ओली–प्रचण्ड पुनः समझदारी के प्रयास में, चीनी राजदूत की सक्रियता हो रहा है प्रभावकारी !
काठमांडू, ७ जुलाई । सत्ताधारी दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी में विकसित आन्तरिक विवाद समाधान के लिए नेताओं की दौड़धूप जारी है । पिछली बार प्रधानमन्त्री भी रहे पार्टी अध्यक्ष केपीशर्मा ओली और दूसरे अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड बीच पुनः समझदारी निर्माण के लिए नेताओं ने प्रयास किया है । कहा जाता है कि पिछली बार अध्यक्ष प्रचण्ड भी प्रधानमन्त्री ओली के प्रति सफ्ट हो गए हैं ।
आज अपरान्ह अध्यक्ष एवं प्रधानमन्त्री से मिलने के लिए अध्यक्ष प्रचण्ड बालुवाटार पहुँच गए हैं । स्मरणीय है, पिछली बार ओली को प्रधानमन्त्री और पार्टी अध्यक्ष दोनों पद से हटने के लिए पार्टी की ओर से दबाव हो रहा था, उसका नेतृत्व अध्यक्ष प्रचण्ड ने किया था । लेकिन इस्तिफा मांगनेवाले नेताओं को प्रधानमन्त्री ओली ने साफ–साफ कहा कि वह प्रधानमन्त्री और पार्टी अध्यक्ष दोनों पद से नहीं हटेंगे, जो करना है कीजिए । जिसके चलते ओली विरोधी समूह में कुछ लचकता दिखाई दी है ।
बाहरी राजनीतिक वृत्त में ही नहीं, स्वयम् नेकपा के भीतर भी पार्टी विभाजन की बहस होने लगी थी । लेकिन कार्यकर्ताओं की ओर से दबाव आने लगा कि अगर ऐसी समय में पार्टी विभाजन करते हैं तो ओली के विरुद्ध में रहे समूह को ‘भारतीय दलाल’ का आरोप लगनेवाला है । कहा जाता है कि ‘भारतीय दलाल’ संबंधी आरोप से बचने के लिए ही ओली विरोधी समूह में लचकता दिखाई दी है । विशेषतः नेकपा के ही कार्यकर्ताओं ने अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल को इसतरह का आरोप लगाते हुए बदनाम करने का अभियान ही शुरु किया था ।
इतना ही नहीं पड़ोसी देश चीन की राजदूत होउ यान्छी की सक्रियता भी अधिक हो रही थी । राजदूत यान्छी ने नेकपा के प्रायः सभी शीर्ष नेता से लेकर प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति से भी भेटवार्ता की है । कहा जाता है कि उनकी यह सक्रियता नेकपा की संभावित विभाजन रोकने के लिए ही है । राजनीतिक वृत्त में यह भी चर्चा होने लगी है कि राजदूत यान्छी की सक्रियता नेकपा के भीतर काम कर रहा है ।

