तातोपानी नाका नियमित रूप से संचालित करने की मांग, सीमा पर फंसे त्योहार लक्षित सामानों से भरे कंटेनर
काठमांडू, 19 ऑक्टोबर।
कात्तिक १ गते से अस्थायी रूप से खोले गए नेपाल–चीन सीमा स्थित ऐतिहासिक तातोपानी नाके को नियमित रूप से संचालित करने की जोरदार मांग उठने लगी है। हालिया व्यवस्था के तहत यह नाका सप्ताह में केवल तीन दिन ही संचालित होने के कारण आगामी त्योहारों को देखते हुए मंगाए गए करोड़ों रुपयों के सामान सीमा पार ही फंसे रहने का जोखिम बढ़ गया है।
नेपाल हिमालय सीमापार वाणिज्य संघ के महासचिव रामचन्द्र पराजुली के अनुसार, चीन के सिचांग स्थित न्यालम क्षेत्र में दशैं, तिहार जैसे प्रमुख त्योहारों को लक्षित कर लाए गए ४५ से अधिक कंटेनर फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा, “अस्थायी रूप से केवल तीन दिन संचालित होने वाले नाके से इन सभी सामानों को समय पर नेपाल लाना संभव नहीं है। इसलिए व्यापारिक सुगमता और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए नाके का नियमित संचालन अत्यंत आवश्यक है।”
महासचिव पराजुली ने जानकारी दी कि संघ ने नाके के निरंतर संचालन की मांग को लेकर चीनी सरकार और नेपाल स्थित चीनी दूतावास को ध्यानाकर्षण पत्र सौंप दिया है। उन्होंने बताया कि सीमा पर फंसे सामानों में एक बड़ा हिस्सा फल-फूल, कृषि उत्पाद और मौसमी व्यापारिक वस्तुएं हैं, जो समय पर गंतव्य तक न पहुंचने पर सड़ने या नष्ट होने के कगार पर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अन्य व्यापारिक नाकों के सुचारू न होने की स्थिति में द्विपक्षीय व्यापार को बचाने के लिए तातोपानी नाके का पूर्ण संचालन ही एकमात्र विकल्प है।
उधर, तातोपानी भन्सार कार्यालय के भन्सार अधिकृत नरेन्द्रसिंह चैसिर ने बताया कि रविवार को इस नाके से तीन मालवाहक कंटेनर नेपाल में दाखिल हुए थे, जबकि सोमवार शाम तक केवल सात कंटेनर ही आ सके हैं।
अधिकृत चैसिर के अनुसार, चीनी पक्ष द्वारा फिलहाल केवल बड़े कार्गो ट्रकों को ही अनुमति दिए जाने के कारण छोटे कंटेनर सीमा पार ही रुके हुए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक भित्रिए कंटेनरों में मुख्य रूप से फल-फूल, जूते-चप्पल, रेडीमेड कपड़े और कृषि संबंधी सामग्री शामिल हैं।


