नेपाल बाढ़ त्रासदी: भारत हर संकट में नेपाल के साथ : राजदूत नवीन श्रीवास्तव
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी के बीच नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा है कि इस आपदा की घड़ी में भारत हमेशा नेपाल के साथ खड़ा है और राहत तथा बचाव कार्यों में हरसंभव सहयोग कर रहा है।
राजदूत श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले बुधवार आई विनाशकारी बाढ़ के तुरंत बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से फोन पर बात कर जनधन की क्षति पर गहरी संवेदना व्यक्त की थी। साथ ही उन्होंने नेपाल के राहत और बचाव अभियान में पूर्ण सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
भारत ने भेजीं चार राहत उड़ानें
राजदूत के अनुसार, बाढ़ आने के दिन से ही भारत अब तक नेपाल के लिए चार राहत उड़ानें भेज चुका है। इन उड़ानों के जरिए 67 टन से अधिक राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई गई है।
राहत सामग्री में शामिल हैं:
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टेंट और तिरपाल
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दवाइयां
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आपदा राहत के लिए आवश्यक उपकरण
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अन्य जरूरी राहत सामग्री
सुरंग बचाव और डीएनए विशेषज्ञ टीम भी पहुंची
भारत ने राहत सामग्री के साथ दो अलग-अलग विशेषज्ञ दल भी नेपाल भेजे हैं।
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सुरंग बचाव विशेषज्ञ दल: पहले चरण में 11 और बाद में 13 विशेषज्ञों सहित कुल 24 सदस्यीय टीम रसुवा पहुंची है। यह दल सुरंगों में फंसे लोगों के बचाव के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त है और आवश्यक उपकरणों के साथ प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे (रेकी) कर रहा है।
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डीएनए विशेषज्ञ दल: भारत से 19 सदस्यीय फॉरेंसिक डीएनए विशेषज्ञ टीम भी नेपाल पहुंची है। यह टीम नेपाल पुलिस की केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारियों के साथ मिलकर बरामद शवों की डीएनए पहचान में सहयोग करेगी।
भारतीय नागरिक भी बड़ी संख्या में प्रभावित
भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा तैयार सूची के अनुसार, इस आपदा में करीब 268 भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं। वहीं, नेपाली सेना और सुरक्षा एजेंसियों की मदद से अब तक 158 भारतीय नागरिकों का सुरक्षित बचाव किया जा चुका है।
बचाए गए लोगों में शामिल हैं:
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कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री,
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अपर त्रिशूली जलविद्युत परियोजना में एंड्रिट्ज़ कंपनी के लिए काम कर रहे श्रमिक,
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नेपाल में रह रहे अन्य भारतीय नागरिक।
इनमें से तमिलनाडु के 21 नागरिक भारत लौट चुके हैं, जहां उनका स्वागत भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किया।
1950 की संधि का उल्लेख
राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच 1950 की संधि के तहत दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा और किसी रोक-टोक के एक-दूसरे के देश में रह और काम कर सकते हैं। इसी कारण बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक नेपाल में मौजूद थे और इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं।


