूर्ण रूप से प्राप्त करना चाहती है।
नेपाल में कुल 129 भाषाएं बोली जाती है। उनमें से भोजपुरी नेपाल की राष्ट्रीय जनगणना में तीसरे स्थान पर है। लुंबिनी प्रदेश में भोजपुरी नेपाली भाषा को छोड़कर तीसरे स्थान पर ही है। रूपंदेही जिला में सबसे ज्यादा भोजपुरी भाषा ही बोली जाती है। इसी तरह से नवल परासी जिला में भी भोजपुरी भाषियों की ही बहुलता है।

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