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नरक चतुर्दशी को नर्क की यातनाओं से बचने के लिए यमराज को इस प्रकार करें प्रसन्न: आचार्य राधाकान्त शास्त्री*

 

*आचार्य राधाकान्त शास्त्री* *शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी जी का वास वहीं होता है जहां सुंदरता एवं पवित्रता हो। दूसरे अर्थों में नरक अर्थात गंदगी का अंत जरूरी है। दीपावली दीयों का त्यौहार है जिसमें लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। लक्ष्मी जी के स्वागत एवं पूजन के लिए लोग अपने घरों को साफ करने में जुट जाते हैं, इसी कारण घरों में पेंट एवं आदि करवाई जाती हैं तथा घरों को विभिन्न प्रकार के सुंदर एवं आकर्षक अंदाज में सजाने की परम्परा है। इस दिन अपने घर की सफाई जरूर करनी चाहिए। घर की सफाई के साथ ही अपने रूप और सौन्दर्य प्राप्ति के लिए भी शरीर पर उबटन लगा कर स्नान करना चाहिए। इस दिन रात को तेल के 14 दीपक जलानी चाहिए। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी नरक चौदस, रूप चतुर्दशी अथवा छोटी दीवाली के रूप में मनाई जाती है। इस दिन सायं 4 बत्ती वाला मिट्टी का दीपक पूर्व दिशा में अपना मुख करके घर के मुख्य द्वार पर रखें तथा यह मंत्र बोलकर दिप जलाए-*
*ॐ दत्तो दीप: चतुर्दश्यो नरक प्रीतये मया। चतुर्वर्ति समायुक्त: सर्व पापा न्विमुक्तये।।*
*मंत्र का जाप करें और नए पीले रंग के वस्त्र पहन कर यम का पूजन करें। जो व्यक्ति इन बातों पर अमल करता है उसे नर्क की यातनाओं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
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*हरि ॐ गुरुदेव..!*

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ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
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