स्वास्थ्य सेवा विभाग तीन महीने से निमित्त के भरोसे
3 weeks ago
मौसमजन्य रोगों के प्रबंधन और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला स्वास्थ्य सेवा विभाग पिछले तीन महीनों से निमित्त महानिदेशक के भरोसे संचालित हो रहा है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार महीनों में ही सर्पदंश से 66 लोगों और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) से 16 लोगों की मौत हो चुकी है।
पिछले कुछ सप्ताह से जनस्वास्थ्य की चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य तथा खाद्य स्वच्छता मंत्रालय में दो अतिरिक्त सचिव होने के बावजूद 11वें स्तर के एक अधिकारी को निमित्त महानिदेशक की जिम्मेदारी सौंपकर देश के प्रमुख स्वास्थ्य निकाय को स्थायी नेतृत्व से वंचित रखा गया है।
स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता ने 12वें स्तर के अतिरिक्त सचिवों को मंत्रालय में ही रखते हुए स्वास्थ्य सेवा विभाग जैसे महत्वपूर्ण निकाय की जिम्मेदारी निमित्त अधिकारी को सौंप दी है।
विभाग के महानिदेशक पद पर अतिरिक्त सचिव को जिम्मेदारी देने की कानूनी व्यवस्था है। मंत्रालय में फिलहाल डा. संगीता कौशल मिश्र और डा. श्रीकृष्ण श्रेष्ठ दो अतिरिक्त सचिव कार्यरत हैं, लेकिन विभाग अभी भी स्थायी नेतृत्व से वंचित है।
विभाग की संगठनात्मक संरचना के अनुसार महानिदेशक स्वास्थ्य सेवा समूह के 12वें स्तर के कर्मचारी होने चाहिए। लेकिन वर्तमान में विभाग का नेतृत्व इपिडिमियोलॉजी तथा रोग नियंत्रण महाशाखा के निदेशक डा. अनुज भट्टचन को सौंपा गया है, जो 11वें स्तर के अधिकारी हैं।
मंत्रीस्तरीय निर्णय से महानिदेशक नियुक्त किए जाने की व्यवस्था के अनुसार मंत्री मेहता ने गत 30 वैशाख को डा. भट्टचन को अगली व्यवस्था होने तक आर्थिक और प्रशासनिक अधिकारों सहित निमित्त महानिदेशक की जिम्मेदारी सौंपी थी।
विशेषज्ञों और संबंधित लोगों का कहना है कि आपदा के समय आकस्मिक स्वास्थ्य सेवाएं, एंबुलेंस और रक्तदान सेवाएं संचालित करने के साथ-साथ जनस्वास्थ्य संबंधी अनुसंधान कार्यक्रमों को तेज करने की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में विभाग को लंबे समय तक निमित्त नेतृत्व के भरोसे छोड़ने से पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
देश की संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली के संचालन, प्रबंधन और नीतियों के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार प्रमुख निकाय का इस तरह निमित्त के भरोसे चलना विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के निर्माण, कार्यान्वयन और निर्णय प्रक्रिया में स्वास्थ्य सूचना प्रणाली के उपयोग की मुख्य जिम्मेदारी संभालने वाले विभाग में स्थायी नेतृत्व नहीं होने से दीर्घकालीन महत्व के काम प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, डॉक्टरों और नर्सों सहित स्वास्थ्यकर्मियों का प्रबंधन तथा उनकी क्षमता विकास जैसे कार्य भी नेतृत्व के अभाव में प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहे हैं।
विपदाओं के समय आकस्मिक स्वास्थ्य सेवा, एंबुलेंस और रक्तदान सेवा संचालित करने तथा जनस्वास्थ्य अनुसंधान को गति देने की जरूरत के बीच विभाग को लंबे समय तक निमित्त के भरोसे छोड़ने से समग्र स्वास्थ्य क्षेत्र का प्रदर्शन कमजोर होने की आशंका संबंधित लोगों ने जताई है।
चार महीने में सर्पदंश से 66 मौतें
आंकड़ों के अनुसार, वैशाख से अब तक सर्पदंश के कारण 66 लोगों की मौत हो चुकी है। इपिडिमियोलॉजी तथा रोग नियंत्रण महाशाखा के अनुसार इस अवधि में 956 लोगों को सांप ने काटा है।
इसी तरह नेपाल में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के संक्रमितों की संख्या भी बढ़ रही है। परिवार कल्याण महाशाखा के अनुसार अब तक 58 लोगों में जेई की पुष्टि हुई है, जबकि 16 लोगों की मौत हो चुकी है।
विभाग के पूर्व उपमहानिदेशक चूड़ामणि भंडारी ने कहा कि विभाग को लंबे समय तक निमित्त नेतृत्व के भरोसे नहीं चलाया जाना चाहिए। उनका कहना है, “निमित्त नेतृत्व होने पर स्वास्थ्य संबंधी खरीद प्रक्रिया और अन्य महत्वपूर्ण निर्णय प्रभावित हो सकते हैं। जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति के मन में यह दुविधा रहती है कि वह कब तक इस पद पर रहेगा, जिससे निर्णय प्रक्रिया में असहजता आ सकती है।”
मानसून के साथ बढ़ा मौसमी रोगों का जोखिम
मानसून के साथ देशभर में मौसमी और महामारीजन्य रोगों का जोखिम बढ़ने के बाद विभाग ने अपने संरचनागत तंत्र को उच्च सतर्कता के साथ सक्रिय करने की बात कही है।
मानसून के दौरान विशेष रूप से हैजा, डेंगी, दस्त, स्क्रब टाइफस, मलेरिया और इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारियों का प्रकोप देखने को मिलता है। स्वास्थ्य अधिकारियों का आकलन है कि पेयजल स्रोतों के दूषित होने और स्वच्छता प्रबंधन में समस्या आने से संक्रमण की दर बढ़ सकती है।
महामारी नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली इपिडिमियोलॉजी तथा रोग नियंत्रण महाशाखा के लिए सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के लिए 30 करोड़ 16 लाख रुपये का बजट आवंटित किया है।
नागरिकों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभाग ने समुदाय स्तर से लेकर प्रादेशिक और केंद्रीय अस्पतालों तक रोगों की रोकथाम और उपचार के लिए एकीकृत पूर्वतैयारी शुरू करने की बात कही है।
वीर अस्पताल में भी अतिरिक्त सचिव का पद खाली
स्वास्थ्य सेवा विभाग के अलावा देश के सबसे पुराने सरकारी अस्पताल वीर अस्पताल में भी 12वें स्तर यानी अतिरिक्त सचिव का पुल दरबंदी पद मौजूद है, लेकिन मंत्रालय अब तक वहां कर्मचारी नहीं भेज सका है।
कोविड-19 के दौरान वीर अस्पताल को यूनिफाइड अस्पताल बनाए जाने के समय मंत्रालय ने वहां यह पद सृजित किया था। वर्ष 2078 बी.सं. में मंत्रिपरिषद की बैठक ने प्रमुख विशेषज्ञ (12वें स्तर) का एक पद पुल दरबंदी के रूप में कायम कर उसे वीर अस्पताल में तैनात करने का निर्णय किया था। हालांकि, अतिरिक्त सचिव अभी भी वहां जाने में अनिच्छा दिखा रहे हैं।

