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जानिए क्या है रंभा तीज का महत्तव और कब किया जाता है यह व्रत ?

 

हिन्दू पंचांग के अनुसार रंभा तीज व्रत ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया को किया जाता है। इस वर्ष यह व्रत 13 जून 2021, रविवार को रखा जाएगा। विवाहित महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र और बुद्धिमान संतान पाने के लिए यह व्रत रखती है जबकि कुंआरी कन्याएं यह व्रत अच्छे वर की प्राप्ति की कामना से करती हैं। कहते हैं कि यह व्रत शीघ्र फलदायी होता है। आइए जानते हैं रंभा कौन थी और क्या है उनकी साधना।

कौन है रंभा :

1. पौराणिक शास्त्रों के अनुसार अप्सराएं देवलोक में रहने वाली अनुपम, अति सुंदर, अनेक कलाओं में दक्ष, तेजस्वी और अलौकिक दिव्य स्त्री है। देवराज इन्द्र के स्वर्ग में हजारों अप्सराएं थीं लेकिन उनमें से 1008 प्रमुख थी। उनमें से भी 11 अप्सराएं प्रमुख सेविका थीं। ये 11 अप्सराएं हैं- कृतस्थली, पुंजिकस्थला, मेनका, रम्भा, प्रम्लोचा, अनुम्लोचा, घृताची, वर्चा, उर्वशी, पूर्वचित्ति और तिलोत्तमा। इन सभी अप्सराओं की प्रधान अप्सरा रम्भा थीं।
2. रामायण काल में यक्षराज कुबेर के पुत्र नलकुबेर की पत्नी के रूप में इसका उल्लेख मिलता है। रावण ने रम्भा के साथ बलात्कार करने का प्रयास किया था जिसके चलते रम्भा ने उसे शाप दिया था।

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3. कहते हैं कि रम्भा का प्रकट्य समुद्र मंथन से हुआ था। इसीलिए उसे लक्ष्मीस्वरूपा भी कहा जाता है। लेकिन एक अन्य मान्यता अनुसार रम्भा के पिता का नाम कश्यप और माता का नाम प्रधा था।

4. एक बार विश्वामित्र की घोर तपस्या से विचलित होकर इंद्र ने रम्भा को बुलवाकर विश्वामित्र का तप भंग करने के लिए भेजा लेकिन ऋषि इन्द्र का षड्यंत्र समझ गए और उन्होंने रम्भा को एक हजार वर्षों तक शिला बनकर रहने का शाप दे डाला।
5. वाल्मीकि रामायण की एक कथा के अनुसार एक ब्राह्मण द्वारा यह ऋषि के शाप से मुक्त हुई थीं। लेकिन स्कन्द पुराण के अनुसार इसके उद्धारक ‘श्वेतमुनि’ बताए गए हैं, जिनके छोड़े बाण से यह शिलारूप में कंमितीर्थ में गिरकर मुक्त हुई थीं।

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6. कहते हैं कि आकर्षक सुन्दरतम वस्त्र, अलंकार और सौंदर्य प्रसाधनों से युक्त-सुसज्जित, चिरयौवना रम्भा के बारे में कहा जाता है कि उनकी साधना करने से साधक के शरीर के रोग, जर्जरता एवं बुढ़ापा समाप्त हो जाते हैं।
7. माना जाता है कि अप्सराएं गुलाब, चमेली, रजनीगंधा, हरसिंगार और रातरानी की गंध पसंद करती है। अप्सरा साधना के दौरान साधक को अपनी यौन भावनाओं पर संयम रखना होता है अन्यथा साधना नष्ट हो सकती है। संकल्प और मंत्र के साथ जब साधना संपन्न होती है तो अप्सरा प्रकट होती है तब साधन उसे गुलाब के साथ ही इत्र भेंट करता है। उसे फिर दूध से बनी मिठाई, पान आदि भेंट दिया जाता है और फिर उससे जीवन भर साथ रहने का वचन लिया जाता है। ये चमत्कारिक शक्तियों से संपन्न अप्सरा आपकी जिंदगी को सुंदर बनाने की क्षमता रखती है।

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