बारिश थमने के बाद प्रमुख राजमार्गों को खोलने की तैयारी तेज

काठमांडू, 12 आश्विन।
लगातार कई दिनों तक हुई भारी बारिश के बाद मौसम में सुधार आने पर नेपाल के प्रमुख राजमार्गों को फिर से चालू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। प्रशासन का लक्ष्य है कि पृथ्वी राजमार्ग सहित अन्य मुख्य सड़कों पर दोपहर तक यातायात बहाल कर दिया जाए।
बुधवार से जारी लगातार वर्षा के कारण राजधानी काठमांडू की जीवनरेखा माने जाने वाले पृथ्वी राजमार्ग, बी.पी. राजमार्ग और देश के विभिन्न हिस्सों की कई सड़कें बाढ़ और भूस्खलन के कारण बंद हो गई थीं।
रविवार से वर्षा कम होने के बाद नारायणगढ़–मुग्लिन सड़क खंड को खोल दिया गया और पोखरा की ओर जाने वाले वाहनों का संचालन शुरू कर दिया गया। वहीं मुग्लिन–काठमांडू सड़क खंड के अधिकांश स्थानों से मलबा हटाया जा चुका है, हालांकि कुछ हिस्सों में अभी भी यातायात केवल एक तरफ से ही चल रहा है।
रविवार शाम धादिङ जिले के बेनीघाट रोराङ गाउँपालिका–10 स्थित पानीधारा क्षेत्र में बड़े पत्थरों के साथ फिर से भूस्खलन हो गया, जिससे सड़क दोनों ओर से पूरी तरह अवरुद्ध हो गई। धादिङ पुलिस के अनुसार रात में मलबा हटाना संभव नहीं था, इसलिए सोमवार सुबह से दोबारा सफाई अभियान शुरू किया गया।
जिला प्रहरी कार्यालय धादिङ के डीएसपी प्रकाश दाहाल ने बताया कि पानीधारा का भूस्खलन हटते ही काठमांडू को जोड़ने वाला प्रमुख राजमार्ग पूरी तरह खोल दिया जाएगा।
प्रशासन ने कहा है कि सड़क खुलने के बाद भी कृष्णभिर क्षेत्र की स्थिति का निरीक्षण किया जाएगा। सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही वाहनों के संचालन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
भारी बारिश और भूस्खलन से नेपाल के कई अन्य महत्वपूर्ण सड़क मार्ग भी प्रभावित हुए हैं। इनमें प्रमुख हैं—
कान्ति लोकपथ
कालीगण्डकी कॉरिडोर
बागलुङ–बेनी सड़क
तमोर कॉरिडोर के मूलघाट–फिदिम खंड
दाङ–सल्यान को जोड़ने वाला राप्ती राजमार्ग
कर्णाली राजमार्ग
भालुबाङ–चकचके–लिवाङ सड़क खंड
इन सभी मार्गों पर भूस्खलन हटाने और जहाँ आवश्यक है वहाँ वैकल्पिक डाइवर्जन बनाकर यातायात बहाल करने का प्रयास जारी है। संबंधित जिला पुलिस कार्यालयों ने बताया कि सड़कें सुरक्षित होते ही चरणबद्ध तरीके से वाहनों का आवागमन शुरू किया जाएगा।
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले संबंधित जिले की सड़क स्थिति की जानकारी अवश्य लें और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरतें, क्योंकि कुछ स्थानों पर अभी भी पहाड़ों से मलबा गिरने का खतरा बना हुआ है।