पर्सा प्रहरी की धांधली, आधी रात को घर में घुसने का प्रयास।
रेयाज आलम ,चैत्र ३० गते, शनिवार | पर्सा प्रहरी अब कानून को ताक पर रखकर धांधली करने पर उतारू हो गई है। जहां प्रहरी उपरीक्षक (एस.पी.) रेवती ढकाल को “पर्सा का सिंघम”और “पर्सा के खरेल” जैसे उपनामो से इज्जतअफजाई होती थी, वह छवि धूमिल हो रही है। जब प्रहरी उपरीक्षक (एस.पी.) रेवती ढकाल नए-नए आये थे तो अपने स्वबिवेक से निर्णय लेते था। उनकी स्वबिवेक से निर्णय करने की क्षमता ने ही उन्हें मान-सम्मान दिलाया, पर्सा के लोगो में लोकप्रिय बनाया। जब वे आये थे तो कोई मुद्दा दर्ता करने के लिए किसी से सिफ़ारिश की जरूरत नहीं पड़ती थी, लेकिन जैसा की आमतौर पर होता है, एक जगह पर कुछ दिन रह जाने के बाद कुछ ख़ास लोगो से घनिष्ठा हो जाती है,और वे लोग किसी भी निर्णय को प्रभावित करने लगते है, अपने निजी स्वार्थ या दुश्मनी निकालने लगते है।
कुछ ऐसी ही घटना रात घटी। पर्सा के कालिकामाई गांवपालिका-५ में रात के आठ बजे दो भाइयो के बिच सामान्य झगड़ा हो गया। दोनों भाइयो के झगड़े के शोर से पड़ोस के लोग बाहर निकले। दोनों भाइयो को समझाने का प्रयास किया गया, फिर भी झगड़ा शान्त नहीं होने पर कुछ लोग वही से सटे पांच घर दूर पुलिस चौकी में शिकायत करने गए, वहां पुरे चौकी में एक सिपाही के आलावा कोई नहीं था। स्थानीय लोगो ने नाराजगी जाहिर किया की चौकी के पास ही झगड़ा हो रहा है और पुलिस-प्रशासन का कोई अता-पता नहीं है। फिर कुछ लोग स्थानीय जनप्रतिनिधि के घर गए और इनसब लापरवाही के लिए खड़ी-खोटी सुनाई। फिर सबकुछ सामान्य हो गया, सबलोग अपने-अपने घर सोने चले गए।
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रात को दो बजे पोखरिया थाना से एक गाड़ी पुलिस और चौकी के पुलिस एक शिकायतकर्ता का घर घेर लेते है। पुलिस घर के दरवाजे पीटने लगी, घर का चारदीवारी लाँघ क़र जबरदस्ती छत पर चढ़ने की कोशिश करने लगे, उस घर में सिर्फ २ महिलाएं और दो बच्चे थे। घर के लोग चीख-पुकार मचाने लगे। पहले तो लगा की डाकू है, फिर लगा की इतनी रात को इनकाउंटर करना चाहते है, क्योकि इतने साधरण बात पर बिना वारंट पुलिस का ऐसा रूप अनिष्ट की आशंका पैदा करता है। शोर सुनकर गांव के लोग बाहर आ गए। लोग पुलिस से सवाल करने लगे, इतने रात को छापामार शैली में आने की क्या जरूरत है, ना कही लाठी-गोली चला है, ना कोई घायल हुए है सामान्य जनाक्रोश वाली बात हुई है,फिर पुलिस ऐसा कदम क्यों उठा रही है। स्थानीय लोग ये बाते पूछ ही रहे थे की वार्ड अध्यक्ष का फोन असई के पास आया, जिसमे वार्ड अध्यक्ष,असई को हिंसा फ़ैलाने को उकसा रहा था, बदला लेने को उकसा रहा था, और बार-बार प्रहरी महानिरीक्षक सर्वेन्द्र खनाल के नाम का धौंस दे कर, पुलिस को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। ये बाते सभी लोगो को सुनाई दी और सब लोग समझ गए की यही आदमी निजी स्वार्थ, जलन और राजनैतिक लाभ के लिए पुलिस को गुमराह करके साज़िश कर रहा है। वही प्रहरी उपरीक्षक (एस.पी.) रेवती ढकाल को उल्टा सीधा घटना बताकर राजनैतिक लाभ लेने की फ़िराक में है। सारी बात जानने के बाद ग्रामीण लोग आक्रोशित हो गए, वहां गांव के लोग और पुलिस के बिच भिड़ंत की स्थिति आ गई। दोनों तरफ से अनिष्ट होने ही वाला था, की कुछ मानवाधिकारवादी, और समाजसेवी लोग पहुंच गए और बिच-बचाव करके पुलिस को वापस भेजा। गौरतलब है की प्रशासन के पास शक्ति है,अधिकार है लेकिन इस तरह शक्ति का दुरूपयोग हो, किसी के उकसावे में अधिकार का अनुचित प्रयोग हो तो प्रशासन के साख पर प्रश्नचिन्ह लगेगा और जनता विरोध में उत्तर सकती है।


