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मधेशी बौद्धिक युवा जमात से विनम्र अनुरोध मधेश को अब आपके नेतृत्व की जरुरत

 

मधेशी बौद्धिक युवा जमात से विनम्र अनुरोध
शैलेन्द्र त्रिपाठी

sahid divas lahanजहाँ विभेद होता है वहीं विद्रोह भी होता है, अर्थात् विभेद से विद्रोह पैदा होता है वही होता आ रहा नेपाल की राजनीत में सदियों से राज्यपक्ष द्वारा मधेश व मधेशियों के उपर विभेद जिसके कारण विद्रोह अर्थात् क्रान्ति व आन्दोलन उत्पन्न हुआ ।
शान्तिपूर्ण मधेश आन्दोलन१ का जब उद्घोष हुआ, तब मधेशी जनता अनभिज्ञ थे, मधेश आन्दोलन २ में मधेशी जनता कुछ हद तक चेतनशील हुए, और हाल जारी मधेश आन्दोलन – ३ से मधेशी जनता को काफी अनुभव और राजनीतिक चेतना मिली
मधेश आन्दोलन क्यों ?
नेपाल में राज्यपक्ष द्वारा मधेश व मधेशियों के उपर सदियो से होता आ रहा दुर्व्यवहार और दूसरे दर्जा के नागरिक की तरह व्यवहार और भेदभाव को सदा के लिए अंत करके हम मधेशी भी एक इज्जतदार और प्रतिष्ठित हैं, हमलोगों का भी उतना ही अधिकार है जितना गैर मधेशियों का है ्र अर्थात्, मधेश व मधेशी जनता के बराबर हक, अधिकार, स्वाभिमान सम्मान और पहचान के स्थापना हेतु बहुत कठिन और बाध्यात्मक परिस्थिति में मधेश जनविद्रोहका उद्घोष हुआ जो पुरा विश्व जानता है,
मधेश मुक्ति की लडाई में और आन्दोलन केही क्रम में मधेश केन्द्रित राजनीतिक संस्था का जन्म हुआ, जिसके माध्यम से सैकडों नेता भी पैदा हुवे इसी मधेश आन्दोलन के क्रम में ्र मधेश आन्दोलन के तहत मधेश में दो प्रकार के मधेश और मधेशबाद राजनीतिक विचारधारा प्रारम्भ हुई, जिसमें प्रस्तुत हुवे मधेशी नेता और मधेशबादी नेतागण
मधेशी नेता
गैर मधेशबादी दल और चेहरा मधेशी मूल के होते हुवे भी राष्ट्रीय राजनीतिक संस्था से आबद्ध है, जिनका विचार केवल मधेश पर ही नहीं बल्कि पूरे नेपाल के हकहित के राजनीतिक विचारधारावाले नेतृत्व होते है ं इन्हें मधेशी नेता कहते है ्र
मधेशवादी नेता
जिनका विचार केवल मधेश के प्रति ही होती है जो मात्र मधेश मुक्ति के राजनीतिक यात्रा में लगे हुए रहते हैं । एेसे लोग केवल मधेश के हकहित के लिए नेतृत्व करते हैं, एेसे नेता को मधेशबादी नेता कहा जाता है, एेसे लोग मधेश केन्द्रित दल में आबद्ध रहते हैं और मधेश केन्द्रित दलको ही मधेशबादी दल कहते हैं
वास्तव में कहा जाए तो, जो नेतृत्व शक्तियाँ मधेश व मधेशी जनता के प्रति समर्पित होना चाहिए वो अभी तक प्राप्त नही हो सका ्र चाहे वह मधेशवादद की राजनीति में हो या फिर राष्ट्रिय राजनीति में
सच्चा और दीर्घकालीन नेतृत्व कैसा होना चाहिए ?
जो एक समुदाय, राष्ट्र वा पुरे देश का नेतृत्व करते हैं हम उन्हें नेता कहते है, लेकिन हमारा नेतृत्व करने वाला नेता कैसा होना चाहिए वही जानना अतिआवश्यक है ।
नेतामे होनेवाली मुख्य मुख्य गुण होती है जैसे स्( इमान्दारिता, मृदुभाषी, सत्यता, नैतिकता, मिलनसारिता, व्यवहारिकता, लगनशीलता, सक्रियता, समुदाय में सुमधुर समबन्ध, सामाजिक क्रियाकलाप में संलग्नता, खोज और अनुसन्धान में सदैव तत्परता, समर्पणवादी सोच, ज्यादा सुनना और कम बोलना, उचित शिक्षा और सामाजिक चेतना, विकास प्रेमी, समुदाय परिवर्तन में भूमिका निर्वाह करना, सामाजिक चिन्तन, जनभावना का कदर करना, समस्या समाधान करने की क्षमता विकाश, निर्णय लेने की क्षमता विकाश, बिचार को संगठित करना, निःस्वार्थ भावना, वैचारिक लडाई लड्ने की क्षमता विकाश, समाज विकाश में उद्घोष करने के लिए सदैव आतुर, लोभ रहित, भ्रमरहित, और अनुशासन जैसे अनेको गुण एक असल नेतृत्व कर्ता में होना अत्यावश्यक है, जिसका हमारे देश में अधिक अभाव है, कारण आन्दोलन से आए हुए नेतृत्व की जितनी आवश्यकता है उतना ही आवश्यक है समाज से आनेवाले नयाँ नेतृत्व शक्ति का ।
देखा जाए तो, अक्सर शिक्षित वर्ग और बौद्धिक युवा जमात लोग राजनीति से दूर ही रहना ज्यादा पसंद करते है ं जिसका परिणाम हमारे सामने है । मेरे अनुभव में, समुदाय में जिनके बच्चे तेज रहते हैं वा अपने बच्चों को डाक्टर या इंजीनियर बनाते हैं नेता नहीं । अगर ये बच्चे राजनीति में आएँ तो देश की राजनीत मे परिवर्तन जरुर होगा । हमारे देश में अब, एक गतिशील और बौद्धिक युवा जमात वाले नेतृत्व की जरुरत है । अभी नहीं तो फिर कभी नही, और हम नहीं तो और कौन ? युवाओं को ही अब आगे आना होगा और देश की बागडोर सम्भालना होगा ।sahid divas lahan

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