आज गुरु पूर्णिमा
काठमांडू, १८ गते
आज गुरु पूर्णिमा । आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है । धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ इस दिन को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है ।
ऐसी मान्यता है कि ज्ञान देने वाले गुरु को सम्मान कर, उन्हें याद कर यह दिन मनाया जाता है । यदि गुरु के अर्थ में जाए तो ‘गु’ का अर्थ अन्धकार और ‘रु’ का अर्थ उजाला होता है । जो अँधेरे से उजाले की ओर जो ले जाए , जो ज्ञान का प्रकाश फैलाएं , जो जीवन के यर्थाथ से आपको परिचित करवाएं ऐसे सभी गुरु को आज के दिन सम्मानपूर्वक याद किया जाता है । अगर आपके गुरुजन आपके साथ आज भी हैं तो उनका चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद लें । गुरु का जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है । गुरु केवल वह नहीं जो आपको शिक्षा देते हैं । गुरु वह भी है जो आपको चलना बोलना और जीवन का पहला पाठ पढ़ाती हैं ।
मनुस्मृति में जन्म देने वाले, संस्कार देने और मन्त्र देने या वेद पढ़ाने वालों को गुरु कहा गया है । माँ का पहला गुरु माना गया है । उसके बाद पिता को, यज्ञोपवित के समय में जो गुरु मंत्र देते हैं तथा जो जिनसे आप शिक्षा ग्रहण करते हैं । इन सबको गुरु कहा गया है ।
समाज और इसके निर्माण प्रक्रिया में गुरु एक अभिन्न अंग है । हिंदू धर्म में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का रूप माना गया है । शास्त्रों में भी गुरु को देवताओं से भी ऊंचा स्थान प्राप्त है । स्वयं भगवान शिव गुरु के बारे में कहते हैं, ‘गुरुर्देवो गुरुर्धर्मो, गुरौ निष्ठा परं तपः। गुरोः परतरं नास्ति, त्रिवारं कथयामि ते ’ यानी गुरु ही देव हैं, गुरु ही धर्म हैं, गुरु में निष्ठा ही परम धर्म है. इसका अर्थ है कि, गुरु की आवश्यकता मनुष्यों के साथ स्वयं देवताओं को भी होती है ।
गुरु को लेकर कहा गया है कि –हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहिं ठौर । अर्थात् भगवान के रूठने पर गुरु की शरण मिल जाती है, लेकिन गुरु अगर रूठ जाए तो कहीं भी शरण नहीं मिलती । इसलिए जीवन में गुरु का विशेष महत्व होता है ।

