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अर्थमंत्री स्वर्णिम वाग्ले के अनुमान पर राकेश मिश्रा का गम्भीर सवाल, कहा-‘पहले लोगों को बचाइए, पुनर्निर्माण का बिल बाद में बनाइए’

 

काठमांडू, ३० अगस्त। नेपाल सरकार द्वारा बाढ़ और आपदा के बाद राहत, बचाव तथा पुनर्निर्माण को लेकर किए जा रहे प्रयासों को लेकर आम जनता और दाता समुदाय में विश्वास का माहौल दिखाई दे रहा है। हालांकि, अर्थमंत्री स्वर्णिम वाग्ले द्वारा पुनर्निर्माण के लिए प्रारंभिक रूप से 4 से 5 अरब अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता बताने पर सवाल उठने लगे हैं।

सामाजिक टिप्पणीकार एवं कृषि-अर्थ विशेषज्ञ राकेश मिश्रा ने अपने एक स्टेटस के माध्यम से अर्थमंत्री के इस अनुमान की समय-सीमा और आधार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के समग्र कामकाज को लेकर उनका दृष्टिकोण उत्साहजनक और सकारात्मक है। उनका कहना है कि आम जनता तथा दाता समुदाय में सरकार के प्रति विश्वास बना हुआ है, जो इस संकट की घड़ी में बेहद महत्वपूर्ण है।

मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वे घटना स्थल या सरकारी प्रणाली के भीतर रहकर निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए सरकार के प्रत्येक निर्णय की आलोचना करना उन्हें उचित नहीं लगता। लेकिन अर्थमंत्री द्वारा आपदा के तुरंत बाद इतनी बड़ी आर्थिक राशि का अनुमान सार्वजनिक किए जाने को उन्होंने अनुचित बताया।

‘पहले आकलन पूरा हो, फिर सामने आए आंकड़ा’

मिश्रा के अनुसार, अर्थमंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि 4–5 अरब डॉलर का आंकड़ा केवल प्रारंभिक अनुमान है और नुकसान तथा क्षति का विस्तृत आकलन अभी जारी है। ऐसे में उनका सवाल है कि जब आधिकारिक मूल्यांकन पूरा ही नहीं हुआ है, तो इतनी बड़ी राशि सार्वजनिक करने की जल्दबाजी क्यों की गई?

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उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक आंकड़े का मामला नहीं है। 4–5 अरब डॉलर नेपाल के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 10 प्रतिशत बैठता है। इतनी बड़ी राशि केवल सामान्य बजट अनुमान नहीं होती, बल्कि इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय दाताओं, निवेशकों और वित्तीय संस्थाओं के सामने नेपाल की आर्थिक जरूरतों की प्रस्तुति पर पड़ता है।

मिश्रा ने कहा कि ऐसी स्थिति में किसी भी आंकड़े का आधार बेहद मजबूत और प्रमाणित होना चाहिए।

आपदा के बाद आकलन की तय प्रक्रिया का हवाला

मिश्रा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली आपदा आकलन प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि सामान्यतः आपदा के बाद पहले त्वरित आकलन, उसके बाद क्षति और नुकसान का विस्तृत आकलन (Damage and Loss Assessment) और अंततः आपदा पश्चात आवश्यकता आकलन (PDNA) किया जाता है।

उन्होंने वर्ष 2017 में नेपाल में आई बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय औपचारिक मूल्यांकन के बाद नुकसान लगभग 585 मिलियन डॉलर और पुनर्प्राप्ति की जरूरत लगभग 705 मिलियन डॉलर आंकी गई थी।

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हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा आपदा का पैमाना काफी बड़ा हो सकता है और इस बार पुनर्निर्माण की लागत भी बहुत अधिक होने की संभावना है। लेकिन उनका तर्क है कि पहले आंकड़ा तय कर उसके समर्थन में बाद में प्रमाण तलाशना उचित तरीका नहीं है।

‘अभी प्राथमिकता पुनर्निर्माण नहीं, राहत और बचाव है’

मिश्रा ने मौजूदा परिस्थितियों की गंभीरता की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि अभी भी कई लोग लापता हैं और अनेक परिवार अपने परिजनों की तलाश में हैं। कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। जलविद्युत परियोजनाओं में लोग फंसे हुए हैं तथा हजारों प्रभावित नागरिकों को आश्रय, भोजन, दवाइयों और बुनियादी सेवाओं की जरूरत है।

उनके अनुसार, सरकार की तत्काल प्राथमिकता खोज, बचाव और राहत होनी चाहिए। इसके बाद प्रारंभिक पुनर्प्राप्ति (Early Recovery) और फिर व्यापक पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए।

मिश्रा ने अर्थमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि इस समय सरकार का सबसे महत्वपूर्ण काम संकट का प्रभावी प्रबंधन करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना पूर्ण आकलन के विनाश की कीमत का बड़ा आंकड़ा सार्वजनिक करने से सरकार की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।

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‘पुनर्निर्माण का बिल डेटा बनाए, अनुमान नहीं’

मिश्रा ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सभापति रवि लामिछाने से भी अर्थमंत्री के सार्वजनिक बयानों पर संयम बरतने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि अर्थमंत्री को सुर्खियां बटोरने के बजाय संकट प्रबंधन और वास्तविक काम पर ध्यान देना चाहिए।

उनका संदेश स्पष्ट है—पहले लोगों की जान बचाई जाए, राहत पहुंचाई जाए और प्रभावित क्षेत्रों में शुरुआती पुनर्प्राप्ति का काम किया जाए। इसके बाद विशेषज्ञों की मदद से नुकसान का वैज्ञानिक और तथ्यपरक आकलन किया जाए।

मिश्रा ने कहा कि पुनर्निर्माण की वास्तविक लागत आंकड़ों और प्रमाणों के आधार पर सामने आनी चाहिए, न कि किसी मंत्री के अनुमान या अटकलों के आधार पर।

उन्होंने अंत में अर्थमंत्री से ऐसे बयानों से बचने और मौजूदा संकट के समाधान के लिए अपने मंत्रालय की जिम्मेदारियों पर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया।

(राकेश मिश्रा के स्टेटस पर आधारित)

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