Sat. Sep 12th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

समय से बड़ा कोई नहीं, इसलिए अच्छे समय में भी विनम्र रहें : बिमल सरार्फ

 

बिमल सरार्फ, रक्सौल, 2 सितम्बर 2026 । समय और परिस्थिति पर आज तक किसी का वश नहीं रहा है। ये कब और कैसे बदल जाएँ, कोई नहीं जानता। आज जो परिस्थिति हमारे अनुकूल है, वह कल प्रतिकूल भी हो सकती है। इसलिए जीवन में चाहे कितनी भी सफलता, संपत्ति या शक्ति क्यों न मिल जाए, मनुष्य को हमेशा सहज, सरल और विनम्र बने रहना चाहिए।

यह पूरा संसार भगवान की एक लीला और नाटक के समान है। इस संसार में सृजन भी है और संहार भी, सुख भी है और दुःख भी। वर्तमान समय में युद्ध और हिंसा के रूप में विनाश की लीला दिखाई दे रही है, लेकिन संसार में परिवर्तन का यह क्रम हमेशा चलता रहता है। जीवन का वास्तविक आनंद इस बात में है कि हम परिस्थितियों के बीच अपने मन को संतुलित और सकारात्मक बनाए रखें।

दुनिया को देखने का नजरिया ही हमारे सुख और दुःख को तय करता है। जो व्यक्ति संसार के प्रत्येक प्राणी और प्रत्येक परिस्थिति में ईश्वर का भाव देखता है, उसके लिए जीवन आनंदमय बन जाता है। वहीं जो व्यक्ति केवल बाहरी परिस्थितियों को देखकर जीवन का मूल्यांकन करता है, उसके भीतर असंतोष और दुःख बढ़ता जाता है।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 9 सितंबर 2026 बुधवार शुभसंवत् 2083

मनुष्य के भीतर अच्छाई और बुराई का संघर्ष भी लगातार चलता रहता है। इसका उदाहरण रामायण के पात्रों से समझा जा सकता है। लंका जैसे वातावरण में रहकर भी विभीषण भगवान का नाम लेते रहे, जबकि अयोध्या में रहकर भी मंथरा अपने नकारात्मक विचारों और कलह से मुक्त नहीं हो सकी। इससे स्पष्ट है कि स्थान से अधिक महत्वपूर्ण हमारा मन और हमारा ध्यान है।

केवल मथुरा, काशी या किसी तीर्थस्थल की यात्रा करने से मन पवित्र नहीं हो जाता। वास्तविक तीर्थ तो हमारा मन है। हमारे भीतर चल रहे अच्छाई और बुराई के युद्ध में हमें सावधान रहना चाहिए कि हमारे विचार रावण के अवगुणों की ओर नहीं, बल्कि भगवान राम के सद्गुणों की ओर आगे बढ़ें।

धनवान बनने के लिए एक-एक कण जोड़ना पड़ता है, जबकि गुणवान बनने के लिए एक-एक क्षण का सदुपयोग करना पड़ता है। धन-संपत्ति इस जीवन तक सीमित रह सकती है, लेकिन अच्छे कर्म और पुण्य मनुष्य के जीवन को लंबे समय तक सार्थक बनाते हैं।

यह भी पढें   बदलते हिमालय, पिघलते ग्लेशियर और बढ़ता मानवीय दबाव भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी : बिमल सरार्फ

झूठ कभी भी बेहतर विकल्प नहीं हो सकता। दूसरों से बोला गया झूठ भले ही कुछ समय के लिए स्वार्थ पूरा कर दे, लेकिन धीरे-धीरे विश्वास, सामाजिक प्रतिष्ठा और मानवीय संबंधों को कमजोर कर देता है। सबसे बड़ी बात यह है कि जब मनुष्य स्वयं से झूठ बोलता है, तो उसका प्रभाव सबसे पहले उसी के व्यक्तित्व और मन पर पड़ता है।

जब समय और परिस्थितियाँ हमारे पक्ष में हों, तब किसी का अपमान नहीं करना चाहिए और न ही किसी को कमजोर या कमतर समझना चाहिए। आज हम शक्तिशाली और समृद्ध हो सकते हैं, लेकिन समय हमसे कहीं अधिक शक्तिशाली है। इतिहास इस बात का गवाह है कि समय ने बड़े-बड़े सम्राटों और शक्तिशाली लोगों को भी बदलकर रख दिया।

सफलता मिलने पर अहंकार नहीं, बल्कि विनम्रता बढ़नी चाहिए। जीवन में परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, व्यक्ति को अपने व्यवहार और शब्दों पर नियंत्रण रखना चाहिए। मन खराब हो तो भी किसी को खराब शब्द नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि मन बाद में ठीक हो सकता है, लेकिन मुँह से निकले हुए शब्द वापस नहीं लिए जा सकते।

यह भी पढें   सड़क पर एक महिला के बच्चे को जन्म देने की घटना संसद में उठाई गई

तनाव को संभालना भी जीवन की एक बड़ी कला है। जो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों और तनाव के बीच स्वयं को संतुलित रखना सीख लेता है, वही वास्तविक सफलता का आनंद उठा सकता है। यदि हम तनाव को नहीं संभाल सकते, तो सफलता को भी लंबे समय तक संभाल पाना कठिन है।

अंततः जीवन में सुख-दुःख, लाभ-हानि और अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थितियाँ आती-जाती रहती हैं। हमारे हाथ में समय और परिस्थिति को बदलना नहीं, बल्कि उनके बीच अपने विचार, व्यवहार और कर्मों को सही दिशा देना है। इसलिए अच्छे समय में घमंड न करें, बुरे समय में निराश न हों और हर परिस्थिति में मानवता, संयम, सद्भाव तथा विनम्रता को बनाए रखें। यही जीवन को सार्थक और आनंदमय बनाने का सबसे सरल मार्ग है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com