प्रधानमंत्री दहाल की भारत यात्रा के बीच गरमाया, ईपीजी रिपोर्ट का मुद्दा
काठमान्डू
प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल अपनी भारत यात्रा की तैयारियों में जुटे हुए हैं, इसी बीच एक पुरानी रिपोर्ट अचानक चर्चा में आ गई है। भारत और नेपाल ने 2016 में गणमान्य व्यक्तियों की एक समिति (इमिनेंट पर्संस ग्रुप- ईपीजी) का गठन किया था। उसे दोनों देशों के रिश्तों की पूरी समीक्षा कर आगे का रास्ता सुझाने का जिम्मा दिया गया था। समिति को 1950 में हुई भारत-नेपाल संधि की भी समीक्षा करने को कहा गया था। नेपाल में जनमत के एक बड़े हिस्से की राय रही है कि वह संधि असमान शर्तों पर हुई थी और उससे नेपाल को नुकसान हुआ है।
ईपीजी ने 2018 में अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली। लेकिन समिति आज तक अपनी रिपोर्ट सौंप नहीं पाई है। चर्चा में यह आरोप लगाया गया है कि रिपोर्ट को ग्रहण में भारत की अनिच्छा के कारण समिति की रिपोर्ट ठंडे बस्ते में चली गई। अब यह मांग उठी है कि प्रधानमंत्री दहाल अगले हफ्ते होने वाली अपनी भारत यात्रा के दौरान इस समिति की रिपोर्ट से जुड़े मुद्दे को मजबूती से उठाएं।
ईपीजी में नेपाल की तरफ से समन्वयक रहे भेख बहादुर थापा ने कहा है- ‘हम हमेशा ही मांग करते रहे हैं कि ईपीजी की रिपोर्ट को स्वीकार किया जाए, लेकिन वे (भारतीय अधिकारी) इसकी उपेक्षा करते रहे हैं।’ थापा के मुताबिक सहमति यह बनी थी कि दोनों देशों के प्रधानमंत्री एक साथ रिपोर्ट को ग्रहण करेंगे, लेकिन अब यह सहमति टूट चुकी है।
भारत और नेपाल सबसे निकट पड़ोसी होने का दावा करते हैं, लेकिन उनके रिश्तों में उतार-चढ़ाव के दौर आते-जाते रहे हैं। इसीलिए ईपीजी के गठन का सुझाव आया था । यह सुझाव सबसे पहले 2011 से 2013 तक नेपाल के प्रधानमंत्री रहे प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने दिया था। तब भारत में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और उऩ्होंने यह सुझाव मान लिया था। लेकिन असल में ईपीजी का गठन 2016 में हुआ, जब भारत में नरेंद्र मोदी और नेपाल में केपी शर्मा ओली की सरकारें बन चुकी थीँ। भारत की तरफ से इसमें भाजपा नेता भगत सिंह कोशियारी के नेतृत्व में कई विशेषज्ञ शामिल हुए थे।
बीते हफ्ते संसद में दहाल की प्रस्तावित भारत यात्रा पर बहस हुई। उस दौरान विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के सांसद रघुजी पंत ने ईपीजी रिपोर्ट का मुद्दा उठाया। उन्होंने दहाल से कहा कि वे अपनी नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत से इस रिपोर्ट को स्वीकार करने को कहें। पंत ने दावा किया कि इस रिपोर्ट में भारत-नेपाल संबंधों को बदली वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों में नया रूप देने का खाका मौजूद है।
लेकिन इस विषय पर भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि उस रिपोर्ट का मुद्दा उठाना चर्चा को अतीत में अटकाना होगा। नेपाल में भारत के राजदूत रह चुके रंजीत राय ने कहा है कि- ‘प्रधानमंत्री दहाल की यात्रा भविष्य की तरफ देखने वाली होनी चाहिए। मेरी राय में ईपीजी की रिपोर्ट मृत हो चुकी है। अगर उस यात्रा को ग्रहण करने की कोई प्रासंगिकता होती, तो ऐसा पहले ही हो चुका है।’


