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नागपंचमी का पर्व हस्‍त नक्षत्र व साध्‍य योग में,ये दोनों योग बहुत ही फलदायी

 

 

शुक्रवार को नागपंचमी का पर्व हस्‍त नक्षत्र व साध्‍य योग में मनाया जा रहा है। सावन महीने की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। एक तरफ जहां सावन भोले शंकर का महीना है, वहीं नागदेवता को भगवान भोलेनाथ और विष्णु का सर्वाधिक प्रिय बताया गया है। पंचमी तिथि दोपहर 1.42 बजे तक रहेगी, इसलिए इससे पहले ही नाग पंचमी की पूजा कर लेनी सही रहेगी। इस दिन हस्त नक्षत्र शाम 7.58 बजे तक और साध्य योग शाम 6.48 बजे तक रहेगा। ये दोनों योग बहुत ही फलदायी हैं।

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भगवान शिव तो अपने गले में सर्प को स्थान देते हैं। वहीं भगवान विष्णु शेषनाग पर ही विश्राम करते हैं। नाग देव पाताल लोक के स्वामी माने जाते हैं। कहा जाता है कि नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से उनकी कृपा बनी रहती है और वह घर की सुरक्षा करते हैं। नागपंचमी के पूजन से कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है।

कई जगह इस दिन नाग देवता को दूध और धान का लावा का प्रसाद चढ़ाया जाता है। सुबह के समय लोग गिलास अथवा लौटे में दूध लेकर नाग चित्र पर दूध चढ़ाकर सुगंधित धूप से पूजा अर्चना करते हैं। इस दिन नाग देवता का दर्शन करना भी शुभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार बताया कि इस दिन गरुण जी ने तक्षक नामक नाग को अभयदान दिया था और उसी समय से नाग पंचमी के दिन नाग की पूजा अर्चना की जाती है।

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