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गौर हत्याकांड : उपेन्द्र यादव पर होगी जांच, सर्वोच्च अदालत का परमादेश

 
फाइल फोटो

काठमांडू। सर्वोच्च अदालत ने जसपा नेपाल के अध्यक्ष एवं पूर्व उपप्रधानमंत्री उपेन्द्र यादव पर गौर हत्याकांड के सम्बन्ध में जांच और कार्रवाई का आदेश जारी किया है। अदालत ने यह परमादेश 19 साल पुराने इस कांड से जुड़े पीड़ित पक्ष की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया।

क्या है मामला?

साल 2063 (2007 ई.) के चैत्र 7 गते रौतहट जिले के गौर स्थित एक राइस मिल परिसर में उस समय के मधेसी जनअधिकार फोरम और नेकपा माओवादी—दोनों पक्षों ने एक ही स्थान पर कार्यक्रम आयोजित किया था। कार्यक्रम के दौरान हुई हिंसक झड़प में 27 माओवादी कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई थी।

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हत्या में तत्कालीन जनअधिकार फोरम के अध्यक्ष रहे उपेन्द्र यादव समेत फोरम से जुड़े अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं की संलिप्तता का आरोप वर्षों से लगाया जाता रहा है।

पीड़ितों की गुहार

घटना के तुरंत बाद मृतकों के परिजनों ने जिला प्रहरी कार्यालय रौतहट में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, लेकिन उस समय पुलिस ने न तो गहन जांच की और न ही दोषियों पर मामला दर्ज किया। इसी कारण पीड़ित परिवार न्याय की तलाश में सर्वोच्च अदालत पहुँचे।

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पीड़ित परिवार की ओर से त्रिभुवन साह ने रिट दायर की थी, जिसमें घटना की पुनः जांच कर रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई थी।

अदालत का आदेश

न्यायाधीश तिलप्रसाद श्रेष्ठ और नित्यानन्द पाण्डे की संयुक्त पीठ ने सुनवाई के बाद जिला प्रहरी कार्यालय रौतहट को गौर हत्याकांड की जांच आगे बढ़ाने का परमादेश दिया है।

इस मामले में विपक्षी के रूप में रौतहट प्रहरी, सरकारी वकील का कार्यालय, प्रहरी प्रधान कार्यालय, गृह मंत्रालय आदि को नामजद किया गया है।

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निष्कर्ष

लगभग दो दशक बाद गौर हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। सर्वोच्च अदालत का यह फैसला न केवल उपेन्द्र यादव बल्कि पूरे मधेस की राजनीति के लिए भी बड़ा सवाल खड़ा करता है कि इतने वर्षों से दबा यह मामला अब किस दिशा में जाएगा।

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