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चुनाव के बाद देश की राजनीति में अस्थिरता की आशंका

 

विश्लेषकों के अनुसार इस बार के आम चुनाव में बड़ी पार्टियों को समानुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटें पहले जितनी ना मिलें। अगर ऐसा हुआ, तो देश में किसी एक गठबंधन के लिए स्थिर सरकार बनाना कठिन हो जाएगा। पांच वर्ष पहले यानी 2017 में हुए आम चुनाव के दौरान 49 पार्टियों ने खुद को समानुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटों के लिए रजिस्टर्ड कराया था। लेकिन उनमें से सिर्फ पांच ही इसके योग्य खुद को साबित कर पाईं।  समानुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीट पाने के लिए यह जरूरी है कि कोई दल प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली कम से कम एक सीट पर विजयी हो और इन राष्ट्रीय स्तर पर हुए मतदान में कम से कम तीन फीसदी वोट उसे मिले हों।

देश की संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में 275 सीटें हैं। इनमें से 165 का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से फर्स्ट पास्ट द पोट्स सिस्टम के तहत होता है। इसके बाद निर्वाचन आयोग एक खास फॉर्मूले से आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटों का आवंटन पार्टियों के बीच करता है।

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इस बार आम चुनाव के लिए मतदान 20 नवंबर को होगा। उस रोज प्रतिनिधि सभा की 165 और सात प्रांतीय असेंबलियों की 330 सीटों पर प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के तहत मतदान होगा। 2017 में समानुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटें पाने की कसौटी पर जो पार्टियां खरी उतरी थीं, वे हैं- कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल), नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर), राष्ट्रीय जनता पार्टी (अब इस पार्टी का नाम लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी है), और संघीय समाजवादी फोरम (अब इस पार्टी का नाम जनता समाजवादी पार्टी है)।

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पिछले आम चुनाव में जितने वोट पड़े थे, उनमें से तकरीबन 90 फीसदी वोट इन पांच दलों के हिस्से में गए थे। 10.37 फीसदी वोट अन्य दलों को मिले, लेकिन उनमें से कोई अकेले तीन फीसदी वोट नहीं पा सका। इसलिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीट पाने से वे तमाम पार्टियां वंचित रह गईं। इसका फायदा पांच बड़े दलों को मिला।

लेकिन चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार अलग सूरत उभरने की संभावना है। बीते 13 मई को हुए स्थानीय चुनावों से संकेत मिला था कि अगले आम चुनाव में कई छोटी पार्टियां तीन फीसदी वोट की कसौटी पूरी करने की स्थिति में हो सकती हैं। पूर्व निर्वाचन आयुक्त भोजराज पोखरेल ने  कहा है कि- ‘इस बार राष्ट्रीय पार्टियों की संख्या बढ़ी है। इसका परिणाम यह हो सकता है कि बड़ी पार्टियों को समानुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटें कम मिलें।’

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नेपाली कांग्रेस, यूएमएल, माओइस्ट सेंटर, राष्ट्रीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अलावा स्थानीय चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) भी तीन फीसदी से अधिक वोट पाने में सफल रही थी। यूनिफाइड सोशलिस्ट 2017 में यूएमएल का ही हिस्सा थी। भोजराज पोखरेल के आकलन के मुताबिक इस बार छह या सात पार्टियां ऐसी होंगी, जिन्हें तीन फीसदी से ज्यादा वोट मिलेंगे। ऐसे में इन पार्टियों के बीच आऩुपातिक सीटों का बंटवारा होगा।

विश्लेषकों के मुताबिक अधिक दलों में इन सीटों के बंटने का मतलब बड़े दलों के सीटों का घटना होगा। इससे स्थिर सरकार का बनाना और कठिन हो जाएगा।

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