होटल में शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट की लगाम
जनकपुर/काठमांडू, 12 नवंबर 2025 । नेपाल के मधेश प्रदेश में राजनीतिक संकट और संवैधानिक बहस नए मोड़ पर पहुँच गई है। होटल में शपथ लेने वाले नवनियुक्त मुख्यमंत्री सरोजकुमार यादव को सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने फिलहाल नीतिगत या दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाले किसी भी निर्णय से रोक दिया है।
न्यायाधीश टेकप्रसाद ढुंगाना की एकल पीठ ने मंगलवार को यह अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति की संवैधानिक वैधता पर प्रश्न उठे हैं, इसलिए अंतिम निर्णय तक सरकार कोई बड़ा फैसला नहीं ले सकती। अदालत ने इस मामले की अंतिम सुनवाई ११ मंसिर (27 नवंबर) के लिए तय की है।
विवाद की जड़: होटल में शपथ और धारा १६८ का उपयोग
पूर्व मुख्यमंत्री जितेन्द्रप्रसाद सोनल के इस्तीफे के अगले ही दिन प्रदेश प्रमुख सुमित्रा सुवेदी भंडारी ने UML नेता सरोजकुमार यादव को संविधान की धारा १६८(३) के तहत “सबसे बड़ी पार्टी के नेता” के रूप में मुख्यमंत्री नियुक्त किया था।
लेकिन विवाद तब गहराया जब प्रदेश प्रमुख ने आधिकारिक भवन के बजाय महोत्तरी के बर्दिबास स्थित पानस होटल में ही यादव को शपथ दिलाई।
विपक्षी दलों ने इसे असंवैधानिक कदम बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की। उनका तर्क था कि धारा १६८(२) के अनुसार पहले बहुमत हासिल करने वाला गठबंधन बनाने का अवसर दिया जाना चाहिए था।
प्रदेश प्रमुख को पदमुक्त किया गया
मुख्यमंत्री यादव को होटल में शपथ दिलाने वाली प्रदेश प्रमुख सुमित्रा भंडारी को राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने मंगलवार को पदमुक्त कर दिया। उनकी जगह सुरेन्द्र लाभ कर्ण को नया प्रदेश प्रमुख नियुक्त किया गया है, जिन्होंने शपथ भी ले ली है।
विपक्ष की नई याचिका और शक्ति संतुलन
एमाले (UML) को छोड़कर लगभग सभी दलों के बहुमत सांसदों—कांग्रेस, जसपा नेपाल, माओवादी केन्द्र, लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) सहित ६४ सांसदों—ने भी मंगलवार को एक और रिट दाखिल की।
प्रदेश की १०७ सदस्यीय सभा में UML के पास २५ सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस के २२, जसपा के १९, जनमत के १३, माओवादी के ९, लोसपा के ९, समाजवादी के ७ और अन्य तीन दलों के पास एक-एक सीट है।
विरोध और लाठीचार्ज: जनकपुर में तनावपूर्ण माहौल
मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री सरोजकुमार यादव मधेश भवन पहुँचे और सुरक्षा व्यवस्था पर नाराज़गी जताई।
उसी समय UML को छोड़कर सात दलों के नेता और कार्यकर्ता भवन के बाहर पहुँच गए और “असंवैधानिक मुख्यमंत्री हटाओ” के नारे लगाते हुए धरने पर बैठ गए।
भवन के सामने टायर जलाकर प्रदर्शन किया गया, जिसके चलते जनकपुर की सड़कों पर जाम लग गया।
मुख्यमंत्री यादव ने बाद में जानकी स्टार होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा —
“मेरी नियुक्ति पूरी तरह संविधानानुसार है। प्रदेश प्रमुख पर विपक्ष ने दबाव बनाया, इसलिए शपथ होटल में देनी पड़ी। इसमें कोई अनियमितता नहीं है।”
शाम होते-होते भीड़ फिर बढ़ी और जैसे ही सर्वोच्च अदालत का आदेश आया, विपक्षी दलों के समर्थक खुशी में झूम उठे।
इसी बीच यादव दक्षिण दिशा से सशस्त्र प्रहरी बैरक की ओर से मधेश भवन में प्रवेश कर गए और पदभार ग्रहण कर लिया।
इसके बाद भीड़ उग्र हो गई और पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।
प्रदर्शनकारियों ने रेलवे लाइन से पत्थर उठाकर पुलिस पर फेंके, जिसमें दर्जनभर लोग घायल हो गए। घायलों का इलाज प्रादेशिक अस्पताल और धनुषा अस्पताल में चल रहा है।
संवैधानिक संकट की ओर मधेश
सर्वोच्च अदालत का यह आदेश फिलहाल मधेश प्रदेश की राजनीति को ठंडा कर सकता है, लेकिन सवाल अब भी वही है —
क्या होटल में लिया गया शपथ वैध है?
क्या धारा १६८(३) का प्रयोग बिना बहुमत परीक्षण के उचित था?
११ मंसिर की सुनवाई यह तय करेगी कि सरोजकुमार यादव की सरकार टिकी रहेगी या फिर मधेश प्रदेश एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता की ओर बढ़ेगा।



