माधुरी दीक्षित के दीवाने मकबूल फिदा हुसैन ने विद्या बालन को न्यूड पेंटिंग बनाने की पेशकश की थी
मशहूर विवादित पेंटर मकबूल फिदा हुसैन उर्फ एम एफ हुसैन को भारत का ‘पिकासो’ कहा जाता है। उनका जन्म 17 सितंबर 1915 को मुंबई में हुआ था। अपने बनाए चित्रों को लेकर हुसैन काफी विवादों में घिरे रहे। वो एक ऐसे शख्स रहे जो चर्चित भी रहे, और विवादित भी। माधुरी दीक्षित से हुसैन को बेहद लगाव था। 85 साल की उम्र में उन्होंने माधुरी को लेकर एक फिल्म भी बनाई थी।
बॉलीवुड एक्ट्रेस की खूबसूरती के थे दीवाने
एमएफ हुसैन खूबसूरती के दीवाने थे. उनका दिल पहले ‘धक-धक गर्ल’ माधुरी दीक्षित पर फिदा हुआ.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक माधुरी दीक्षित की फिल्म ‘हम आपके हैं कौन (1994)’ एम एफ हुसैन ने 67 बार देखी थी और उनके ऊपर पेंटिंग की पूरी सीरीज भी बना डाली थी।
हुसैन माधुरी के इस कदर फैन थे कि उनके लिए 2000 में ‘गजगामिनी’ फिल्म बना डाली. पहले इस फिल्म की शूटिंग बनारस की गलियों और घाटों में होनी थी, लेकिन उस वक्त विवाद की वजह से काशी में फिल्म की शूटिंग नहीं हो सकी थी. तब मुंबई में हुसैन ने सेट लगाकर काशी वाला हिस्सा शूट किया था.
माधुरी के बाद हुसैन का दिल आया तब्बू पर. उन्हें भी फिल्म ‘मीनाक्षी-ए टेल ऑफ़ थ्री सिटीज़’ के जरिए चित्रित किया. इसके बाद वो विद्या बालन पर कुछ ऐसे फिदा हुए कि उन्होंने विद्या के सामने उनकी न्यूड पेंटिंग बनाने की पेशकश कर दी. अपनी इस दीवानगी के कारण उनका अच्छा खासा मजाक बना.
एमएफ हुसैन ने ‘मोहब्बत’ नाम की एक मूवी में खुद भी एक किरदार निभाया था. यही नहीं, इमरजेंसी के दौरान उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पेंटिंग भी बनाई थी.
एम एफ हुसैन को हिंदू देवियों दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की नग्न तस्वीरें बनाने के लिए कड़ी आलोचना का शिकार होना पड़ा था। उनकी पेंटिंग से चरमपंथी हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश पैदा हो गया था। अश्लील पेंटिंग बनाने के विरोध में हुसैन के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों से कई आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए थे।
हुसैन को जितना सम्मान भारत ने दिया, उनकी विवादित पेंटिग्स ने भारत को ही सबसे ज्यादा आहत किया. उसका असर ये हुआ कि 2006 में हुसैन पर लगातार विरोध प्रदर्शन, मुकदमे हुए, उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिलने लगीं.
इन सबसे हुसैन इतना दुखी हुए कि उन्होंने स्वेच्छा से भारत छोड़ दिया. वे लंदन और दोहा में निर्वासित जीवन बिताने लगे. 2010 में उन्हें कतर की नागरिकता मिल गई. 9 जून 2011 को लंदन में उनका निधन हो गया.


