जनकवि दुर्गालाल श्रेष्ठ की स्मृति में ‘अक्षर यात्रा दशक आठ’ समारोह का आयोजन
जनकवि दुर्गालाल श्रेष्ठ की स्मृति में ‘अक्षर यात्रा दशक आठ’ समारोह का आयोजन किया गया। बसंत चौधरी फाउंडेशन और दुर्गालाल साहित्य प्रतिष्ठान के संयुक्त आयोजन में हुए कार्यक्रम में जनकवि श्रेष्ठ के साहित्यिक योगदान और व्यक्तित्व का स्मरण किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत जनकवि दुर्गालाल श्रेष्ठ की स्मृति में बसंत चाैधरी फाउन्डेशन की अध्यक्ष मेघा चाैधरी तथा काठमान्डू की मेयर सुनीता डंगोल द्वारा दीप प्रज्ज्वलन, पुष्प अर्पण और मौनधारण से हुई। इस अवसर पर जनकवि श्रेष्ठ के जीवन और साहित्यिक यात्रा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘अक्षर यात्रा : दशक आठ’ प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम में ‘6 नवाचार : अक्षरों की छह नई रोशनी’ के अंतर्गत ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति और समीक्षा भी की गई। इसके साथ ही जनकवि श्रेष्ठ की कविताओं का पाठ और उनकी रचनाओं की प्रस्तुति दी गई। समारोह में ‘अक्षर महर्षि सम्मान’ भी प्रदान किया गया। उनकी स्मृति को समर्पित गीत और रुबाई की प्रस्तुति साहित्यकार बसंत चाैधरी के द्वारा की गई तथा अक्षरांजलि अर्पित की गई।
कौन थे जनकवि दुर्गालाल श्रेष्ठ?
जनकवि दुर्गालाल श्रेष्ठ नेपाली साहित्य के लोकप्रिय कवि और गीतकार के रूप में स्थापित हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, प्रकृति, प्रेम और सामाजिक यथार्थ की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है। उनका लोकप्रिय गीत ‘ ‘फूलको आँखामा फूलै संसार काँडाको आँखामा काँडै संसार’ ’ आज भी व्यापक रूप से स्मरण किया जाता है ।
श्रेष्ठ ने नेपाली के साथ-साथ अन्य भाषाओं में भी अनेक कविताएँ और गीत लिखे। उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए उन्हें विभिन्न संस्थाओं और प्रतिष्ठानों से सम्मानित किया गया। नेपाल भाषा परिषद ने उन्हें जनकवि की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्हें मदन पुरस्कार गुठी का जगदंबाश्री पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था। इसके अतिरिक्त उन्हें अनेक अन्य पुरस्कार और सम्मान मिले।
दुर्गालाल श्रेष्ठ का जन्म 1935 ई. (विक्रम संवत् 1992) में जुलाई महीने में नेपाल के काठमाडौँ में हुआ था। उनका जन्म एक मध्यमवर्गीय नेवार परिवार में हुआ। उनके पिता गणेशलाल श्रेष्ठ और माता आशामोती श्रेष्ठ थीं। दुर्गालाल का परिवार साहित्यिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध था। इसी पारिवारिक वातावरण का प्रभाव पड़ा और वे बचपन से ही लेखन तथा कला के क्षेत्र की ओर आकर्षित हुए।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पद्मोदय सेकेंडरी स्कूल (Padmodaya Secondary School) से प्राप्त की। इसी विद्यालय से उनकी औपचारिक शिक्षा की शुरुआत हुई और यहीं उनके भीतर साहित्यिक रुचि के बीज पड़े। पद्मोदय स्कूल के वातावरण ने साहित्य और लेखन के प्रति उनके लगाव को गहरा किया, जो आगे चलकर उनके साहित्यकार व्यक्तित्व के विकास में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
दुर्गालाल श्रेष्ठ की रचनाओं में समाज और मानवता के प्रति गहरी संवेदना, सामाजिक यथार्थ तथा सांस्कृतिक संदर्भों का स्पष्ट चित्रण मिलता है। उन्होंने नेपाली साहित्य को अनेक महत्वपूर्ण और मूल्यवान रचनाएँ प्रदान कीं।


