नेपाल और यूरोप के वैज्ञानिकों के बीच सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन आयोजित
बार्सिलोना।
विदेशों में रह रहे नेपाली वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं के ज्ञान, कौशल तथा अनुभव को नेपाल के अनुसंधान एवं नवाचार से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित नेपाल-यूरोप विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन 2026 जर्मनी में संपन्न हुआ।
शुक्रवार (9 अक्टूबर) को ट्यूबिंगन विश्वविद्यालय में आयोजित इस सम्मेलन में पांच देशों के लगभग 60 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। ‘नेपाल के लिए, नेपालियों द्वारा’ की मूल भावना के साथ आयोजित सम्मेलन में नेपाल, जर्मनी, फिनलैंड, डेनमार्क और स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता, प्राध्यापक, चिकित्सक, इंजीनियर तथा विद्यार्थी शामिल हुए।
सम्मेलन में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, जीवविज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्रों में चल रहे अनुसंधानों पर चर्चा की गई। साथ ही, नेपाल के अनुसंधान संस्थानों और विदेशों में रह रहे नेपाली विशेषज्ञों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
इस सम्मेलन का आयोजन जैविक विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान, ट्यूबिंगन विश्वविद्यालय, नेपाली रूट्स संस्था तथा काठमांडू विश्वविद्यालय जैव प्रौद्योगिकी पूर्वविद्यार्थी नेटवर्क के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का संयोजन अनुसंधान संस्थान के सह-संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रज्वल राजभंडारी ने किया।
सम्मेलन के दौरान नेपाल स्थित जैविक विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान और जर्मनी स्थित नेपाली रूट्स संस्था के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य नेपाल और यूरोप के वैज्ञानिकों तथा अनुसंधानकर्ताओं के बीच सहयोग का विस्तार करना है। इसके तहत संयुक्त अनुसंधान, ज्ञान के आदान-प्रदान और साझा परियोजनाओं के संचालन की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
विदेशों में रह रहे नेपाली वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के नेपाल की शिक्षा, अनुसंधान तथा नवाचार के क्षेत्र में योगदान पर सम्मेलन में एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का संयोजन नेपाली रूट्स के अध्यक्ष डॉ. कृतन गौतम ने किया।
सत्र में नेपाल के विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों के साथ संयुक्त अनुसंधान, ज्ञान हस्तांतरण और विद्यार्थियों की क्षमता विकास जैसे विषयों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कहा कि विदेशों में अर्जित विशेषज्ञता को नेपाल की आवश्यकताओं से जोड़कर अनुसंधान के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
सम्मेलन में काठमांडू विश्वविद्यालय के पूर्वविद्यार्थियों ने भी अपने अनुसंधान और व्यावसायिक अनुभव साझा किए। जर्मनी, फिनलैंड तथा स्विट्जरलैंड में कार्यरत पूर्वविद्यार्थियों ने स्वास्थ्य, सूक्ष्मजीव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
ट्यूबिंगन विश्वविद्यालय के प्राध्यापक हेराल्ड ग्रोस और तुर्कु विश्वविद्यालय की डॉ. एवलिना मुनुक्का ने भी अनुसंधान से संबंधित प्रस्तुतियां दीं।
आयोजकों ने बताया कि सम्मेलन के माध्यम से स्थापित संपर्कों को निरंतरता देते हुए नेपाल और यूरोप के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा अनुसंधान के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार किया जाएगा। विदेशों में रह रहे नेपाली विशेषज्ञों के ज्ञान और अनुभव का उपयोग नेपाल में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए करना इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य है।

