विवाह पंचमी मेला की रौनक समाप्त होने पर जनकपुर वासियों ने जतायी चिंता

जनकपुरधाम (नेपाल), मिश्री लाल मधुकर । विवाह पंचमी के दिन जनकपुरधाम मेंलाखो की भीड़ थी। कलेवा संपन्न होते हीकरीब 80फीशदी यात्री चले गए। गुरूवार तक सड़क पर तिल रखने का जगह नहीं था। आज सड़कों परसन्नाटा पसरा हैं। दूकानों पर भी भीड़ नहीं है। मेला के सिमटने पर जनकपुर वासियों में चिंता है। स्थानीय निवासी असर्फी झा, प्रमोदानंद झा, उद्योग बाणिज्य संघ के पूर्व अध्यक्ष राम साह आदि लोगों का कहना है चार दशक पहले जनकपुरधाम में विवाह पंचमी मेला पंद्रह दिनों तक रहता था। जनकपुरधाम के तिरहुतिया गाछी (पहाड़िया गाछी) में मेला लगता था। नेपाल तथा भारत के व्यापारी आते थे। वर्तन, कपड़ा, मिठाई आदि के दूकान लगा रहता था। पहाड़ के व्यापारी शिलाजीत, जड़ी बूटी, पस्मीना चादर, कंबल आदि बेचने आते थे। थियेटर भी रहता था लेकिन आज की तरह अश्लीलता नहीं परोसता था। भारतीय व्यापारियों को भंसार नहीं लगता था। अव समय बदल चुका हैं। बस तथा कार की सुविधा होने से 24घंटा पहले आते हैं और विवाह महोत्सव देखने के बाद लौट जाते है।

