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इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा का मानवीय मिशन: 2 साल बाद मिली बिछड़ी बुजुर्ग, भावुक हुआ पूरा परिवार

 

रक्सौल (बिहार), । इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा जुलाई 2024 में असम (भारत) स्थानांतरण हो कर चले गए किंतु भारत नेपाल सीमा पर उनके द्वारा किए गए कार्य अभी अपनी चमक दिखाते रहते हैं। ऐसे ही मानवता को जीवंत कर देने वाली एक मार्मिक घटना में इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा ने एक मानसिक रूप से अस्वस्थ और बेसहारा महिला को दिनांक 01.05.2024 को सुरक्षित रेस्क्यू किया था, फिर लगभग दो वर्षों तक माहेर ममता निवास रक्सौल द्वारा उसकी अथक सेवा वो प्रयास से उसे स्वस्थ किया और अब उसके परिवार से मिलवाकर एक बिछड़े परिवार को फिर से जोड़ दिया।

घटना का आरंभ :
इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा बजे जब अपने कार्य क्षेत्र में घूम रहे थे तब दिनांक 01/05/2024 को रात्रि लगभग 23:35 बजे, भारत-नेपाल सीमा पर स्थित हाजमा टोला के समीप रेलवे लाइन और सरकारी स्कूल के पास सड़क के किनारे से नीचे की ओर झाड़ियों में छूप कर बैठी एक बुजुर्ग महिला को अत्यंत दयनीय और भटकती अवस्था में देखा। उनका हृदय करुणा से भर गया।
यह दृश्य देखकर मानव तस्करी रोधी इकाई, 47वीं वाहिनी स.सी. बल रक्सौल के प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा तुरंत रुके और महिला से बातचीत करने का प्रयास किया। महिला के व्यवहार से समझ आ गया कि महिला मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है।
फिर उन्होंने अपनी टीम को तुरंत घटना स्थल पर बुलाया और माहेर ममता निवास के प्रोटेक्टर वीरेन्द्र कुमार को भी जानकारी दी।
महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त प्रतीत हो रही थी और किसी भी प्रकार का स्पष्ट उत्तर देने में असमर्थ थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल महिला ममता निवास (एनजीओ), रक्सौल में पहुंचाया गया ।

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रेस्क्यू और उपचार:
इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा के नेतृत्व में टीम ने महिला को सुरक्षित रेस्क्यू कर माहेर ममता निवास, रक्सौल में आश्रय में पहुंचाने के पश्चात वहां से उसका लगातार इलाज डंकन अस्पताल में कराया गया। माहेर ममता निवास के लंबे उपचार और देखभाल के बाद महिला पूरी तरह स्वस्थ हो गई।

याददाश्त लौटी, खुला पहचान का रास्ता:
स्वस्थ होने के बाद महिला की स्मृति धीरे-धीरे वापस आई। उसने अपने क्षेत्र और नजदीकी थाने का नाम बताया। फिर प्रोटेक्टर वीरेन्द्र कुमार ने संबंधित थाने से संपर्क कर उसके परिवार तक सूचना पहुंचाई गई।
परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2024 में खेत से लौटने पर उनकी बुजुर्ग माँ घर से लापता हो गई थीं। काफी खोजबीन के बावजूद उनका कोई पता नहीं चल पाया था।

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भावुक मिलन:
लगभग दो वर्षों बाद अपनी माँ को सकुशल देखकर पूरा परिवार भावुक हो उठा। उनकी आँखों में खुशी के आँसू थे और दिल में उस टीम के प्रति असीम आभार, जिसने उनकी उम्मीद को फिर से जीवित कर दिया।

सम्मानपूर्वक बुजुर्ग महिला को उसके परिवार को सौंपा गया :
दिनांक 05/04/2026 को महिला को उसके भाई जयपाल गोंड को थाना हरैया के थाना अध्यक्ष किशन पासवान की उपस्थिति में विधिवत सौंपा गया। इसके बाद वह अपने घर गांव मेंनटोला, जिला अनूपपुर (मध्यप्रदेश) के लिए प्रस्थान हो गईं।

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इस मानवीय मिशन में शामिल टीम:
इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा
उपनिरीक्षक अनिल कुमार शर्मा
कांस्टेबल जितेन्द्र, कांस्टेबल (महिला) टीनू कुमारी, कांस्टेबल (महिला) पिंकी कुमारी
प्रोटेक्टर इंचार्ज बीरेंद्र कुमार
और महिला इंचार्ज सुप्रिया बोदरा माहेर ममता निवास, रक्सौल (पूर्वी चंपारण), बिहार के सदस्य

निष्कर्ष:
यह घटना केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, कर्तव्यनिष्ठा और मानवता की मिसाल है। जब कर्तव्य के साथ करुणा जुड़ती है, तब ऐसे ही चमत्कार होते हैं, जो समाज को एक नई दिशा देते हैं।

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