कोरोना कहर में बच्चे अपना रहे आत्महत्या का मार्ग
अंशु झा | २ सितम्बर, काठमांडू । कोरोना कहर के समय दाङ जिला में १६ वर्ष से कम उम्र के बच्चे आत्महत्या करने पर अधिक जोर देने लगे हें । इससे पहले बालबालिकाओं द्वारा आत्महत्या करने की घटना नहीं के बराबर ही सुनते थे । परन्तु इस कोरोना काल में बच्चें द्वारा आत्महत्या धरल्ल्ो से की जा रही है ।
पुलिस का कहना है कि इस कोरोना कहर में १६ वर्ष से कम उम्र के बच्चों द्वारा बहुत से जगहों में आत्महत्या की घटना में वृद्धि हो गई है । जिसमें दांग जिला भी एक है । जिला प्रहरी कार्यालय दाङ के अनुसार लकडाउन प्रारम्भ से लेकर अभी तक दांग में ९ बालबालिकाओं ने आत्महत्या किया है जिसमें सभी १६ वर्ष से कम उम्र के ही है ।
पुलिस ने जानकारी दी कि दांग में लकडाउन अवधि में नाबालिग द्वारा आत्महत्या करने क्रम इस प्रकार है, चैत्र में एक, वैशाख में दो, ज्येष्ठ में एक, अषाढ में दो, श्रावण में दो और भाद्र के आधा महीना तक एक नाबालिग ने आत्महत्या की है । इस प्रकार कूल ९ बच्चे आत्महत्या कर चुके हैं ।
जिला प्रहरी कार्यालय मुद्दा शाखा के प्रहरी निरीक्षक राजन गौतम के अनुसार बालबालिका द्वारा आत्महत्या करने का विषय जिला में नया है । उन्होंने बताया कि इस प्रकार की आत्महत्या इससे पहले कभी नहीं हुई थी । उनके अनुसार उक्त आत्महत्या का प्रमुख कारण कोरोना कहर ही है । क्योंकि इस वक्त अन्य के तुलना में नाबालिग अधिक प्रभावित हैं । लकडाउन के दौरान परिवार में आर्थिक संकट के कारण नाबालिगों के जरुरतों को वेवास्ता किया जा रहा है । जिससे बच्चे परेशान होकर आत्महत्या का मार्ग चयन कर रहा है ।
पुलिस अनुसन्धान द्वारा पता चला है, वास्तव में लकडाउन के समय अभिभावक अर्थ के खोज में परेशान व्यस्त रहने लगे और बच्चे २४ घन्टे घर में कैद रहने लगे । अभिभावक द्वारा बालबालिका के मनोभावों का मूल्यांकन नहीं किया गया । इसके लिए अभिभावक के पास समय का भी आभाव रहा जिससे बच्चे खुद को कमजोर तथा असहाय महसूस कर आत्महत्या का मार्ग अपनाने लगा ।
प्रहरी निरीक्षक गौतम के अनुसार लगभग ६ महीने से बच्चे घर में ही रह रहे हैं । अपने साथी से भी दूर हैं । बच्चे अपने मन की बात संगी साथी को सुनाते हैं जो लकडाउन दौरान नहीं हो पा रहा है । परिवार के सदस्यों द्वारा भी उनलोगों का मनोभाव नहीं समझा जा रहा है जिससे बच्चों में तनाव उत्पन्न हो रहा है । तनाव के समय छोटी छोटी बातों को भी वह दिल से लगाकर आत्महत्या करने के लिए उत्सुक हो रहे है । शिक्षक व साथी से दूर होने के कारण बच्चे अपने मन की बात कहीं प्रकट नहीं कर पा रहे हैं जिससे मानसिक विक्षिप्तिता होना स्भाविक है । और इसी दौरान बच्चे गलत निर्णय के तरफ अग्रसर हो रहे हैं । इस वक्त अभिभावक के छोटी सी गाली भी बच्चों के लिए आत्महत्या का कारण बन रहा है । गौतम ने एक जानकारी दी कि घोराही रामपुर का एक बालक अपनी मां से खाना मांगा, मां उस समय व्यस्त होने के कारण खाना नहीं दे पाई जिससे वह बालक जंगल में जाकर आत्महत्या कर लिया ।
गौतम के अनुसार आत्महत्या का एक प्रमुख कारण मोबाइल का प्रयोग भी है । मोबाइल के प्रयोग के कारण बच्चों में सकारात्मक से अधिक नकारात्मक प्रभाव पड रहा है । इसके प्रभाव से जीवन अन्त करने पर तुले हुए हैं ।
समग्र में फिलहाल का समय बहुत ही संवेदनशील है । अभिभावक पूर्णरुप से अपने बालबालिका पर ध्यान रखें । बच्चों के मनोभावों को समझकर उनके साथ सही बर्ताव करें । बच्चे भविष्य हैं । उन्हें अपने प्रेम व सद्भाव से सींचित करें । ताकी वह एक असल मानव बन सके ।

