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जनकपुर में हिन्दी शिक्षण विधि कार्यशाला सम्पन्न

 

s-1कैलास दास ,जनकपुर, पुस १० । जनकपुर में त्रिभूवन विश्वविद्यालय हिन्दी केन्द्रीय विभाग की आयोजना में विश्वविद्यालय स्तरीय हिन्दी साहित्य शिक्षण विधि कार्यशाला सम्पन्न हुई । कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए त्रिभुवन विश्वविद्यालय मानविकि शास्त्र संकाय के डिन प्रध्यापक डा.चिन्तामणि पोखरेल ने बताया कि विश्वविद्यालय के आङ्गिक क्याम्पसों में देखी जारही गया लापरवाही को रोकने के लिए ही सेमेष्टर प्रणाली की व्यवस्था की गई है ।
केन्द्रीय हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डा.श्वेता दिप्ती की अध्यक्षता में हुये कार्यक्रम में डिन पोखरेल ने कहा कि विश्वविद्यालय में नामांकित होना और कक्षा में उपस्थित न होनेवाली प्रवृति को रोकना तथा प्राध्यापक और कर्मचारी को विश्वविद्यालय के प्रति जिम्मेवार बनाने के लिए सेमेस्टर प्रणाली जरुरी है । इस प्रणाली को लागू होने के बाद विद्यार्थी को अनिवार्य रुप में ८० प्रतिशत उपस्थिति आवश्यक है । एसा होने पर विद्यार्थी और प्राध्यापक को क्लास में उपस्थित होना बाध्यता हो जाऐगी । ऐसाहोने पर स्तरिय उत्पादन की अपेक्षा की जा रही है । इस प्रवृति को रोकने के लिए सेमेष्टर प्रणाली द्वारा पठन पाठन में kसुधार कर नीति विश्वविद्यालय में लोगू होना आवश्यक रहा उन्होने कहा । इस अवसर पर क्याम्पस प्रमुख नमेन्द्र निधि ने मानविकी संकाय मे क्षात्रो की निरन्तर कम होने पर अपनी चिन्ता जतायी । प्रो नवीन मिश्र ने स्तरिय कार्यक्रम करने के लिये हिन्दी विभागाध्यक्ष श्वेता दीप्ति को सराहा ।
कार्यक्रम में सहभागी अन्य वक्तागण ने  कहा कि चार दशक पूर्व हिन्दी भाषा का व्यापक प्रचार—प्रसार रहा, हिन्दी माध्यम से  पठन पाठन होने के वावजूद भी भेदभाव किया धारणा व्यक्त की ।
कार्यक्रम में राराब क्याम्पस का पूर्व प्रमुख उपेन्द्र कमल ने कहा जहाँ का तलव खाते है वहा पर सिर्फ हाजिरी करते है और निजी विद्यालय में वही प्राध्यापक पढाते है । सभी सुविधा क्याम्पस से लेते है और मेहनत किसी निजी क्याम्पस में करते है । ऐसी प्रवृति को  रोकने की आवश्यकता है ।
कार्यक्रम में हिन्दी शिक्षण नेपाल का सन्दर्भ में उप–प्राध्यापक मंचला झा तथा विश्वविद्यालय स्तरीय हिन्दी साहित्य शिक्षणकी स्थिति, समस्या और समाधान का उपाय विषय पर आंशिक प्रध्यापक विनोद कुमार विश्वकर्मा ने कार्यपत्र प्रस्तुत किया था ।
s-2कार्यपत्र उपर पूर्व प्राध्यापक उपेन्द्र कमल तथा डा. अवध किशोर सिंह ने टिप्पणी की थी । हिन्दी प्रेमी खुशीलला मण्डल, राजेश्वर नेपाली सहित दर्जनौं वक्ता ने हिन्दी भाषा के विषय में अपनी अपनी धारणा रखी ।
कार्यक्रम के दुसरे सत्र में कविता वाचन किया गया था । कविता वाचन करने वाले में राजेश्वर नेपाली, श्वेता दिप्ती, रामभरत साह, विजय दत्त मणी, पुनम झा, लालजी ठाकुर, कैलास दास, रामरतन यादव, श्रीनारायण साह, लक्ष्मी जोशी, मिश्रीलाल मधुकर, जयशंकर नाथ झा, विडी चौधरी, चन्द्रशेखर राय, रामहृदय प्रसाद, सूर्यनाथ यादव, मनोज प्रेमेशी, पुनम झा, प्रेम विदेह ललन, नागेश्वर मण्डल, सपना कर्ण, किरण रश्मी, महेश आनन्द, विडी चौधरी, चन्द्रशेखर राय, रामस्वार्थ ठाकुर, सत्यनारायण आलोक सहित का कवि ने विभिन्न सन्दर्भ में वाचन किया था ।

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