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आइए जानते हैं होलिका दहन मुहूर्त, क्यों जलाते हैं होलिका?

 

काठमान्डू 18मार्च

इस वर्ष 25 मार्च को होली मनाई जाएगी. होली से ठीक एक दिन पहले होलिका दहन मनाई जाती है. प्रत्येक वर्ष होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को पड़ता है. हर त्योहार को मनाने का शुभ समय और मुहूर्त होता है. होलिका दहन का भी एक मुहूर्त है. इसके अनुसार ही पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है. होलिका दहन को ही छोटी होली कहा जाता है । आइए जानते है‌ होलिका दहन और होली का शुभ मुहुर्त ।

होलिका दहन का महत्व
होली और होलिका दहन की तैयारी लोग एक महीने पहले से ही शुरू कर देते हैं. होलिका दहन में पूजा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि आती है. संतान की प्राप्ति के लिए महिलाएं इस दिन पूजा करती हैं. पूजा करने के लिए कांटेदार झाड़ियों, लकड़ियों को इकट्ठा किया जाता है. फिर होली से एक दिन पहले शुभ मुहूर्त में होलिका का दहन किया जाता है.

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होलिका दहन मुहूर्त, क्यों जलाते हैं होलिका?
24 मार्च 2024 को इस बार होलिका दहन है. इस दिन सुबह 9 बजकर 47 मिनिट दिन से भद्रकाल लग रहा है, जो रात्रि 10 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इस भद्राकाल में होलिका दहन शुभकारी नहीं होता है. इसके बाद ही होलिका दहन करना आपके लिए मंगलकारी और शुभ होगा. ऐसी मान्यता है कि इस दिन स्वयं को ही भगवान मान बैठे हरिण्यकशिपु ने भगवान की भक्ति में लीन अपने ही पुत्र प्रह्लाद को अपनी बहन होलिका के द्वारा जीवित जला देना चाहा था. हालांकि, भगवान ने भक्त पर अपनी कृपा की और प्रह्लाद के लिए बनाई चिता में स्वयं होलिका जल मरी. तभी से इस दिन होलिका दहन मनाने की परंपरा शुरू हई.
होलिका दहन की पूजा विधि
होली में अग्नि प्रज्वलित करने से पहले होलिका का पूजन करने का विधान है. इसके लिए जातक को होलिका का पूजा करते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठना चाहिए. पूजा करने के लिए आप माला, फूल, कच्चा सूत, गुड़, रोली, गंध, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, पांच प्रकार के अनाज में गेंहू की बालियां और साथ में एक लोटा जल रखें. उसके बाद होलिका के चारों ओर परिक्रमा करनी चाहिए. अगले दिन होली की भस्म लाकर चांदी की डिबिया में रखना चाहिए.

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होलिका की पवित्र अग्नि में लोग जौ की बाल और शरीर पर लगाए गए सरसों के उबटन भी डालते हैं. ऐसा कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में खुशियां आती हैं. होलिका दहन भद्रा में कभी नहीं होता. होली के अगले दिन धुलेंडी का पर्व मातंग योग में मनाया जाएगा. दोनों दिन क्रमश: पूर्वा फागुनी और उत्तरा फागुनी नक्षत्र पड़ रहे हैं. स्थिर योग में आने के कारण होली को शुभ पर्व माना गया है.

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