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हनुमान #जयंती कब और #महावीर #जयंती कब ?

 

आज चैत्र पूर्णिमा है वैसे तो कोविड को लेकर कुंभ के समाप्ति की औपचारिक घोषणा अखाड़ों द्वारा हफ्ता दस दिन पूर्व ही हो चुका है।किन्तु परंपरानुसार आज के प्रतीकात्मक अंतिम शाही स्नान के साथ ही हरिद्वार पूर्णकुम्भ समाप्त हो जाएगा।वैसे आज भ्रमवश हमलोग इसे हनुमान जयंती भी मान मना रहे है।पर क्या वास्तव में आज का दिन भगवान हनुमान प्रकाट्य दिवस है?दरसल इस चैत्र पूर्णिमा के आसपास चैत्र शुक्ल पक्ष त्रियोदशी तिथि अपने जैनधर्म के २४वे और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर जी का जन्मदिवस है जो कि अंग्रेजी तिथि से हर बार बदलता रहता है।वैसे कभी कभी हिन्दू पंचांग तिथियों के क्षय के नाते एक ही दिन त्रियोदशी और चतुर्दशी दोनों तिथि आ जाती है।किंतु कुल मिलाकर यह महावीर स्वामी जी की जयंती है महावीर हनुमानजी का प्रकाट्य दिवस नही है।वैसे नाम की समानता के नाते ऐसा भ्रम हो जाना अनुचित नही है।ऐसी मान्यताओ मे भी कोई दोष भी नही है।किन्तु जन्मदिवस मे तो अन्तर है।अतः महापुरूषों देवताओं का जन्मोत्सव भ्रमात्मक नही अपितु प्रमात्मक तथ्यों के आधार पर मनाए।वैसे अपना उद्देश्य आप सबो को वास्तविक जानकारी मात्र अवगत कराना है।आप मे से किसी को आहत करना नही है।
बाकी अगर किसी अन्य ग्रंथ या साहित्य में इससे संबंधित कोई दृष्टांत हो तो मुझे भी अवगत कराये।क्योंकि रामचरित मानस या बाल्मीकि रामायण में तो ये तिथि वर्णित नहीहै ।
भगवान श्री हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी तिथि को स्वाती नक्षत्र मेष लग्न मे मंगलवार दिन को हुआ था।स्वयं भगवान शिव ने माता अंजनी के गर्भ से जन्म लिया था ऐसा मानना चाहिए।ऐसा ही वायु पुराण मे वर्णित है “आश्विन्यसाशिते पक्षे स्वात्याम् भौमे चतुर्दशी! मेष लग्ने अंजनी गर्भात् स्वयं जातः हरिः शिवः! इसी दिन पारंपरिक रूप से हम महावीरी हनुमान ध्वजा यात्रा निकालते हैं।

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वैसे आज के इस पूर्णिमा वाले पुण्यदायी तिथि पर हनुमानजी की जयंती शुभकामनाओं वाले संदेशों की बाढ़ सी आ गई है।क्या आम क्या खास,क्या गृहस्थ और क्या संत चारो तरफ अजीब हाल हो रखा है।रही सही इस कसर सोशल मीडिया गूगल बाबा और विकिपीडिया से आये अधूरे अधकचरे से ज्ञान ने भी कर रखा है।पर इसके लिए क्या यही दोषी है या फिर हमारे पंचांग निर्माता और नियामक संस्थायें अपराधी नही है।ये खुद को हिंदुत्व की सनातन परंपराओ की एकमात्र प्रवक्ता पैरोकार बनाये फिरती है।जबकि इनके ये पता नहीं कि कब कौन सा उत्सव और कब किनकी जयंती है।कब अधिक मास,मलमास,पुरुषोत्तम मास के नाते तिथि विशेष आगे बढ़ती है।आखिर हो भी कैसे जब देश की एक महत्वपूर्ण विद्वत सभा परिषद और प्रसिद्ध विश्वविद्यालय आपस में ये तक तय नही कर पा रहा है कि ये नवीन हिन्दू वर्ष राक्षस संवत्सरः है या आनंद नामक संवत्सरः है।इसका फल और फलाफल क्या होगा।फलतः आधी अधूरी अपुष्ट सूचनाओ के साथ आये पंचांग भ्रम और विवाद विषाद उत्पन्न करता है।ऐसी स्वेच्छाचारी प्रवृत्तियों पर रोक लगे हजारों लाखों वर्षों से चले आ रहे उन्नत गणित विज्ञान और खगोल शास्त्र के अनुसार निर्दोष व सटीक पंचांग कैलेंडर छप बन कर बाजार में आये।जय महाबली पवनपुत्र अंजनीसुत हनुमानजी जी की
और जय हो महावीर तीर्थंकर स्वामी जी की🙏🏻
-अमिय भूषण
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