विदेशी राजदूतों से व्यक्तिगत मुलाकात न करने के स्टैंड से पीछे हटे पीएम वालेन्द्र शाह, आज से शुरू होंगी बैठकें
काठमांडू, ९ अगस्त २०२६ । नेपाल के प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह अपने उस पूर्व रुख से पीछे हट गए हैं, जिसमें उन्होंने विदेशी राजदूतों से व्यक्तिगत रूप से न मिलने की घोषणा की थी। सोमवार से वह काठमांडू स्थित प्रमुख विदेशी राजनयिकों के साथ अलग-अलग (वन-टू-वन) बैठकें शुरू करने जा रहे हैं।
बैठकों का कार्यक्रम और कूटनीतिक संदेश
प्रधानमंत्री शाह के कार्यक्रम के अनुसार, बैठकों का सिलसिला पड़ोसी देशों के साथ शुरू हो रहा है:
सोमवार: भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीनी राजदूत चांग माओमिंग के साथ अलग-अलग बैठक।
मंगलवार: कार्यवाहक अमेरिकी राजदूत (चार्ज डी’अफेयर्स) स्कॉट अर्बम के साथ मुलाकात।
दोनों पड़ोसी देशों (भारत और चीन) के राजदूतों से एक ही दिन मुलाकात करने के निर्णय को नेपाल द्वारा दोनों देशों को समान महत्व देने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मुलाकात का क्रम (पहले भारत, फिर चीन) सरकार की घोषित विदेश नीति की प्राथमिकताओं के अनुरूप तय किया गया है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “पहले भारतीय राजदूत और उसके बाद चीनी राजदूत को बुलाया गया है। एक ही दिन में दोनों की मुलाकात सरकार की विदेश नीति की प्राथमिकता को दर्शाती है। वहीं, अगले दिन अमेरिका के कार्यवाहक राजदूत से मुलाकात होगी, जो नेपाल का एक महत्वपूर्ण मित्र और विकास भागीदार है।”
मुलाकात में देरी का कारण
प्रधानमंत्री ने दो सप्ताह पहले ही इन मुलाकातों की योजना बनाई थी, लेकिन सुनसरी और तराई-मधेश क्षेत्र के अन्य जिलों में हुए विरोध प्रदर्शनों और हिंसक घटनाओं के कारण इस कार्यक्रम को टालना पड़ा था। इस दौरान पीएम शाह ने मधेश-केंद्रित राजनीतिक दलों और सांसदों के साथ चर्चा की थी।
१३ चैत्र को प्रधानमंत्री बनने के बाद वालेन्द्र शाह और काठमांडू स्थित राजदूतों के बीच यह पहली व्यक्तिगत शिष्टाचार भेंट होगी। उम्मीद है कि इन परिचयात्मक बैठकों में राजदूत द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति से प्रधानमंत्री को अवगत कराएंगे और अपनी सरकारों का संदेश सौंपेंगे।
पूर्व का कड़ा रुख और बैठकों से इनकार
इससे पहले पीएम शाह ने विदेशी राजनयिकों और दौरे पर आने वाले वरिष्ठ विदेशी अधिकारियों के साथ अकेले बैठक न करने का कड़ा रुख अपनाया था। इसी नीति के चलते उन्होंने कई अमेरिकी अधिकारियों से मिलने से इनकार कर दिया था, जिनमें शामिल थे:
* दक्षिण-मध्य एशियाई मामलों के अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री **समीर पॉल कपूर**
* राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत **सर्जियो गोर**
* अमेरिकी उप विदेश मंत्री **सारा बी. रोजर्स**
हालांकि, विदेशी कूटनीतिज्ञों से न मिलने के इस अडान के बीच भी उन्होंने २२ आषाढ़ को नेपाल दौरे पर आए एशियाई विकास बैंक (ADB) के अध्यक्ष मसातो कांडा से मुलाकात की थी।
सामूहिक बैठकों से व्यक्तिगत बैठकों तक का सफर
प्रधानमंत्री शाह ने इससे पूर्व काठमांडू स्थित विदेशी मिशन प्रमुखों के साथ संयुक्त (सामूहिक) बैठकें की थीं। कूटनीतिज्ञों और विदेश मामलों के जानकारों ने इस कदम का पारदर्शी कूटनीति और समान दूरी के संबंध विकसित करने की रणनीति के रूप में स्वागत किया था। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी थी कि इसे लंबे समय तक जारी रखना व्यावहारिक नहीं होगा।
सरकार के १०० दिन पूरे होने के बाद, प्रधानमंत्री के सलाहकारों ने उन्हें उद्योगपतियों, व्यापारियों, मीडिया प्रतिनिधियों और राजदूतों से मिलने का सुझाव दिया था। इसी सुझाव पर अमल करते हुए प्रधानमंत्री अब विदेशी राजदूतों के साथ व्यक्तिगत कूटनीतिक संवाद की शुरुआत कर रहे हैं।


