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सदन में जनता की आवाज दबेगी तो जनता खुद संसद में घुसेगी: मनीष झा

 

काठमांडू, 6 अप्रैल 026। सांसद मनीष झा ने चेतावनी दी है कि यदि संसद में जनता के सवालों को दबाया गया तो जनता खुद सदन में प्रवेश करने को मजबूर हो सकती है।

सोमवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक में बोलते हुए उन्होंने कहा कि संसद जनता की आवाज उठाने का मंच है और यदि वहां जनता के सवालों का अस्तित्व ही खत्म कर दिया जाएगा तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

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उन्होंने कहा, “अगर सदन में जनता के सवालों का अस्तित्व नहीं रहेगा, तो जनता खुद सदन में घुसेगी। इसका संकेत भाद्र 23 और 24 की घटनाओं में पहले ही दिखाई दे चुका है।”

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अतीत में संसद को सत्ता केंद्रों से चलाने की कोशिशों के कारण विवाद और असंतोष बढ़ा था।

झा ने सत्तापक्ष के अहंकार को जनआंदोलन भड़कने का कारण बताते हुए कहा कि तथाकथित “जेन-जी आंदोलन” भी इसी असंतोष का उदाहरण है।

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उन्होंने नवनिर्वाचित सभामुख से संसद को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चलाने की अपील की।

उन्होंने कहा, “सभामुख को उदारता और लोकतांत्रिक संस्कार दिखाना होगा तथा सभी को यह विश्वास दिलाना होगा कि संसद सच में जनता की आवाज का प्रतिनिधित्व करती है।”

झा ने जोर देते हुए कहा कि संसद को जनता की वास्तविक प्रतिनिधि संस्था के रूप में स्थापित करने के लिए सभी राजनीतिक दलों और सांसदों को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।

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